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धूमधाम से हुआ भगवान श्री कृष्ण और रुक्मणी विवाह
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श्री कृष्ण और रुक्मणी के विवाह में कन्यादान की रश्म अदा करती महिलाएं
- फोटो : LALITPUR
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धूमधाम से हुआ भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह
कलौथरा। ग्राम कलौथरा में श्रीश्री 1008 श्री हनुमान गड़ी मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का विवाह धूमधाम से हुआ। इस अवसर में गांव में बरात निकाली गई जिसमें श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमकर नाचे। महिलाओं ने रुक्मिणी का कन्यादान की रस्म अदा की।
कथा वाचक कृष्णा प्रिया तिवारी ने भगवत कथा का वर्णन करते हुए श्रीकृष्ण की महिमा का बखान किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पूजा अर्चना करवाई जिसके फलस्वरूप सभी ब्रजवासियों को इंद्र देव के क्रोध को देखना पड़ा। इंद्र देव ने मेघों को भारी बारिश का आदेश दिया तब कन्हैया ने संपूर्ण ब्रजवासियों एवं समस्त जीवों की रक्षा के लिए अपनी कनिष्ठ उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर बृजवासियों की रक्षा की। उन्होंने बताया कि विश्वकर्मा जी से सागर के किनारे एक भव्य द्वारिका नगरी का निर्माण कराया और भगवान कन्हैया द्वारकाधीश कहलाए। भगवान श्री कृष्ण का विवाह रुक्मिणी के साथ धूमधाम से हुआ। इस मौके पर श्रीकृष्ण की बरात पूरे धूमधाम के साथ निकाली गई। इससे गांव का वातावरण भक्तिमय हो गया।
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कलौथरा। ग्राम कलौथरा में श्रीश्री 1008 श्री हनुमान गड़ी मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का विवाह धूमधाम से हुआ। इस अवसर में गांव में बरात निकाली गई जिसमें श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमकर नाचे। महिलाओं ने रुक्मिणी का कन्यादान की रस्म अदा की।
कथा वाचक कृष्णा प्रिया तिवारी ने भगवत कथा का वर्णन करते हुए श्रीकृष्ण की महिमा का बखान किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पूजा अर्चना करवाई जिसके फलस्वरूप सभी ब्रजवासियों को इंद्र देव के क्रोध को देखना पड़ा। इंद्र देव ने मेघों को भारी बारिश का आदेश दिया तब कन्हैया ने संपूर्ण ब्रजवासियों एवं समस्त जीवों की रक्षा के लिए अपनी कनिष्ठ उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर बृजवासियों की रक्षा की। उन्होंने बताया कि विश्वकर्मा जी से सागर के किनारे एक भव्य द्वारिका नगरी का निर्माण कराया और भगवान कन्हैया द्वारकाधीश कहलाए। भगवान श्री कृष्ण का विवाह रुक्मिणी के साथ धूमधाम से हुआ। इस मौके पर श्रीकृष्ण की बरात पूरे धूमधाम के साथ निकाली गई। इससे गांव का वातावरण भक्तिमय हो गया।
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