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कांशीराम कलोनी की बाउंड्रीवाल बनेगी, बाढ़ का पानी रुकेगा

Sat, 21 Mar 2020 11:12 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 21 Mar 2020 11:12 PM IST
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Kashiram boundary made after that will stop water
गोविंद सागर बांध का निरीक्षण करती सिंचाई विभाग की टीम - फोटो : LALITPUR
ललितपुर। गोविंद सागर बांध के पानी से बरसात में मान्यवर कांशीराम आवासीय कालोनी के निवासियों को बाढ़ के पानी से राहत मिलेगी। पानी से बचाव के लिए कॉलोनी के चारों ओर बाउंड्रीवाल बनाई जाएगी। इसके लिए विश्व बैंक पैसा खर्च करेगा।
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मान्यवर कांशीराम आवासीय कॉलोनी गोविंद सागर बांध के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में बनी है। प्रत्येक वर्ष यहां बरसात में लोगों को परेशानी होती है। लोगों के घरों में पानी भर जाता है तथा बाढ़ के कारण सब कुछ अस्त- व्यस्त हो जाता है। बाढ़ में लोगों के मकान गिरने तथा डूबने की आशंका बनी रहती है। बांधों का निरीक्षण करने आई डैम सेफ्टी रिव्यू पैनल की टीम ने यह समस्या देखी, उन्हें बताया गया कि बांध में पानी की क्षमता 4600 क्यूसेक है, जबकि बाढ़ के दौरान लगभग 5600 क्यूसेक पानी आता है, जिससे कॉलोनी में बाढ़ के हालात बनते हैं। रिव्यू पैनल की टीम ने पाया कि यदि कालोनी के चारों तरफ बाउंड्रीवाल बनाई जाए तो समस्या का समाधान हो सकता है। ऐसे में बाउंड्रीवाल बनाने का निर्णय लिया है। हालांकि, टीम अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगी, इसके बाद ही अंतिम निर्णय होगा। बांध में यह सब काम विश्व बैंक की मदद से होंगे। इसमें विश्व बैंक 70 प्रतिशत पैसा खर्च करेगा, जबकि राज्य सरकार 30 प्रतिशत पैसा खर्च करेगी।
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उधर, गोविंद सागर बांध के 73 साल पुराने गेटों को भी बदला जाएगा। इन गेटों को बरसात में खोलने और बंद करने के लिए काफी श्रमशक्ति लगती है। क्योंकि, यह गेट पुराने समय के लगे हैं। अब इनके स्थान पर शहजाद बांध में लगे गेटों की तर्ज पर आटोमैटिक मैकेनिकल ऑपरेटिंग गेट लगाए जाएंगे। साथ ही गोविंद सागर बांध के किनारे पार्क बनाने का प्रस्ताव था, जिससे बांध को पिकनिक स्पाट के रूप में डेवलप किया जा सके, लेकिन बांध के तीन सौ मीटर के इर्दगिर्द पार्क नहीं बनाया जाएगा। स्लूज सही किया जाएगा। अलग से एक मार्ग बनाया जाएगा, ताकि बांध के ऊपर ट्रैफिक का अधिक दबाव न रहे।
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बांध को बने हुए 73 साल हो गए हैं, इससे बांध की जलधारण क्षमता काफी कम हो गई है। इसका रिमोट सेंसिंग से सर्वे कराया जाएगा, इसके आधार पर कितनी सिल्ट है का आकलन करके सफाई कराई जाएगी। टीम में डैम सेफ्टी रिव्यू पैनल के चेयरमैन मसूद हुसैन, हाइड्रोलॉजिकल सदस्य आर के गुप्ता, डिजाइन सदस्य विवेक त्रिपाठी और एक्सपर्ट सतीश कंबोज शामिल रहे।
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माताटीला बांध में बनेगा नया स्पिल- वे
बरसात के सीजन में राजघाट बांध से माताटीला बांध में जो पानी आता है, उससे भी बांध में क्षमता से अधिक पानी आ जाता है। क्योंकि, राजघाट बांध से जितना पानी बरसात में छोड़ा जाता है, माताटीला बांध की क्षमता उससे काफी कम है। इस कारण बाढ़ की स्थिति बनती है और माताटीला बांध के ऊपर पानी का अतिरिक्त दबाव रहता है। इस कारण टीम ने निरीक्षण के बाद निर्णय लिया है कि माताटीला बांध का अलग स्पिल- वे बनाया जाएगा, ताकि बाढ़ के पानी को नियंत्रित किया जा सके।

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केंद्र से आई टीम ने निरीक्षण कर लिया है। सभी समस्याओं का अध्ययन कर लिया गया है। अब टीम रिपोर्ट तैयार करेगी और शासन की स्वीकृति के बाद विश्व बैंक की मदद से काम शुरू होंगे।
- मनमोहन सिंह
अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग
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