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धनराशि आ गई, नहीं है जमीन
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 19 Sep 2017 01:28 AM IST
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cow, lalitpur news
- फोटो : demo
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शहर में कान्हा पशु आश्रय बनाए जाने के लिए एक वर्ष पूर्व नगर पालिका को धनराशि उपलब्ध करा दी गई थी, लेकिन अब तक योजना परवान नहीं चढ़ सकी है। पूर्व में सुरईघाट मुक्तिधाम की जमीन के कुछ हिस्से पर पशु आश्रय का निर्माण कराया जा रहा था, लेकिन आपत्तियों के चलते जिलाधिकारी द्वारा इसको रुकवा दिया गया था और उन्होंने एक सप्ताह में दूसरी जमीन चिह्नित करने के लिए एसडीएम को निर्देश दिए थे। एक की जगह तीन सप्ताह बीत गए हैं, लेकिन अभी तक जमीन की तलाश पूरी नहीं हो सकी है।
शहर में आवारा घूम रहे पशुओं को उनका ठिकाना नहीं मिल पाने के कारण राहगीरों व स्थानीय लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही गौवंश भी हर रोज सड़क हादसों का शिकार बन रहे हैं। इन पशुुओं का आश्रय बनाने के लिए पूर्व प्रदेश सरकार ने नगर पालिका को 3.49 करोड़ रुपए की लागत से कान्हा पशु आश्रय बनाने की अनुमति दी थी और विगत वर्ष अगस्त माह में नगर पालिका को 1.74 करोड़ रुपए की प्रथम किश्त उपलब्ध करा दी थी। निर्माण के लिए जमीन का लंबे समय तक इंतजार करने के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी व मंडलायुक्त की स्वीकृति के बाद नगर पालिका ने बीते अप्रैल माह से शहर के सुरईघाट में स्थित लगभग ढाई एकड़ जमीन पर निर्माण कार्य शुुरु कराया गया था, जिसमें लगभग 30-35 लाख रुपए व्यय भी किए जा चुके हैं।
विभिन्न कारणों के चलते जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने बीते 30 अगस्त को सुरईघाट पर हो रहे निर्माण को पूरी तरह से बंद कराकर जमीन परिर्वतन करने के निर्देश दिए। इसी क्रम में उन्होंने मौके पर मौजूद सदर उप जिलाधिकारी महेश प्रसाद दीक्षित को आवश्यक कार्रवाई करते हुए ग्राम घटवार में स्थित ग्राम सभा की जमीन को कान्हा आश्रय के निर्माण के लिए उपलब्ध कराने के लिए निर्देश दिए थे। जिलाधिकारी के इस निर्देश को लगभग तीन सप्ताह बीत गए हैं, लेकिन जमीन उपलब्ध तो दूर की बात जमीन की तलाश तक पूरी नहीं हो सकी है। वर्तमान में बरसात का मौसम चल रहा है, जमीन गीली होने व मैदानों में कीचड़ होने के कारण आवारा घूम रहे यह पशु सड़कों व मुख्य मार्ग को अपना ठिकाना बना रहे हैं।
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इससे यातायात तो बाधित हो ही रहा है, साथ ही सड़क दुर्घटनाओं की संभावना बनी रहती है। इसके अलावा जब यह पशु सड़कों व बाजार क्षेत्र में आपस में लड़ते हैं तो वाहन व अन्य सम्मति का नुकसान तो होता है साथ ही लोग भी घायल हो जाते हैं। यह समस्या वर्षों से चली आ रही है, जिला प्रशासन व नगर पालिका को इस समस्या के निस्तराण के लिए गंभीरता दिखाना बेहद जरूरी है।
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नगर पालिका कर रही मुफ्त की जमीन का इंतजार
नगर पालिका बीते डेढ़ वर्षों से कान्हा पशु आश्रय योजना के लिए न तो खुद ही जमीन तलाश पाई है और न ही अपने कोष से इसके लिए जमीन की खरीदी कर सकी है। नगर पालिका तो केवल जिला प्रशासन से मुफ्त की जमीन की मांग करने में लगी हुई है। इस योजना के शासनादेश में उल्लेख है कि यदि नगर पालिका के पास जमीन नहीं है या फिर वह जमीन उपलब्ध कराने में असमर्थ है, तो फिर जिला प्रशासन मुफ्त में जमीन उपलब्ध कराएगा। गौरतलब है कि नगर पालिका के साथ ही नगर पंचायत तालबेहट को भी शासन से कान्हा पशु आश्रय बनाने के लिए धनराशि उपलब्ध कराई थी। नगर पंचायत तालबेहट अध्यक्ष मुक्ता सोनी ने अपना कार्यकाल पूर्ण होने से पूर्व अपने बोर्ड फंड से तालबेहट नगर के समीप दो एकड़ जमीन की खरीद करके जनप्रतिनिधि होने की जिम्मेदारी पूरी निभाई थी। वर्तमान में तालबेहट में पशु आश्रय का निर्माण कार्य शुरु हो चुका है। तालबेहट में मात्र आठ लाख रुपए की दो एकड़ जमीन खरीदी गई है, नगर पालिका क्षेत्र में भी इतने सस्ते दामों पर भी जमीन उपलब्ध है, यदि नगर पालिका चाहे तो अपने बोर्ड फंड से जमीन की खरीदी कर सकती है।
जिलाधिकारी के निर्देशन पर ग्राम घटवार में स्थित ग्रामसभा की जमीन का निरीक्षण किया गया था, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए उचित मार्ग नहीं है। इस वजह से वह जमीन निरस्त हो गई है, वर्तमान में दैलवारा के पास एक जमीन है, जिसको परखा जा रहा है। जल्द ही कान्हा पशु आश्रय के लिए जमीन उपलब्ध करा दी जाएगी।
महेश प्रसाद दीक्षित
सदर उप जिलाधिकारी, ललितपुर।
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शहर में आवारा घूम रहे पशुओं को उनका ठिकाना नहीं मिल पाने के कारण राहगीरों व स्थानीय लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही गौवंश भी हर रोज सड़क हादसों का शिकार बन रहे हैं। इन पशुुओं का आश्रय बनाने के लिए पूर्व प्रदेश सरकार ने नगर पालिका को 3.49 करोड़ रुपए की लागत से कान्हा पशु आश्रय बनाने की अनुमति दी थी और विगत वर्ष अगस्त माह में नगर पालिका को 1.74 करोड़ रुपए की प्रथम किश्त उपलब्ध करा दी थी। निर्माण के लिए जमीन का लंबे समय तक इंतजार करने के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी व मंडलायुक्त की स्वीकृति के बाद नगर पालिका ने बीते अप्रैल माह से शहर के सुरईघाट में स्थित लगभग ढाई एकड़ जमीन पर निर्माण कार्य शुुरु कराया गया था, जिसमें लगभग 30-35 लाख रुपए व्यय भी किए जा चुके हैं।
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विभिन्न कारणों के चलते जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने बीते 30 अगस्त को सुरईघाट पर हो रहे निर्माण को पूरी तरह से बंद कराकर जमीन परिर्वतन करने के निर्देश दिए। इसी क्रम में उन्होंने मौके पर मौजूद सदर उप जिलाधिकारी महेश प्रसाद दीक्षित को आवश्यक कार्रवाई करते हुए ग्राम घटवार में स्थित ग्राम सभा की जमीन को कान्हा आश्रय के निर्माण के लिए उपलब्ध कराने के लिए निर्देश दिए थे। जिलाधिकारी के इस निर्देश को लगभग तीन सप्ताह बीत गए हैं, लेकिन जमीन उपलब्ध तो दूर की बात जमीन की तलाश तक पूरी नहीं हो सकी है। वर्तमान में बरसात का मौसम चल रहा है, जमीन गीली होने व मैदानों में कीचड़ होने के कारण आवारा घूम रहे यह पशु सड़कों व मुख्य मार्ग को अपना ठिकाना बना रहे हैं।
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इससे यातायात तो बाधित हो ही रहा है, साथ ही सड़क दुर्घटनाओं की संभावना बनी रहती है। इसके अलावा जब यह पशु सड़कों व बाजार क्षेत्र में आपस में लड़ते हैं तो वाहन व अन्य सम्मति का नुकसान तो होता है साथ ही लोग भी घायल हो जाते हैं। यह समस्या वर्षों से चली आ रही है, जिला प्रशासन व नगर पालिका को इस समस्या के निस्तराण के लिए गंभीरता दिखाना बेहद जरूरी है।
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नगर पालिका कर रही मुफ्त की जमीन का इंतजार
नगर पालिका बीते डेढ़ वर्षों से कान्हा पशु आश्रय योजना के लिए न तो खुद ही जमीन तलाश पाई है और न ही अपने कोष से इसके लिए जमीन की खरीदी कर सकी है। नगर पालिका तो केवल जिला प्रशासन से मुफ्त की जमीन की मांग करने में लगी हुई है। इस योजना के शासनादेश में उल्लेख है कि यदि नगर पालिका के पास जमीन नहीं है या फिर वह जमीन उपलब्ध कराने में असमर्थ है, तो फिर जिला प्रशासन मुफ्त में जमीन उपलब्ध कराएगा। गौरतलब है कि नगर पालिका के साथ ही नगर पंचायत तालबेहट को भी शासन से कान्हा पशु आश्रय बनाने के लिए धनराशि उपलब्ध कराई थी। नगर पंचायत तालबेहट अध्यक्ष मुक्ता सोनी ने अपना कार्यकाल पूर्ण होने से पूर्व अपने बोर्ड फंड से तालबेहट नगर के समीप दो एकड़ जमीन की खरीद करके जनप्रतिनिधि होने की जिम्मेदारी पूरी निभाई थी। वर्तमान में तालबेहट में पशु आश्रय का निर्माण कार्य शुरु हो चुका है। तालबेहट में मात्र आठ लाख रुपए की दो एकड़ जमीन खरीदी गई है, नगर पालिका क्षेत्र में भी इतने सस्ते दामों पर भी जमीन उपलब्ध है, यदि नगर पालिका चाहे तो अपने बोर्ड फंड से जमीन की खरीदी कर सकती है।
जिलाधिकारी के निर्देशन पर ग्राम घटवार में स्थित ग्रामसभा की जमीन का निरीक्षण किया गया था, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए उचित मार्ग नहीं है। इस वजह से वह जमीन निरस्त हो गई है, वर्तमान में दैलवारा के पास एक जमीन है, जिसको परखा जा रहा है। जल्द ही कान्हा पशु आश्रय के लिए जमीन उपलब्ध करा दी जाएगी।
महेश प्रसाद दीक्षित
सदर उप जिलाधिकारी, ललितपुर।