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गांव- गांव में जवारों का किया विसर्जन
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कैप्सन - जवारे लेकर जाती महिलाए
- फोटो : TALDEHATE
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तालबेहट। मनोकामना पूरी होने एवं देवी मां को प्रसन्न करने के लिए नौ दिन पूर्व घरों में बोए जवारे नवरात्र के अंतिम दिन रविवार को परंपरागत तरीके से पवित्र जल में विसर्जित कर दिए गए। इस दौरान देवा माता मंदिर और मेहरावन माता मंदिर पर पूरे दिन श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
क्षेत्र में नवरात्र श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में मनोकामना पूरी होने और देवी मां को प्रसन्न रखने के लिए श्रद्धालु अपने घरों में जवारे बोते हैं। नवरात्र की नवमीं को हवन और पूजन करके उनका विसर्जन किया जाता है। इसी क्रम में रविवार को आसपास के गांवों के लोग विसर्जन के लिए जवारे लेकर मंगल गीत गाते हुए मानसरोवर तालाब पहुंचे। सिद्ध क्षेत्र देवा माता और मेहरावन माता मंदिर में दिन भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। आसपास के गांवों से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर अपने व्रत का समापन किया।
पुजारी रमेश प्रसाद अग्निहोत्री ने बताया दुर्गा सप्तशती के अध्याय 11 में वर्णित है कि जवारे देवी को प्रसन्न करने के लिए बोए जाते हैं। इससे घर में सुख का भंडार बना रहता है। वहीं, संतोष उपाध्याय ने बताया कि जौ इस सृष्टि की प्रथम फसल हैं। इनके बिना कोई धार्मिक अनुष्ठान नहीं पूरा होता है। इसलिए लोग इसे बोते हैं।
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बिजरौठा और भुचेरा संवाददाता के अनुसार उनके क्षेत्र में भी नवरात्र के विसर्जन के लिए जवारे निकाले गए। इस दौरान देवी मां के मंदिरों में रात में भजन और कीर्तन चलते रहे।
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क्षेत्र में नवरात्र श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में मनोकामना पूरी होने और देवी मां को प्रसन्न रखने के लिए श्रद्धालु अपने घरों में जवारे बोते हैं। नवरात्र की नवमीं को हवन और पूजन करके उनका विसर्जन किया जाता है। इसी क्रम में रविवार को आसपास के गांवों के लोग विसर्जन के लिए जवारे लेकर मंगल गीत गाते हुए मानसरोवर तालाब पहुंचे। सिद्ध क्षेत्र देवा माता और मेहरावन माता मंदिर में दिन भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। आसपास के गांवों से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर अपने व्रत का समापन किया।
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पुजारी रमेश प्रसाद अग्निहोत्री ने बताया दुर्गा सप्तशती के अध्याय 11 में वर्णित है कि जवारे देवी को प्रसन्न करने के लिए बोए जाते हैं। इससे घर में सुख का भंडार बना रहता है। वहीं, संतोष उपाध्याय ने बताया कि जौ इस सृष्टि की प्रथम फसल हैं। इनके बिना कोई धार्मिक अनुष्ठान नहीं पूरा होता है। इसलिए लोग इसे बोते हैं।
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बिजरौठा और भुचेरा संवाददाता के अनुसार उनके क्षेत्र में भी नवरात्र के विसर्जन के लिए जवारे निकाले गए। इस दौरान देवी मां के मंदिरों में रात में भजन और कीर्तन चलते रहे।

कैप्सन - माता के मंदिर पर जवारों का पूजन करते भक्त- फोटो : TALDEHATE