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भक्तों ने नौ दिन सेवा के बाद किए जवारे विसर्जन
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नम आंखो से भक्तों ने किया माता का विसर्जन
- फोटो : LALITPUR
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बानपुर/जखौरा। कस्बा बानपुर में नव दुर्गा पर्व के समापन पर जवारों का विसर्जन किया गया।
नवरात्र में लोग अपने घरों में जवारे रखकर नौ दिनों तक धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। पंचमी व अष्टमी पर आरती की जाती है। नवमी के दिन जवारों का विसर्जन किया जाता है। कस्बा बानपुर में शुक्रवार व शनिवार को भी जवारों का विसर्जन किया गया। विसर्जन के दौरान सबसे आगे माता रानी की प्रतिमा चल रही थी। इनके पीछे गायक ढोल नगड़िया के साथ भजन गायन कर चलते थे। इनके पीछे महिलाएं अपने सिर पर जवारों के घट लेकर चल रहीं थीं। गांव के सभी स्थानों से जवारे लेकर बानपुर बस स्टैंड के पास स्थित हरदौल के चबूतरे पहुंचे। जहां से पूजन अर्चन व परिक्रमा कर गांव के बड़ी देवीजी मंदिर जाकर माता को अर्पित किए गए।
पुरानी है मान्यता
गांव के लोग बताते हैं कि पुरानी मान्यता है कि लोग इन्हें आगामी फसलों की अच्छी पैदावार होने का सूचक भी मानते हैं। पं. बाबूलाल द्विवेदी बताते हैं कि मां दुर्गा ने नौ दिनों तक महिषासुर से युद्ध किया व दसवें दिन उस पर विजय प्राप्त की। इसी मान्यता में दुर्गा जी की कृपा प्राप्ति के लिए जवारों का अंकुरण किया जाता है। जिसमें जौं का रस आयु की वृद्धि के लिए व यह रस शरीर के सभी प्रकार के रोगों का नाश करने की क्षमता रखता है। उसी स्मृति में आज भी हमारे देश में श्रृद्धा एवं भक्ति भाव के साथ लोग मां दुर्गा की कृपा प्राप्ति के लिए जवारे रखते हैं और सभी के लिए प्रेम, सौहार्द और दीर्घायु की कामना कर जवारे दिए जाते हैं।
नम आंखों से भक्तों ने की माता रानी की विदाई
जखौरा। शनिवार के दिन देवी पंडालों से नवदुर्गा महोत्सव के बाद दशहरा के निद भक्तों ने पांडालों में हवन-पूजन के बाद आरती कर जयकारे लगाए और नम आंखों से माता रानी को विदाई दी। नवमी को माता की झांकियों को अंतिम रूप दिया गया। दसवीं के दिन माता के भक्तों ने सुबह से ही विधि-विधान के साथ पूजा अर्चना कर देवी पंडालों में माता की अंतिम आरती की इसके तत्पश्चात देवी मां की प्रतिमाओं की पूरे नगर में ढोल नगाड़ों व डीजे के साथ शोभायात्रा निकाली गई। शोभा यात्रा के दौरान नगर में देवी प्रतिमाओं का जगह-जगह पूजन किया गया और उनके साथ चल रहे भक्तगणों का स्वागत किया गया। नगर भ्रमण के बाद देवी मां की प्रतिमाओं का विसर्जन खैड़र नदी में किया गया। विसर्जन के दौरान जखौरा थाना प्रभारी आनंद पांडे समेत पुलिस बल मौजूद रहा।
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नवरात्र में लोग अपने घरों में जवारे रखकर नौ दिनों तक धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। पंचमी व अष्टमी पर आरती की जाती है। नवमी के दिन जवारों का विसर्जन किया जाता है। कस्बा बानपुर में शुक्रवार व शनिवार को भी जवारों का विसर्जन किया गया। विसर्जन के दौरान सबसे आगे माता रानी की प्रतिमा चल रही थी। इनके पीछे गायक ढोल नगड़िया के साथ भजन गायन कर चलते थे। इनके पीछे महिलाएं अपने सिर पर जवारों के घट लेकर चल रहीं थीं। गांव के सभी स्थानों से जवारे लेकर बानपुर बस स्टैंड के पास स्थित हरदौल के चबूतरे पहुंचे। जहां से पूजन अर्चन व परिक्रमा कर गांव के बड़ी देवीजी मंदिर जाकर माता को अर्पित किए गए।
पुरानी है मान्यता
गांव के लोग बताते हैं कि पुरानी मान्यता है कि लोग इन्हें आगामी फसलों की अच्छी पैदावार होने का सूचक भी मानते हैं। पं. बाबूलाल द्विवेदी बताते हैं कि मां दुर्गा ने नौ दिनों तक महिषासुर से युद्ध किया व दसवें दिन उस पर विजय प्राप्त की। इसी मान्यता में दुर्गा जी की कृपा प्राप्ति के लिए जवारों का अंकुरण किया जाता है। जिसमें जौं का रस आयु की वृद्धि के लिए व यह रस शरीर के सभी प्रकार के रोगों का नाश करने की क्षमता रखता है। उसी स्मृति में आज भी हमारे देश में श्रृद्धा एवं भक्ति भाव के साथ लोग मां दुर्गा की कृपा प्राप्ति के लिए जवारे रखते हैं और सभी के लिए प्रेम, सौहार्द और दीर्घायु की कामना कर जवारे दिए जाते हैं।
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नम आंखों से भक्तों ने की माता रानी की विदाई
जखौरा। शनिवार के दिन देवी पंडालों से नवदुर्गा महोत्सव के बाद दशहरा के निद भक्तों ने पांडालों में हवन-पूजन के बाद आरती कर जयकारे लगाए और नम आंखों से माता रानी को विदाई दी। नवमी को माता की झांकियों को अंतिम रूप दिया गया। दसवीं के दिन माता के भक्तों ने सुबह से ही विधि-विधान के साथ पूजा अर्चना कर देवी पंडालों में माता की अंतिम आरती की इसके तत्पश्चात देवी मां की प्रतिमाओं की पूरे नगर में ढोल नगाड़ों व डीजे के साथ शोभायात्रा निकाली गई। शोभा यात्रा के दौरान नगर में देवी प्रतिमाओं का जगह-जगह पूजन किया गया और उनके साथ चल रहे भक्तगणों का स्वागत किया गया। नगर भ्रमण के बाद देवी मां की प्रतिमाओं का विसर्जन खैड़र नदी में किया गया। विसर्जन के दौरान जखौरा थाना प्रभारी आनंद पांडे समेत पुलिस बल मौजूद रहा।

जवारों को विसर्जन को ले जाते श्रृधालू- फोटो : LALITPUR
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