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अड़तालीस साल पुराने जामनी बांध की सिल्ट सफाई का प्रस्ताव खारिज

Tue, 22 Jun 2021 01:13 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 22 Jun 2021 01:13 AM IST
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jamni bandh, silt removal praposal declined
dam.jpg - फोटो : dam.jpg
ोंगरा खुर्द (ललितपुर)। लगभग 48 साल पुराने जामनी बांध की सिल्ट सफाई का प्रस्ताव चीफ इंजीनियर कमेटी से खारिज कर दिया है। इससे स्थानीय विभागीय अफसरों को बड़ा झटका लगा है, साथ ही क्षेत्रवासी इस सूचना से निराश हो गए हैं। लोगों का मानना था कि यदि बांध की सिल्ट की सफाई हो जाती तो सिंचाई का रकवा बढ़ जाता है और पीने के पानी का भी इंतजाम हो जाता। वहीं, सिल्ट के कारण पानी कम होने से 23 गांवों के पांच हजार से अधिक किसानों को सिंचाई के लिए संकट खड़ा गया है। किसानों का कहना है कि दायीं और बायीं नहर में पानी नहीं आएगा तो किसानों को सिंचाई में दिक्कत आएगी।
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मड़ावरा ब्लॉक मुख्यालय से लगभग 10 किमी की दूरी पर जामनी बांध स्थित है। इसे बांध को लगभग 48 साल पहले बनाया गया था, उस दौरान इस बांध से सिंचाई के साथ पीने के पानी का भी इंतजाम होता था। इसका मुख्य कारण यह था कि जामनी बांध में जल भंडारण की क्षमता पिछले दो दशक पहले तक अच्छी थी। इसके पश्चात जामनी बांध में अधिक सिल्ट जमा होने लगी, जिससे पानी का भंडारण कम होने लगा। इस वर्ष बांध में जलस्तर बहुत कम हो गया है। इससे नहरों के परिचालन की समयावधि भी घट गई है। इन नहरों से 23 गांवों के पांच हजार से अधिक किसान अपनी फसलों की सिंचाई करते हैं।
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इस समय बांध का पानी कम होकर मुख्य गेट के आसपास आ गया है। इसके अलावा दूर-दूर बांध सूखा नजर आ रहा है। स्थानीय लोगों के लिए जामनी बांध में अधिक सिल्ट जमा होना चिंता का विषय बना हुआ है। किसानों का कहना है कि सिल्ट जमा होने से आने वाले दिनों में किसानों के लिए सिंचाई कार्य में मुश्किलें आएंगी। बांध के खाली होने पर बांध के भीतर की जमीन किसानों को पट्टे आवंटित कर दी जाती है, जिसमें किसान जुताई बुवाई करते हैं। इस कारण भी बांध में मिट्टी से सिल्ट जमा हो रही है जबकि बांध के दायरे से करीब सौ फीट दूर से जुताई बुवाई करना चाहिए लेकिन किसान किनारे से ही भूमि को कृषि उपयोग में ले रहे हैं। जामनी बांध से लगभग 11, 270 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती है। उधर, बांध के भीतर झाड़-झाखड़ उग आए हैं।
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चौरासी गांव में होती जलापूर्ति
करीब दो दशक से बांध से जलापूर्ति बंद है, इससे पहले चौरासी गांव के लिए जलापूर्ति होती थी। गांव-गांव में जलापूर्ति के लिए टंकी भी बनाई गई थी। ग्राम सतवांसा की टंकी शोपीस बनकर रह गई है।
बांध के सूखे क्षेत्र में सब्जी, खरबूजा, तरबूज, उड़द व मूंग उत्पादन का हो रहा है। इससे पट्टेधारक किसान खुश हैं। इन दिनों किसान इस उपज को बेचने में लगे हैं।
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जामनी बांध में सिल्ट निरंतर जमा हो रही है, जिससे बांध अब जल्दी भर जाता है और उतने ही जल्द खाली हो जाता है। बांध की सिल्ट उठाकर उसका गहरीकरण होना चाहिए।- भूपेंद्र सिंह।
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सिंचाई विभाग द्वारा गांव में पानी टंकी बनाई गई थी लेकिन करीब 15 साल से पानी आपूर्ति बंद पड़ी है। वर्तमान में हैंडपंप का पानी पी रहे हैं, जिससे तमाम प्रकार की बीमारियां लोगों को होने लगी हैं।-महेन्द्र पटैरिया।
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बांध के अंदर खेती पर रोक लगनी चाहिए। डूब क्षेत्र की जमीन में पांच साल के लिए सिंचाई विभाग द्वारा पट्टे आवंटित किए जाते हैं। अगर बांध के भीतर खेती न जाए तो इससे मिट्टी का बहाव नहीं होगा।- दीपक दुबे ।
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डूब क्षेत्र सीमा के अंदर बंधी का निर्माण किया जाए, इससे सिल्ट बाहर ही रह जाएगी। नदी नालों में चेकडैम बनाए जाए। जलस्तर कम होने से मात्र 70 दिन नहरें बड़ी मुश्किल से चल पाती हैं।- रामस्वरूप प्रजापति।

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बांध की सिल्ट सफाई का प्रस्ताव गया था, जिसे चीफ इंजीनियर कमेटी ने खारिज कर दिया है। इसकी एक वजह बांध काफी पुराना हो गया है। बांध के आसपास लगे झाड़-झाखड़ शीघ्र ही साफ करा दिए जाएंगे।
जितेंद्र, अवर अभियंता, सिंचाई खंड
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