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जल विहार पर भक्तिरस में सराबोर हुआ नगर
ब्यूराे/अमर उजाला
Updated Fri, 25 Sep 2015 01:38 AM IST
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ललितपुर। जल विहार की मंगल बेला पर श्रद्धा का सैलाब नगर की सड़कों पर
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उमड़ता दिखाई पड़ा। मंदिरों में तैयारियां तो सुबह से ही हो रही थीं, लेकिन
शाम का नजारा अलौकिक रहा। भगवान के रथ को अपने कंधों पर उठाकर नाचते व
झूमते भक्त प्रभु की भक्ति में सराबोर दिखे। सुम्मेरा तालाब के घाटों पर
साकोच्चार के बीच गंगा जल से भगवान का स्नान कराया गया। बाद में हुई
महाआरती का विहंगम दृश्य देखने को जनसैलाब उमड़ पड़ा।
जल विहार पर्व पर प्राचीन परंपराओं के अनुसार बृहस्पतिवार की शाम श्री रघुनाथ बड़ा मंदिर से देवों के विमानों का काफिला नगर भ्रमण को निकला, जिसमें बड़ा मंदिर के साथ बांके बिहारी मंदिर, तुवन मंदिर, श्रीराम राजा मंदिर, मदन मोहन मंदिर, धनुषधारी मंदिर, थानेश्वर मंदिर, चंडी माता मंदिर, सिंह वाहिनी मंदिर, पीतांबरा मंदिर सहित नगर स्थित सभी मंदिरों के विमानों की श्रृंखला शामिल थी। भगवान के स्वरूप का आकर्षक श्रृंगार किया गया तथा विमानों को भी सजाया गया। विमान यात्रा में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएं व बच्चे मंदिरों के बाहर एकत्रित हो गए थे। श्री रघुनाथ जी बड़ा मंदिर के दो विमान धर्मपताका के पीछे बैंडबाजे, घंटा घड़ियाल व शंखनाद के बीच जल विहार को निकल पड़े। श्री रघुनाथ जी बड़ा मंदिर के विमानों के पीछे बलखंडी मंदिर, शिवजी मंदिर के विमान शामिल हुए। रावर मुहल्ले के चौराहे से बांके बिहारी मंदिर सहित विभिन्न मंदिरों के विमान भी यात्रा में शामिल हुए।
यहां से यात्रा महावीरपुरा होते हुए मदन मोहन धर्मशाला के पास स्थित हनुमान मंदिर का विमान भी यात्रा शामिल हो गया। यहां श्रृद्घालुओं ने अपने घर की छतों से पुष्प वर्षा की। घंटाघर मंदिर पर थानेश्वर मंदिर, चंडी माता मंदिर सहित विभिन्न मंदिरों के विमान यात्रा में शामिल हो गए। कुछ ही दूरी पर जगदीश मंदिर का विमान भारी भक्तों के साथ यात्रा के साथ हो लिया। सावरकर चौक पर यात्रा में कई मंदिरों के विमान सम्मलित हुए। यहां से श्रद्धालुओं का रैला तालाबपुरा की ओर कूचकर गया।
सुम्मेरा तालाब पर विमानों के साथ चलने वाले मंदिर के पुजारियों ने साकोच्चार के बीच पूजा- अर्चना की। मंदिरों के देवों के स्नान के लिए गंगाजल की व्यवस्था की गई थी। सर्वप्रथम गंगाजल से भगवान शालिग राम का स्नान कराया गया, इसके बाद विमान में विराजमान भगवान का स्नान कराने के बाद उन्हें नवीन वस्त्र पहनाए गए। स्नान के पश्चात सालिगराम व भगवान की विधि-विधान के साथ पूजा अर्चना की गई। बाद में विमानों की महाआरती हुई।
इसके बाद विमान कटरा बाजार स्थित भगवान गणेश जी की झांकी के पास पहुंचे, यहां गणेश महोत्सव समिति के तत्वावधान में सभी विमानों का स्वागत किया गया।
शोभायात्रा में शामिल हुए इन मंदिरों के विमान
ललितपुर। भगवान के विमानों की शोभायात्रा में श्री रघुनाथ जी मंदिर, बलखंडी मंदिर, पंचमुखी हनुमान मंदिर, कंचनघाट मंदिर, गोविंद मंदिर, विजय राघव मंदिर, मुरलीधर मंदिर, शिव मंदिर, लक्ष्मी नारायण मंदिर, जुगल किशोर मंदिर, रघुनाथजी मंदिर, मंशा देवी मंदिर, मदन मोहन मंदिर, थानेश्वर मंदिर, रामलला मंदिर, संकट मोचन मंदिर, हनुमान गढ़ी मंदिर, बिहारी जी मंदिर, काली मंदिर, कुशकुटी मंदिर, सेतुबंध मंदिर, रामराजा मंदिर, जगदीश मंदिर, परमहंस मंदिर, धनुषधारी मंदिर, मार्कंडेय मंदिर, नृसिंह मंदिर, तख्तधार मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, छोटी देवी मंदिर, बाल रूप हनुमान मंदिर, हवलदार मंदिर, सर्वेश्वरधाम मंदिर, गणेश मंदिर, श्री तुवन सरकार मंदिर, रिसाला मंदिर, रामजानकी मंदिर, राधा कृष्ण मंदिर, चंडी माता मंदिर, सिंह वाहिनी माता मंदिर, राधा कृष्ण मंदिर, रामजानकी मंदिर, हनुमानधारा मंदिर, जुगपुरा देवी मंदिर, सिद्धन मंदिर, पीतांबरा मंदिर, शिव मंदिर और सिवनी मंदिर शमिल हुए।
जल विहार पर्व पर प्राचीन परंपराओं के अनुसार बृहस्पतिवार की शाम श्री रघुनाथ बड़ा मंदिर से देवों के विमानों का काफिला नगर भ्रमण को निकला, जिसमें बड़ा मंदिर के साथ बांके बिहारी मंदिर, तुवन मंदिर, श्रीराम राजा मंदिर, मदन मोहन मंदिर, धनुषधारी मंदिर, थानेश्वर मंदिर, चंडी माता मंदिर, सिंह वाहिनी मंदिर, पीतांबरा मंदिर सहित नगर स्थित सभी मंदिरों के विमानों की श्रृंखला शामिल थी। भगवान के स्वरूप का आकर्षक श्रृंगार किया गया तथा विमानों को भी सजाया गया। विमान यात्रा में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएं व बच्चे मंदिरों के बाहर एकत्रित हो गए थे। श्री रघुनाथ जी बड़ा मंदिर के दो विमान धर्मपताका के पीछे बैंडबाजे, घंटा घड़ियाल व शंखनाद के बीच जल विहार को निकल पड़े। श्री रघुनाथ जी बड़ा मंदिर के विमानों के पीछे बलखंडी मंदिर, शिवजी मंदिर के विमान शामिल हुए। रावर मुहल्ले के चौराहे से बांके बिहारी मंदिर सहित विभिन्न मंदिरों के विमान भी यात्रा में शामिल हुए।
यहां से यात्रा महावीरपुरा होते हुए मदन मोहन धर्मशाला के पास स्थित हनुमान मंदिर का विमान भी यात्रा शामिल हो गया। यहां श्रृद्घालुओं ने अपने घर की छतों से पुष्प वर्षा की। घंटाघर मंदिर पर थानेश्वर मंदिर, चंडी माता मंदिर सहित विभिन्न मंदिरों के विमान यात्रा में शामिल हो गए। कुछ ही दूरी पर जगदीश मंदिर का विमान भारी भक्तों के साथ यात्रा के साथ हो लिया। सावरकर चौक पर यात्रा में कई मंदिरों के विमान सम्मलित हुए। यहां से श्रद्धालुओं का रैला तालाबपुरा की ओर कूचकर गया।
सुम्मेरा तालाब पर विमानों के साथ चलने वाले मंदिर के पुजारियों ने साकोच्चार के बीच पूजा- अर्चना की। मंदिरों के देवों के स्नान के लिए गंगाजल की व्यवस्था की गई थी। सर्वप्रथम गंगाजल से भगवान शालिग राम का स्नान कराया गया, इसके बाद विमान में विराजमान भगवान का स्नान कराने के बाद उन्हें नवीन वस्त्र पहनाए गए। स्नान के पश्चात सालिगराम व भगवान की विधि-विधान के साथ पूजा अर्चना की गई। बाद में विमानों की महाआरती हुई।
इसके बाद विमान कटरा बाजार स्थित भगवान गणेश जी की झांकी के पास पहुंचे, यहां गणेश महोत्सव समिति के तत्वावधान में सभी विमानों का स्वागत किया गया।
शोभायात्रा में शामिल हुए इन मंदिरों के विमान
ललितपुर। भगवान के विमानों की शोभायात्रा में श्री रघुनाथ जी मंदिर, बलखंडी मंदिर, पंचमुखी हनुमान मंदिर, कंचनघाट मंदिर, गोविंद मंदिर, विजय राघव मंदिर, मुरलीधर मंदिर, शिव मंदिर, लक्ष्मी नारायण मंदिर, जुगल किशोर मंदिर, रघुनाथजी मंदिर, मंशा देवी मंदिर, मदन मोहन मंदिर, थानेश्वर मंदिर, रामलला मंदिर, संकट मोचन मंदिर, हनुमान गढ़ी मंदिर, बिहारी जी मंदिर, काली मंदिर, कुशकुटी मंदिर, सेतुबंध मंदिर, रामराजा मंदिर, जगदीश मंदिर, परमहंस मंदिर, धनुषधारी मंदिर, मार्कंडेय मंदिर, नृसिंह मंदिर, तख्तधार मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, छोटी देवी मंदिर, बाल रूप हनुमान मंदिर, हवलदार मंदिर, सर्वेश्वरधाम मंदिर, गणेश मंदिर, श्री तुवन सरकार मंदिर, रिसाला मंदिर, रामजानकी मंदिर, राधा कृष्ण मंदिर, चंडी माता मंदिर, सिंह वाहिनी माता मंदिर, राधा कृष्ण मंदिर, रामजानकी मंदिर, हनुमानधारा मंदिर, जुगपुरा देवी मंदिर, सिद्धन मंदिर, पीतांबरा मंदिर, शिव मंदिर और सिवनी मंदिर शमिल हुए।