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नहीं दी जा रहीं जनसूचनाएं
lalitpur
Updated Tue, 23 May 2017 01:57 AM IST
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प्रशासन
- फोटो : demo pic
विकासखंड मड़ावरा की ग्राम पंचायत धवा में विकास कार्यों के संबंध में जन सूचना अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है, इससे कार्यों में पैसों के घालमेल की संभावनाएं जताई जा रही है।
धवा ग्राम के निवासी और जनसूचना एक्टिविस्ट खूबचंद सेन द्वारा ग्राम पंचायत में संचालित सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार की पोल खोलने के लिए जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत सूचनाएं मांगी गई, लेकिन उन्हें नाहक ही परेशान किया जा रहा है। खूबचंद सेन ने आरोप लगाया कि गांव में मनरेगा योजना में मिलीभगत कर सरकारी धन का खूब बंदरबांट किया गया है। मनरेगा से कराए विकास कार्यों में दूसरी ग्राम पंचायत के जॉबकार्ड धारकों द्वारा मजदूरी दर्शाकर सरकारी धन का गबन किया गया है। वहीं, प्रधान प्रतिनिधि द्वारा अपने पुत्र समेत अन्य परिजनों के नाम से भी मजदूरी के नाम पर सरकारी धन में घालमेल किया गया है।
गौरतलब है कि विकासखंड मड़ावरा की ग्राम पंचायत गाहे-बगाहे चर्चाओं में बनी रहती है, वैसे तो यहां प्रधान पद अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित है, जिसके सापेक्ष शीला रजक निर्वाचित ग्राम प्रधान हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले छह वर्षों से गांव के एक प्रभावशाली व्यक्ति द्वारा ग्रामप्रधान को अपने दबाव में रखकर अपने मन मुताबिक प्रधानी चलाई जा रही है। इस बात को खुद ग्रामप्रधान शीला बताती हैं कि प्रधानी का पूरा काम ‘भाई साहब’ द्वारा देखा जाता है, वह तो सिर्फ उनके कहने पर कागजों पर हस्ताक्षर मात्र करती हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि स्वयंभू प्रधान प्रतिनिधि द्वारा अपनी जाति-विशेष को लाभ पहुंचाने के लिए अन्य ग्रामीणों के साथ द्वेषभाव और भेदभाव किया जाता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि उनकी ग्राम पंचायत को सामंत शाही प्रथा से मुक्ति दिलाई जाए, साथ ही संचालित विभिन्न जनहितैषी योजनाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार की जांचकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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हाई-प्रोफाइल हो चुके लोहिया ग्राम धवा में आवास निर्माण भ्रष्टाचार के मामले में राज्यमंत्री मनोहरलाल पंथ ने मामले का संज्ञान लेते हुए कहा कि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मामले की उच्चस्तरीय जांच करवाकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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धवा ग्राम के निवासी और जनसूचना एक्टिविस्ट खूबचंद सेन द्वारा ग्राम पंचायत में संचालित सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार की पोल खोलने के लिए जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत सूचनाएं मांगी गई, लेकिन उन्हें नाहक ही परेशान किया जा रहा है। खूबचंद सेन ने आरोप लगाया कि गांव में मनरेगा योजना में मिलीभगत कर सरकारी धन का खूब बंदरबांट किया गया है। मनरेगा से कराए विकास कार्यों में दूसरी ग्राम पंचायत के जॉबकार्ड धारकों द्वारा मजदूरी दर्शाकर सरकारी धन का गबन किया गया है। वहीं, प्रधान प्रतिनिधि द्वारा अपने पुत्र समेत अन्य परिजनों के नाम से भी मजदूरी के नाम पर सरकारी धन में घालमेल किया गया है।
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गौरतलब है कि विकासखंड मड़ावरा की ग्राम पंचायत गाहे-बगाहे चर्चाओं में बनी रहती है, वैसे तो यहां प्रधान पद अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित है, जिसके सापेक्ष शीला रजक निर्वाचित ग्राम प्रधान हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले छह वर्षों से गांव के एक प्रभावशाली व्यक्ति द्वारा ग्रामप्रधान को अपने दबाव में रखकर अपने मन मुताबिक प्रधानी चलाई जा रही है। इस बात को खुद ग्रामप्रधान शीला बताती हैं कि प्रधानी का पूरा काम ‘भाई साहब’ द्वारा देखा जाता है, वह तो सिर्फ उनके कहने पर कागजों पर हस्ताक्षर मात्र करती हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि स्वयंभू प्रधान प्रतिनिधि द्वारा अपनी जाति-विशेष को लाभ पहुंचाने के लिए अन्य ग्रामीणों के साथ द्वेषभाव और भेदभाव किया जाता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि उनकी ग्राम पंचायत को सामंत शाही प्रथा से मुक्ति दिलाई जाए, साथ ही संचालित विभिन्न जनहितैषी योजनाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार की जांचकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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हाई-प्रोफाइल हो चुके लोहिया ग्राम धवा में आवास निर्माण भ्रष्टाचार के मामले में राज्यमंत्री मनोहरलाल पंथ ने मामले का संज्ञान लेते हुए कहा कि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मामले की उच्चस्तरीय जांच करवाकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।