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उम्र के अंतिम पड़ाव में दो वक्त की रोटी के लाले
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ग्राम पचौड़ा में भूखे बैठे बुजुर्ग
- फोटो : LALITPUR
सिलावन। तहसील मुख्यालय महरौनी से तीन किलोमीटर दूर ग्राम पचौड़ा में परिवार और सरकार दोनों की उपेक्षा का शिकार वृद्ध दंपति दो वक्त की रोटी के लिए मोहताज है। गांव में किसी ने खाने को दे दिया तो ठीक, नहीं तो रात को खाली पेट सो जाना इनकी नियति बन गई है। बिडंबना यह है कि प्रशासन की तरफ से कोई सहायता नहीं मिल रही है। दंपति का एक बेटा है, लेकिन वह भी मुंह मोड़ कर चला गया है।
ग्राम पचौड़ा की नाथ बस्ती में रहने वाले उज्जन नाथ (83) और पत्नी मंजली बहू (80) की दुखभरी कहानी सुनकर किसी की भी आंखों में आंसू आए बिना नहीं रह सकते हैं। उम्र के इस पड़ाव में उनमें मजदूरी करने की सामर्थ नहीं बची है। आमदनी का कोई दूसरा साधन है नहीं, इस कारण दोनों पति-पत्नी गांव के लोगों के रहमोकरम पर जिंदगी जीने को मजबूर हैं। धूप और बारिश से बचने के लिए उनके पास छत नहीं है। टूटे- फूटे कच्चे मकान में अपना जीवन यापन करने को मजबूर हैं। झोपड़ी देखने पर पता चलता है, उसमें खाने का कोई सामान तक नहीं है। यहां तक कि आटा भी नहीं है। समय पर भरपेट खाना नहीं मिलने की वजह से मंजली बहू की हालत नाजुक हो गई है। वह उठने- बैठने लायक नहीं है।
वृद्ध का कहना है कि मजदूरी करने के लिए अब शरीर काम नही करता है। किसी ने कुछ खाने को दे दिया तो ठीक, नहीं तो भूखे पेट ही दोनों सो जाते हैं। एक लडक़ा है, लेकिन छोड़क़र चला गया। सरकारी योजनाओं के बारे में बताया कि उनका राशनकार्ड नहीं बना, न आवास और न वृद्धापेंशन का कोई लाभ मिल रहा है। बिडंबना यह है कि भूख से जूझ रहे वृद्ध दंपती की ओर न तो सरकार के किसी अफसर का ध्यान जा रहा है, और न ही समाजसेवियों का।
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सरकार के दावों से इतर है सच्चाई
केंद्र और प्रदेश की सरकारें रोज विकास के दावे कर रही हैं। कोई गरीबों के लिए मुफ्त अनाज के दावे कर रहा तो कोई मुफ्त शिक्षा और इलाज की बात करता है। लेकिन, सच्चाई यह है कि इसके लिए जो पात्र हैं, उन्हें कुछ नहीं मिल पा रहा है।
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उज्जन नाथ और मंजली बहू दोनों दूसरे के सहारे गुजर- बसर कर रहे हैं। उनकी हालत काफी खराब है। उन्हें चार वर्ष पूर्व वृद्धा पेंशन मिलती थी, जो अब नहीं मिल रही हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का प्रयास कर रहे हैं।
- बल्देव पाल, ग्राम प्रधान पचौंड़ा
दोनों की यही स्थिति है। आसपास के लोग उन्हें खाना देते हैं। जिस दिन कोई नहीं देता है, तो वह भूखे ही सो जाते हैं। उनकी ओर न तो किसी का ध्यान है और न ही समाजसेवियों का।
- अवधेश
वृद्ध पति-पत्नी असहाय हो गए हैं। भुखमरी की कगार पर हैं, उन्हें सरकारी मदद की आवश्यकता है। लेकिन, उनकी ओर किसी का ध्यान नहीं है।
- बहादुर
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उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। यदि ऐसा है तो तुरंत उन्हें मदद दी जाएगी।
- आलोक वर्मा, ग्राम विकास अधिकारी
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ग्राम पचौड़ा की नाथ बस्ती में रहने वाले उज्जन नाथ (83) और पत्नी मंजली बहू (80) की दुखभरी कहानी सुनकर किसी की भी आंखों में आंसू आए बिना नहीं रह सकते हैं। उम्र के इस पड़ाव में उनमें मजदूरी करने की सामर्थ नहीं बची है। आमदनी का कोई दूसरा साधन है नहीं, इस कारण दोनों पति-पत्नी गांव के लोगों के रहमोकरम पर जिंदगी जीने को मजबूर हैं। धूप और बारिश से बचने के लिए उनके पास छत नहीं है। टूटे- फूटे कच्चे मकान में अपना जीवन यापन करने को मजबूर हैं। झोपड़ी देखने पर पता चलता है, उसमें खाने का कोई सामान तक नहीं है। यहां तक कि आटा भी नहीं है। समय पर भरपेट खाना नहीं मिलने की वजह से मंजली बहू की हालत नाजुक हो गई है। वह उठने- बैठने लायक नहीं है।
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वृद्ध का कहना है कि मजदूरी करने के लिए अब शरीर काम नही करता है। किसी ने कुछ खाने को दे दिया तो ठीक, नहीं तो भूखे पेट ही दोनों सो जाते हैं। एक लडक़ा है, लेकिन छोड़क़र चला गया। सरकारी योजनाओं के बारे में बताया कि उनका राशनकार्ड नहीं बना, न आवास और न वृद्धापेंशन का कोई लाभ मिल रहा है। बिडंबना यह है कि भूख से जूझ रहे वृद्ध दंपती की ओर न तो सरकार के किसी अफसर का ध्यान जा रहा है, और न ही समाजसेवियों का।
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सरकार के दावों से इतर है सच्चाई
केंद्र और प्रदेश की सरकारें रोज विकास के दावे कर रही हैं। कोई गरीबों के लिए मुफ्त अनाज के दावे कर रहा तो कोई मुफ्त शिक्षा और इलाज की बात करता है। लेकिन, सच्चाई यह है कि इसके लिए जो पात्र हैं, उन्हें कुछ नहीं मिल पा रहा है।
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उज्जन नाथ और मंजली बहू दोनों दूसरे के सहारे गुजर- बसर कर रहे हैं। उनकी हालत काफी खराब है। उन्हें चार वर्ष पूर्व वृद्धा पेंशन मिलती थी, जो अब नहीं मिल रही हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का प्रयास कर रहे हैं।
- बल्देव पाल, ग्राम प्रधान पचौंड़ा
दोनों की यही स्थिति है। आसपास के लोग उन्हें खाना देते हैं। जिस दिन कोई नहीं देता है, तो वह भूखे ही सो जाते हैं। उनकी ओर न तो किसी का ध्यान है और न ही समाजसेवियों का।
- अवधेश
वृद्ध पति-पत्नी असहाय हो गए हैं। भुखमरी की कगार पर हैं, उन्हें सरकारी मदद की आवश्यकता है। लेकिन, उनकी ओर किसी का ध्यान नहीं है।
- बहादुर
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उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। यदि ऐसा है तो तुरंत उन्हें मदद दी जाएगी।
- आलोक वर्मा, ग्राम विकास अधिकारी

ग्राम पचौड़ा में भूखी पड़ी वृद्व महिला- फोटो : LALITPUR