{"_id":"587bcc9a4f1c1b3503efe8bd","slug":"if-not-now-then-never-act-on-illegal-billboards","type":"story","status":"publish","title_hn":"अवैध होर्डिंग पर कार्रवाई अब नहीं तो फिर कभी नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अवैध होर्डिंग पर कार्रवाई अब नहीं तो फिर कभी नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 16 Jan 2017 12:55 AM IST
विज्ञापन
code of conduct news lalitpur
- फोटो : amar ujala, lalitpur news
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आचार संहिता ने नगर पालिका को शहर को अवैध होर्डिंगों से मुक्त कराने का मौका दिया है। शहर में लगे तमाम होर्डिंग प्रशासन द्वारा निकाल दिए गए हैं, अब केवल होर्डिंग के स्ट्रैक्चर ही खड़े हुए हैं। ऐसे में नगर पालिका चाहे तो शहर में बिना विभागीय अनुमति के लगे होर्डिंग स्ट्रैक्चरों को जब्त करके शहर को अवैध होर्डिंग मुक्त बना सकती है और ऐसा करने के दौरान विभाग को किसी का विरोध भी नहीं झेलना पड़ेगा।
शहर में विज्ञापन होर्डिंग लगाने के लिए नगर पालिका ने डेढ़ सौ से भी कम स्थलों पर अनुमति दी हुई है। लेकिन पूरा शहर अवैध होर्डिंगों से पटा रहता है। शहर के हर प्रमुख मार्गों के किनारे, समस्त चौराहों व सार्वजनिक स्थलों पर होर्डिंग लगे रहते हैं। शहर का करीब आठ किलो मीटर का मुख्य मार्ग नेहरू महाविद्यालय से मवेशी बाजार, आजादचौक, वीरसावकर चौक, घंटाघर होते हुए पुरानी सदर तहसील चौराहा, नझाई बाजार, सुपर मार्केट, कंपनी बाग, तुवन चौराहा से वर्णीजैन चौराहा होते हुए रेलवे स्टेशन व नेहरू नगर तक और वहीं घंटाघर से सदरकांटा तिराहा, जेल चौराहा, ब्याना नाला के पास, इलाईट चौराहा, गल्ला मंडी तक पूरा मार्ग अवैध होर्डिंगों से पटा पड़ा है। इन मार्गों पर लगभग तीन हजार से अधिक होर्डिंग के स्ट्रक्टर खड़े हुए हैं, कुछ लोहे के स्थायी स्ट्रक्टर हैं तो कुछ लकड़ी के बांस व बल्लियों के सहारे खड़े हुए हैं। यह मार्ग लोक निर्माण विभाग का है, ना तो नगर पालिका ने इन मार्गों पर होर्डिंग लगवाने के लिए लोक निर्माण विभाग से अनुमति ली है और न ही यातायात पुलिस से अनुमति ली है। इसके अलावा नगर पालिका ने भी इन होर्डिंगों को लगाने की अनुमति विज्ञापन एजेंसियों को लिखित रूप से दी है। इन अवैध होर्डिंगों से शहर की सुंदरता को खराब होती ही है साथ ही इनकी आड़ में अतिक्रमण को भी बढ़ावा मिलता है। नगर पालिका हमेशा ही इन अवैध होर्डिंगों के खिलाफ कार्रवाई करने से कतराती रही है, कार्रवाई के नाम पर केवल विज्ञापन एजेंसियों को एक नोटिस थमाकर अपना पल्ला झाड़ लिया जाता है। अवैध होर्डिंगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के केवल दो ही कारण होते हैं, या तो इन अवैध होर्डिंगों से विभाग के अधिकारियों व संबंधित पटल लिपिक का आर्थिक लाभ होता है, या फिर बिना अनुमति वाले स्थलों पर सबसे अधिक संख्या में अवैध होर्डिंग राजनैतिक व सत्ताधारी पार्टियों के जनता को बधाई संबंधित होर्डिंग होते हैं इन्हें हटाने पर होने वाले विवाद से बचने के लिए नगर पालिका इन अवैध होर्डिंगों के खिलाफ कार्रवाई करने से कतराती है। लेकिन वर्तमान में जो स्थिति है वह नगर पालिका के पक्ष में है। आगामी विधानसभा चुनाव के चलते चुनाव आयोग ने विगत चार जनवरी से प्रदेश में आदर्श आचार संहिता लागू कर दी है। आचार संहिता लागू होते हैं जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन ने शहर में लगे समस्त होर्डिंगों को हटा दिया है। अब यदि नगर पालिका चाहे तो शहर में बिना अनुमति के लगे होर्डिंग स्ट्रक्चरों को हटा सकती है। इस दौरान विभाग को किसी राजनीतिक पार्टी या नेताओं का दबाव झेेलना पड़ेगा और न ही विज्ञापन एजेंसियां कोई विवाद खड़ा कर सकेगीं। लेकिन यदि नगर पालिका इन अवैध होर्डिंगों से वसूली कर चुकी होगी तो फिर विज्ञापन एजेंसियों से विवाद की स्थिति बन सकती है।
बेदाग हो सकेगा ठेका
विधानसभा चुनाव की मतगणना की घोषणा वर्तमान में निर्धारित तिथि के अनुसार 11 मार्च तक हो जाएगी। इसके बाद मार्ग माह के अंत तक आचार संहिता भी हटा दी जाएगी। यदि नगर पालिका वर्तमान में अवैध होर्डिंगों के स्ट्रक्चरों पर कार्रवाई करके हटा देती है तो नवीन वित्तीय वर्ष 2017-18 का विज्ञापन होर्डिंग शुल्क वसूली का ठेका बेदाग हो सकेगा। ठेका होने के यदि दोबारा शहर में अवैध होर्डिंग्स की भरमार होती है, तो इसके पीछे विभाग ठेकेदार को आरोपी ठहराने का हकदाई होगा। पूर्व में ऐसा होता आया है कि जब शहर में अवैध होर्डिंग्स की बात होती है तो विभाग ठेकेदार को आरोपी ठहराता है और ठेकेदार विभाग को, इसी वजह से कार्रवाई भी नहीं की जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन एजेंसियों को पूर्व में नोटिस जारी किए जा चुके हैं कि वह स्वयं ही बिना विभागीय अनुमति के लगे होर्डिंग स्ट्रक्चरों को हटा लें, लेकिन उनके द्वारा हटाए नहीं गए हैं। आचार संहिता लागू होने से कुछ दिन पूर्व में विभाग ने कुछ होर्डिंग्स को जब्त किया था। अब बहुत जल्द ही अभियान चलाकर बिना अनुमति के लगे स्ट्रस्चरों को जब्त किया जाएगा।
राकेश कुमार
अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका ललितपुर।
विज्ञापन
शहर में विज्ञापन होर्डिंग लगाने के लिए नगर पालिका ने डेढ़ सौ से भी कम स्थलों पर अनुमति दी हुई है। लेकिन पूरा शहर अवैध होर्डिंगों से पटा रहता है। शहर के हर प्रमुख मार्गों के किनारे, समस्त चौराहों व सार्वजनिक स्थलों पर होर्डिंग लगे रहते हैं। शहर का करीब आठ किलो मीटर का मुख्य मार्ग नेहरू महाविद्यालय से मवेशी बाजार, आजादचौक, वीरसावकर चौक, घंटाघर होते हुए पुरानी सदर तहसील चौराहा, नझाई बाजार, सुपर मार्केट, कंपनी बाग, तुवन चौराहा से वर्णीजैन चौराहा होते हुए रेलवे स्टेशन व नेहरू नगर तक और वहीं घंटाघर से सदरकांटा तिराहा, जेल चौराहा, ब्याना नाला के पास, इलाईट चौराहा, गल्ला मंडी तक पूरा मार्ग अवैध होर्डिंगों से पटा पड़ा है। इन मार्गों पर लगभग तीन हजार से अधिक होर्डिंग के स्ट्रक्टर खड़े हुए हैं, कुछ लोहे के स्थायी स्ट्रक्टर हैं तो कुछ लकड़ी के बांस व बल्लियों के सहारे खड़े हुए हैं। यह मार्ग लोक निर्माण विभाग का है, ना तो नगर पालिका ने इन मार्गों पर होर्डिंग लगवाने के लिए लोक निर्माण विभाग से अनुमति ली है और न ही यातायात पुलिस से अनुमति ली है। इसके अलावा नगर पालिका ने भी इन होर्डिंगों को लगाने की अनुमति विज्ञापन एजेंसियों को लिखित रूप से दी है। इन अवैध होर्डिंगों से शहर की सुंदरता को खराब होती ही है साथ ही इनकी आड़ में अतिक्रमण को भी बढ़ावा मिलता है। नगर पालिका हमेशा ही इन अवैध होर्डिंगों के खिलाफ कार्रवाई करने से कतराती रही है, कार्रवाई के नाम पर केवल विज्ञापन एजेंसियों को एक नोटिस थमाकर अपना पल्ला झाड़ लिया जाता है। अवैध होर्डिंगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के केवल दो ही कारण होते हैं, या तो इन अवैध होर्डिंगों से विभाग के अधिकारियों व संबंधित पटल लिपिक का आर्थिक लाभ होता है, या फिर बिना अनुमति वाले स्थलों पर सबसे अधिक संख्या में अवैध होर्डिंग राजनैतिक व सत्ताधारी पार्टियों के जनता को बधाई संबंधित होर्डिंग होते हैं इन्हें हटाने पर होने वाले विवाद से बचने के लिए नगर पालिका इन अवैध होर्डिंगों के खिलाफ कार्रवाई करने से कतराती है। लेकिन वर्तमान में जो स्थिति है वह नगर पालिका के पक्ष में है। आगामी विधानसभा चुनाव के चलते चुनाव आयोग ने विगत चार जनवरी से प्रदेश में आदर्श आचार संहिता लागू कर दी है। आचार संहिता लागू होते हैं जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन ने शहर में लगे समस्त होर्डिंगों को हटा दिया है। अब यदि नगर पालिका चाहे तो शहर में बिना अनुमति के लगे होर्डिंग स्ट्रक्चरों को हटा सकती है। इस दौरान विभाग को किसी राजनीतिक पार्टी या नेताओं का दबाव झेेलना पड़ेगा और न ही विज्ञापन एजेंसियां कोई विवाद खड़ा कर सकेगीं। लेकिन यदि नगर पालिका इन अवैध होर्डिंगों से वसूली कर चुकी होगी तो फिर विज्ञापन एजेंसियों से विवाद की स्थिति बन सकती है।
विज्ञापन
बेदाग हो सकेगा ठेका
विधानसभा चुनाव की मतगणना की घोषणा वर्तमान में निर्धारित तिथि के अनुसार 11 मार्च तक हो जाएगी। इसके बाद मार्ग माह के अंत तक आचार संहिता भी हटा दी जाएगी। यदि नगर पालिका वर्तमान में अवैध होर्डिंगों के स्ट्रक्चरों पर कार्रवाई करके हटा देती है तो नवीन वित्तीय वर्ष 2017-18 का विज्ञापन होर्डिंग शुल्क वसूली का ठेका बेदाग हो सकेगा। ठेका होने के यदि दोबारा शहर में अवैध होर्डिंग्स की भरमार होती है, तो इसके पीछे विभाग ठेकेदार को आरोपी ठहराने का हकदाई होगा। पूर्व में ऐसा होता आया है कि जब शहर में अवैध होर्डिंग्स की बात होती है तो विभाग ठेकेदार को आरोपी ठहराता है और ठेकेदार विभाग को, इसी वजह से कार्रवाई भी नहीं की जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन एजेंसियों को पूर्व में नोटिस जारी किए जा चुके हैं कि वह स्वयं ही बिना विभागीय अनुमति के लगे होर्डिंग स्ट्रक्चरों को हटा लें, लेकिन उनके द्वारा हटाए नहीं गए हैं। आचार संहिता लागू होने से कुछ दिन पूर्व में विभाग ने कुछ होर्डिंग्स को जब्त किया था। अब बहुत जल्द ही अभियान चलाकर बिना अनुमति के लगे स्ट्रस्चरों को जब्त किया जाएगा।
राकेश कुमार
अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका ललितपुर।