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तमन्ना शिक्षक बनने की थी पर बन गए आईएएस

Sun, 11 Feb 2018 01:29 AM IST
Jhansi
Jhansi Updated Sun, 11 Feb 2018 01:29 AM IST
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Op rawat - फोटो : demo
बिपिन बिहारी महाविद्यालय पुरातन छात्र संगठन द बीबीसियन्स के 26वें वार्षिक मिलनोत्सव में मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने कहा कि वह शिक्षक बनना चाहते थे, लेकिन दो बार इंटरव्यू में फेल हो गए और उनकी तमन्ना पूरी नहीं हो सकी। जिनके उनसे कम नंबर आए, उनका चयन हो गया। इससे वह हताश हो गए। तब तत्कालीन प्राचार्य प्रणवीर सिंह ने उनका हौसला बढ़ाया, कुछ किताबें दी और उन्हें सिविल सर्विसेज की तैयारी करने को कहा। जमकर पढ़ाई की। उनका पहले आईएफएस और फिर आईएएस में चयन हुआ।
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बीबीसी में आयोजित कार्यक्रम में रावत ने कहा कि जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। छात्रों से आह्वान किया कि खुद पर फोकस करने, लगन, परिश्रम और तोल-मोलकर काम करें, तो सफलता जरूर मिलेगी। सोशल नेटवर्किंग साइट्स का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी चीज का लत मार्ग से भटका सकती है। पुरानी यादों का जिक्र करते हुए कहा कि जब वह पढ़ाई कर रहे थे, तब काफी गरीबी थी। बीबीसी में स्नातक में प्रवेश लेने जब हाफ पैंट पहनकर आए तो तत्कालीन प्राचार्य ने लाइन में खड़ा कर दिया। कहा कि यहां छात्र-छात्राएं दोनों पढ़ते हैं। अगले दिन सभी फुल पैंट में स्कूल आए। जब उनका चयन भारतीय वन सेवा में हो गया था, तब उनको देखकर कहा गया था कि यदि 50 किलो वजन नहीं होगा तो अनफिट हो जाओगे। इसके बाद उन्होंने दूध-केला खाकर अपना वजन बढ़ाया।
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 बीबीसी प्राचार्य डॉ. एमएम पांडेय ने कहा कि ओपी रावत ने झांसी का नाम पूरे देश में रोशन किया है। राजनीति पर नियंत्रण के लिए ही चुनाव आयोग का गठन हुआ। इस दौरान डीएम शिवसहाय अवस्थी, एसएसपी जेके शुक्ला, कुलसचिव सीपी तिवारी, कार्यकारी अध्यक्ष बीबीसियन्स आईपी भल्ला, राहुल रिछारिया, शिक्षक टीके शर्मा, विजय यादव, आरएल गौड़, एमपी गुप्ता, रेलवे की एसीएम सीमा तिवारी, मुकेश मिश्रा, आशुतोष शर्मा, अय्यूब अंसारी आदि मौजूद रहे।
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डीएवी से घबराकर वापस आ गए
ओपी रावत ने बताया तब झांसी के किसी भी कॉलेज में भौतिक विज्ञान की पढ़ाई नहीं होती थी। प्राचार्य ने डीएवी कॉलेज कानपुर, लखनऊ विश्वविद्यालय और बीएचयू में उनका फॉर्म भरवा दिया था। डीएवी में प्रवेश मिल गया, लेकिन वहां का माहौल देखकर घबरा गए तो वापस आ गए। इसके बाद बीएचयू में प्रवेश लिया। वहां उन्होंने प्रथम सेमेस्टर में 240 में 210 नंबर लाकर टॉप किया।
 
टीएन सेशन ने बदल दी आयोग की तस्वीर
ओपी रावत ने कहा कि जब टीएन सेशन ने चुनाव आयोग की कमान संभाली तो आयोग की तस्वीर बदल गई। गुजरात के राज्यसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि आठ अगस्त 2017 को दो वोटों को लेकर हुए विवाद के कारण मतगणना रुक गई थी। सत्ता और विपक्ष के लोग चुनाव आयुक्त से दो बार मिले। एक पक्ष के सात केंद्रीय मंत्री बैलेट को अवैध न करने की मांग कर रहे थे। जबकि, दूसरे पक्ष के आठ पूर्व केंद्रीय मंत्री अवैध करने की मांग कर रहे थे। टीवी पर चुनावी डिबेट में आरोप लग रहा था कि सरकार के पक्ष में आयोग फैसला करेगा। इसके बाद वीडियो रिकॉर्डिंग देखी गई। रिकॉर्डिंग के आधार पर वोटों को अवैध घोषित कर दिया गया। इस फैसले को देश ही नहीं विश्व की मीडिया ने सराहा। यह सब सेशन के कार्यकाल में हुए बदलाव का नतीजा है।


‘मूक प्राणी’ ईवीएम को देते हार का दोष
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि चुनाव हारने वाली बड़ी पार्टियां ईवीएम को दोष दे रही थीं। तीन जून 2017 से एक सप्ताह तक देश की सभी राजनीतिक पार्टियों को आमंत्रित किया गया था कि वे गड़बड़ी होने की बात साबित करें। सिर्फ दो पार्टियों के लोग ही आए, वो भी ये जानने कि ईवीएम काम कैसे करती है। रावत ने कहा कि अपनी हार का दोष पार्टियां ‘मूक प्राणी’ ईवीएम को देती हैं।
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