{"_id":"673b9d21e9fb7e21d40a82a6","slug":"hyena-species-of-hyena-captured-on-camera-in-madavara-gauna-lalitpur-news-c-131-1-ltp1002-124320-2024-11-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lalitpur News: मड़ावरा-गौना में लकड़बग्घा की हायना प्रजाति कैमरे में कैद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lalitpur News: मड़ावरा-गौना में लकड़बग्घा की हायना प्रजाति कैमरे में कैद
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। यहां के जंगलों में जैव विविधता भरपूर है। पूर्व में प्रदेश मुख्यालय के वनाधिकारी इसे स्वीकार नहीं करते थे। इसके लिए जंगलों में ट्रैप कैमरे लगाए गए। इन कैमरों में कई दुर्लभ प्रजाति के जंगली पशुओं की तस्वीर कैद हो चुकी है। इनमें बाघ, भालू, तेंदुआ, लकड़बग्घा व हिरण की विभिन्न प्रजातियां शामिल हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण तस्वीर स्ट्रापट हायना की मानी जा रही है, जो लकड़बग्घा की प्रजाति है।
हाल में वन विभाग ने इन कैमरों की तस्वीरों को खंगाला तो इसमें कुछ और वन्यजीवों की फोटो कैद है। दुर्लभ प्रजाति स्ट्रापट हायना, जिसे लकड़बग्घा कहते हैं, वह देखी गई। सांभर हिरण, तेंदुआ एवं हिरनों को जंगल में विचरण करते देखा गया। सांभर हिरण टाइगर के मुख्य भोजन में से एक है। हाल में वन विभाग के फील्ड स्टाफ ने लखंजर व धौरीसागर के जंगल में टाइगर को विचरण करते हुए देखा है। सबसे बड़ी बात यह है कि इन जंगलों में जो जैव विविधता है, उनमें सभी पशुओं को काफी स्वस्थ स्थिति में देखा गया है।
प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी ने बताया कि ट्रैप कैमरों में दुर्लभ पशुओं की तस्वीरें कैमरों में कैद हुई हैं। अब जंगलों के विकास के लिए शासन स्तर से भी पहल की जा रही है। छह माह में कई प्रजाति के जंगली पशु होने की पुष्टि जनपद में हो चुकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
ललितपुर। यहां के जंगलों में जैव विविधता भरपूर है। पूर्व में प्रदेश मुख्यालय के वनाधिकारी इसे स्वीकार नहीं करते थे। इसके लिए जंगलों में ट्रैप कैमरे लगाए गए। इन कैमरों में कई दुर्लभ प्रजाति के जंगली पशुओं की तस्वीर कैद हो चुकी है। इनमें बाघ, भालू, तेंदुआ, लकड़बग्घा व हिरण की विभिन्न प्रजातियां शामिल हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण तस्वीर स्ट्रापट हायना की मानी जा रही है, जो लकड़बग्घा की प्रजाति है।
हाल में वन विभाग ने इन कैमरों की तस्वीरों को खंगाला तो इसमें कुछ और वन्यजीवों की फोटो कैद है। दुर्लभ प्रजाति स्ट्रापट हायना, जिसे लकड़बग्घा कहते हैं, वह देखी गई। सांभर हिरण, तेंदुआ एवं हिरनों को जंगल में विचरण करते देखा गया। सांभर हिरण टाइगर के मुख्य भोजन में से एक है। हाल में वन विभाग के फील्ड स्टाफ ने लखंजर व धौरीसागर के जंगल में टाइगर को विचरण करते हुए देखा है। सबसे बड़ी बात यह है कि इन जंगलों में जो जैव विविधता है, उनमें सभी पशुओं को काफी स्वस्थ स्थिति में देखा गया है।
विज्ञापन
प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी ने बताया कि ट्रैप कैमरों में दुर्लभ पशुओं की तस्वीरें कैमरों में कैद हुई हैं। अब जंगलों के विकास के लिए शासन स्तर से भी पहल की जा रही है। छह माह में कई प्रजाति के जंगली पशु होने की पुष्टि जनपद में हो चुकी है।
विज्ञापन