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सीएम के लिए चकाचक किया अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 18 Apr 2016 01:07 AM IST
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hospital, lalitpur news
- फोटो : amar ujala
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ललितपुर। मुख्यमंत्री के आगमन पर अस्पतालों की व्यवस्था चकाचक मिले, इसको देखने के लिए चिकित्सा, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव अरविंद कुमार ने जिला अस्पतालों का निरीक्षण किया। स्वास्थ्य विभाग ने भले ही इस बात के पुख्ता इंतजाम किए हैं कि सबकुछ ‘आल इज वेल’ मिले, इसके बावजूद अस्पतालों में अव्यवस्थाओं का बोलबाला है, जिनको प्रमुख सचिव न देख पाए।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव 19 अप्रैल को जिले के दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान वह जिला अस्पताल के पास स्थित गिन्नौट बाग में सभा को संबोधित करेंगे। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि मुख्यमंत्री जिला चिकित्सालय का निरीक्षण कर सकते हैं। इसके मद्देनजर जिला चिकित्सालय की कमियों को दूर करने के लिए चिकित्सा विभाग के प्रमुख सचिव अरविंद कुुमार ने रविवार को जिला चिकित्सालय पुरुष व महिला का निरीक्षण किया। प्रमुख सचिव दिन में करीब एक बजे जिला चिकित्सालय पहुंचे। उन्होंने एनसीटी यूनिट में खुले फिजियोथेरेपी एवं रिहेब्लीटेशन विभाग का निरीक्षण किया। उन्होंने फिजियोथेरेपी इलेक्ट्रोथेरेपी एवं एक्सरसाइज कक्ष को भी देखा।
उन्होंने परामर्शदाता डा. सौरभ देवलिया व डा. रिजु दुबे से मशीनों के बारे में जानकारी प्राप्त की। एनसीटी यूनिट में चिकित्साक नहीं दिखाई दिए, जिस पर सीएमएस ने स्टाफ की कमी बताई। इसके बाद उन्होंने इमरजेंसी, एसएनसीयू व आपरेशन थिएटर का निरीक्षण किया, उन्होंने साफ-सफाई व सुविधाएं दुरस्त रखने के निर्देश दिए। इसके बाद वह महिला जनरल सर्जीकल वार्ड में गए। उन्होंने एनआरसी का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने महिलाओं से पूछा कि उनको शासन की योजनाओं का लाभ मिल रहा है या नहीं। महिलाओं ने बताया कि उनको 50 रुपये का खाना व 50 रुपये की धनराशि दी जा रही है।
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प्रमुख सचिव ने बर्न वार्ड, जच्चा व बच्चा वार्ड, पैथोलाजी, लैब, एक्सरे कक्ष, अल्ट्रासाउंड कक्ष, स्टोर रूम व ट्रॉमा सेंटर का निरीक्षण किया। प्रसव कक्ष, प्रसवोत्तर वार्डों व तीमारदार प्रतीक्षालय को भी देखा।
दो घंटे तक चले प्रमुख सचिव के निरीक्षण में उन्हें जिला चिकित्सालय में कोई खामी नजर नहीं आई और क्लीन चिट देते हुए रवाना हो गए।
इस दौरान झांसी से आए अपर निदेशक डा. टंडन, सीएमओ डा. मुकेश दुबे, डा. जेएस बक्सी, डा. डीसी दोहरे, पुरुष सीएमएस डा. एसके वासवानी, महिला सीएमएस डा. हरेंद्र सिंह चौहान उपस्थित रहे।
गर्मी से मरीजों का बुरा हाल
जिला चिकित्सालय पुरुष में पुरुष जनरल वार्ड, महिला सर्जीकल वार्ड, एनआरसी व महिला जच्चा वार्ड है, जिनमें डेढ़ सौ से अधिक मरीज भर्ती रहते हैं। लेकिन, इतनी गर्मी में मरीजों के लिए जिला चिकित्सालय प्रशासन द्वारा अभी तक कूलर की व्यवस्था नहीं कराई गई है, जबकि प्रत्येक वर्ष कूलर लगाए जाते हैं। गर्मी के कारण मरीजों का बुरा हाल हो रहा है। यही स्थित महिला चिकित्सालय में भर्ती प्रसूताओं और नवजात शिशुओं की है।
डिजीटल एक्स-रे मशीन का दिया आश्वासन
निरीक्षण के दौरान प्रमुख सचिव ने कहा कि प्रदेश के कई जनपदों में डिजीटल एक्सरे मशीन उपलब्ध करा दी गई है। अगले माह तक ललितपुर में भी डिजीटल एक्सरे मशीन उपलब्ध करा दी जाएगी और स्पेशलिस्ट चिकित्सक भी उपलब्ध करा दिया जाएगा। स्टाफ की कमी पर उन्होंने ठेका पर चिकित्सकों, नर्सों व कर्मचारियों को नियुक्त करने की बात कही है। उन्होंने बताया कि ट्रॉमा सेंटर में तीन चिकित्सकों की तैनाती हो गई है, अन्य स्टाफ भी जल्द तैनात कर दिया जाएगा। तीन साल पहले से बने बर्न यूनिट को चालू कराने के मामले में उन्होंने अगले तीन महीनों तक बर्न यूनिट के लिए स्टाफ उपलब्ध करने का आश्वासन दिया। उन्होंने सीएमएस को एक माह के भीतर बर्न वार्ड में एअर कंडीशनर लगवाने के निर्देश दिए।
पेयजल के लिए नहीं उचित व्यवस्था
पुरुष चिकित्सालय के भीतर एक मात्र वाटर आरओ लगा है। प्रमुख सचिव के निरीक्षण के दौरान इस आरओ के नलों से पानी भी नहीं निकल रहा था। पुरुष चिकित्सालय में तीन मंजिल तक वार्ड बने हैं। मरीजों व तीमारदार को पानी के लिए बार-बार तीन मंजिल उतरना-चढ़ना पड़ता है। यदि किसी मरीज के साथ तीमारदार नहीं हो तो उसके लिए बीमारी की हालत में स्वयं ही तीसरी मंजिल से पानी के लिए नीचे आना पड़ता है, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है और अस्पताल में पेयजल का इंतजाम नहीं है।
मरीजों की सुविधा के लिए बनाई लिफ्ट बंद
जिला चिकित्सालय में तीसरी मंजिल तक वार्ड बने हैं। मरीजों की सुविधा के लिए करोड़ों रुपये खर्च करके तीसरे माले तक दो लिफ्ट लगवाई गई थीं, लेकिन यह आए दिन खराब पड़ी रहतीं हैं अथवा बंद रहती हैं। रविवार को निरीक्षण के दौरान भी यह लिफ्ट बंद थीं और लिफ्ट के सामने चिकित्सालय स्टाफ की बाइक खड़ी हुई थीं। लिफ्ट बंद होने के कारण मरीजों व उनके तीमारदारों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सबसे ज्यादा समस्या तीसरी मंजिल पर स्थित पुरुष वार्ड में भर्ती होने वाले मरीजों को होती है।
विकलांग शौचालय में एक साल से ताला
शासन के निर्देश पर प्रदेश के सभी जिला चिकित्सालयों में विकलांगों के लिए शौचालय का निर्माण किया गया था। गत वर्ष माह मार्च में जिला चिकित्सालय परिसर में विकलांग शौचालय का निर्माण कराया गया था, लेकिन एक साल से अधिक समय बीतने के बाद भी शौचालय शुरू नहीं किया गया है, निर्माण के बाद से ही इसमें ताला पड़ा हुआ है।
कई लोगों ने दर्ज कराई शिकायतें
प्रमुख सचिव के निरीक्षण के दौरान अनेक लोगों ने जिला चिकित्सालय प्रशासन पर मनमानी का आरोप लगाते हुए अपनी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। इस दौरान शिकायतकर्ताओं द्वारा महिला चिकित्सालय के सीएमएस व अन्य स्टाफ पर कई आरोप भी लगाए। वहीं, एक फार्मासिस्ट पर मरीजों पर प्राईवेट एक्सरे लैब पर एक्सरे कराने के दबाव बनाने का आरोप लगाया। किसी तीमारदार ने समय से भोजन नहीं देने तो किसी ने पिछले दो दिन से उपचार नहीं मिलने का आरोप लगाया। लेकिन, इन शिकायतों पर कोई गौर नहीं किया गया।
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव 19 अप्रैल को जिले के दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान वह जिला अस्पताल के पास स्थित गिन्नौट बाग में सभा को संबोधित करेंगे। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि मुख्यमंत्री जिला चिकित्सालय का निरीक्षण कर सकते हैं। इसके मद्देनजर जिला चिकित्सालय की कमियों को दूर करने के लिए चिकित्सा विभाग के प्रमुख सचिव अरविंद कुुमार ने रविवार को जिला चिकित्सालय पुरुष व महिला का निरीक्षण किया। प्रमुख सचिव दिन में करीब एक बजे जिला चिकित्सालय पहुंचे। उन्होंने एनसीटी यूनिट में खुले फिजियोथेरेपी एवं रिहेब्लीटेशन विभाग का निरीक्षण किया। उन्होंने फिजियोथेरेपी इलेक्ट्रोथेरेपी एवं एक्सरसाइज कक्ष को भी देखा।
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उन्होंने परामर्शदाता डा. सौरभ देवलिया व डा. रिजु दुबे से मशीनों के बारे में जानकारी प्राप्त की। एनसीटी यूनिट में चिकित्साक नहीं दिखाई दिए, जिस पर सीएमएस ने स्टाफ की कमी बताई। इसके बाद उन्होंने इमरजेंसी, एसएनसीयू व आपरेशन थिएटर का निरीक्षण किया, उन्होंने साफ-सफाई व सुविधाएं दुरस्त रखने के निर्देश दिए। इसके बाद वह महिला जनरल सर्जीकल वार्ड में गए। उन्होंने एनआरसी का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने महिलाओं से पूछा कि उनको शासन की योजनाओं का लाभ मिल रहा है या नहीं। महिलाओं ने बताया कि उनको 50 रुपये का खाना व 50 रुपये की धनराशि दी जा रही है।
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प्रमुख सचिव ने बर्न वार्ड, जच्चा व बच्चा वार्ड, पैथोलाजी, लैब, एक्सरे कक्ष, अल्ट्रासाउंड कक्ष, स्टोर रूम व ट्रॉमा सेंटर का निरीक्षण किया। प्रसव कक्ष, प्रसवोत्तर वार्डों व तीमारदार प्रतीक्षालय को भी देखा।
दो घंटे तक चले प्रमुख सचिव के निरीक्षण में उन्हें जिला चिकित्सालय में कोई खामी नजर नहीं आई और क्लीन चिट देते हुए रवाना हो गए।
इस दौरान झांसी से आए अपर निदेशक डा. टंडन, सीएमओ डा. मुकेश दुबे, डा. जेएस बक्सी, डा. डीसी दोहरे, पुरुष सीएमएस डा. एसके वासवानी, महिला सीएमएस डा. हरेंद्र सिंह चौहान उपस्थित रहे।
गर्मी से मरीजों का बुरा हाल
जिला चिकित्सालय पुरुष में पुरुष जनरल वार्ड, महिला सर्जीकल वार्ड, एनआरसी व महिला जच्चा वार्ड है, जिनमें डेढ़ सौ से अधिक मरीज भर्ती रहते हैं। लेकिन, इतनी गर्मी में मरीजों के लिए जिला चिकित्सालय प्रशासन द्वारा अभी तक कूलर की व्यवस्था नहीं कराई गई है, जबकि प्रत्येक वर्ष कूलर लगाए जाते हैं। गर्मी के कारण मरीजों का बुरा हाल हो रहा है। यही स्थित महिला चिकित्सालय में भर्ती प्रसूताओं और नवजात शिशुओं की है।
डिजीटल एक्स-रे मशीन का दिया आश्वासन
निरीक्षण के दौरान प्रमुख सचिव ने कहा कि प्रदेश के कई जनपदों में डिजीटल एक्सरे मशीन उपलब्ध करा दी गई है। अगले माह तक ललितपुर में भी डिजीटल एक्सरे मशीन उपलब्ध करा दी जाएगी और स्पेशलिस्ट चिकित्सक भी उपलब्ध करा दिया जाएगा। स्टाफ की कमी पर उन्होंने ठेका पर चिकित्सकों, नर्सों व कर्मचारियों को नियुक्त करने की बात कही है। उन्होंने बताया कि ट्रॉमा सेंटर में तीन चिकित्सकों की तैनाती हो गई है, अन्य स्टाफ भी जल्द तैनात कर दिया जाएगा। तीन साल पहले से बने बर्न यूनिट को चालू कराने के मामले में उन्होंने अगले तीन महीनों तक बर्न यूनिट के लिए स्टाफ उपलब्ध करने का आश्वासन दिया। उन्होंने सीएमएस को एक माह के भीतर बर्न वार्ड में एअर कंडीशनर लगवाने के निर्देश दिए।
पेयजल के लिए नहीं उचित व्यवस्था
पुरुष चिकित्सालय के भीतर एक मात्र वाटर आरओ लगा है। प्रमुख सचिव के निरीक्षण के दौरान इस आरओ के नलों से पानी भी नहीं निकल रहा था। पुरुष चिकित्सालय में तीन मंजिल तक वार्ड बने हैं। मरीजों व तीमारदार को पानी के लिए बार-बार तीन मंजिल उतरना-चढ़ना पड़ता है। यदि किसी मरीज के साथ तीमारदार नहीं हो तो उसके लिए बीमारी की हालत में स्वयं ही तीसरी मंजिल से पानी के लिए नीचे आना पड़ता है, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है और अस्पताल में पेयजल का इंतजाम नहीं है।
मरीजों की सुविधा के लिए बनाई लिफ्ट बंद
जिला चिकित्सालय में तीसरी मंजिल तक वार्ड बने हैं। मरीजों की सुविधा के लिए करोड़ों रुपये खर्च करके तीसरे माले तक दो लिफ्ट लगवाई गई थीं, लेकिन यह आए दिन खराब पड़ी रहतीं हैं अथवा बंद रहती हैं। रविवार को निरीक्षण के दौरान भी यह लिफ्ट बंद थीं और लिफ्ट के सामने चिकित्सालय स्टाफ की बाइक खड़ी हुई थीं। लिफ्ट बंद होने के कारण मरीजों व उनके तीमारदारों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सबसे ज्यादा समस्या तीसरी मंजिल पर स्थित पुरुष वार्ड में भर्ती होने वाले मरीजों को होती है।
विकलांग शौचालय में एक साल से ताला
शासन के निर्देश पर प्रदेश के सभी जिला चिकित्सालयों में विकलांगों के लिए शौचालय का निर्माण किया गया था। गत वर्ष माह मार्च में जिला चिकित्सालय परिसर में विकलांग शौचालय का निर्माण कराया गया था, लेकिन एक साल से अधिक समय बीतने के बाद भी शौचालय शुरू नहीं किया गया है, निर्माण के बाद से ही इसमें ताला पड़ा हुआ है।
कई लोगों ने दर्ज कराई शिकायतें
प्रमुख सचिव के निरीक्षण के दौरान अनेक लोगों ने जिला चिकित्सालय प्रशासन पर मनमानी का आरोप लगाते हुए अपनी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। इस दौरान शिकायतकर्ताओं द्वारा महिला चिकित्सालय के सीएमएस व अन्य स्टाफ पर कई आरोप भी लगाए। वहीं, एक फार्मासिस्ट पर मरीजों पर प्राईवेट एक्सरे लैब पर एक्सरे कराने के दबाव बनाने का आरोप लगाया। किसी तीमारदार ने समय से भोजन नहीं देने तो किसी ने पिछले दो दिन से उपचार नहीं मिलने का आरोप लगाया। लेकिन, इन शिकायतों पर कोई गौर नहीं किया गया।