{"_id":"67bb71eacb5484a42901bf68","slug":"hospital-grew-from-five-to-500-beds-in-51-years-lalitpur-news-c-131-1-ltp1004-130244-2025-02-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lalitpur News: 51 साल में पांच से 500 बेड का हुआ अस्पताल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lalitpur News: 51 साल में पांच से 500 बेड का हुआ अस्पताल
विज्ञापन
ललितपुर। जनपद बनने से अब तक 51 साल में स्वास्थ्य सेवाओं में काफी बदलाव आया है। जिला बनने से पहले पांच बेड का राजकीय चिकित्सालय अब पांच सौ बेड के मेडिकल कॉलेज में परिवर्तित हो गया है। वर्तमान में मेडिकल कॉलेज, 31 सरकारी अस्पताल, 198 उप स्वास्थ्य केंद्र, 94 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर समेत नौ नर्सिंग होम और 200 से अधिक निजी अस्पताल संचालित हो रहे हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित क्षेत्र में भी अब आधुनिक सुविधाएं मिलने लगी हैं। न्याय व ग्राम पंचायत स्तर तक सामान्य उपचार और जांच की सुविधाएं हो गई हैं। वर्ष 1974 से पहले स्वास्थ्य सेवाएं अधिक नहीं थीं। लोग नीम-हकीम से उपचार कराते थे। घरों पर ही देसी नुख्सा अपनाकर दर्द सहते थे। इलाज के लिए काफी दूर जाना पड़ता था। संसाधनों के अभाव में आवागमन भी मुश्किल होता था। गंभीर स्थिति में ही लोग अस्पताल जाते थे। समय पर उपचार न मिलने के कारण कई की मौत तक हो जाती थी।
एक मार्च 1974 को ललितपुर के जिला बनने के बाद चिकित्सा क्षेत्र में क्रांति आई। मुख्यालय स्तर के अस्पताल में बेडों की संख्या पांच से बढ़कर 30 की गई। इसके बाद अस्पताल को संयुक्त जिला चिकित्सालय का दर्जा मिला और बेड की संख्या 140 की गई। जिला महिला अस्पताल में दस से बढ़ाकर 60 बेड किए गए। इसके साथ ही आधुनिक सुविधाएं की गईं। अल्ट्रासाउंड, डिजिटल एक्सरे, आधुनिक ऑपरेशन थिएटर, आधुनिक पद्धति से नेत्र ऑपरेशन समेत अन्य सुविधाएं मिलीं। वर्तमान में पांच सौ बेड हैं, जिनमें दूरदराज के मरीज भर्ती होकर लाभ ले रहे हैं। (संवाद)
विज्ञापन
-- -
निजी अस्पतालों की बढ़ी संख्या : जनपद बनने से पहले सीमित निजी अस्पताल थे। वर्तमान में नौ नर्सिंग होम, 28 एलोपैथिक अस्पताल, 80 आयुर्वेदिक व 40 होम्योपैथिक क्लीनिक चल रहे हैं। 18 पैथोलॉजी भी चल रही हैं। 10 अल्ट्रासाउंड सेंटर चल रहे हैं। डिजिटल एक्सरे सेंटर भी लगभग आधा दर्जन संचालित हो रहे हैं।
-- -
गां-गांव पहुंचीं सुविधाएं
जनपद बनने के बाद ब्लॉक बने। इसके बाद ब्लॉक स्तर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए। पहले चार ब्लॉक तालबेहट, महरौनी, मड़ावरा और बार में बनाए गए। वहीं, बिरधा व जखौरा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में 23 नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए। शहर में दो नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोले गए। टीकाकरण व जांच की सुविधा के लिए 198 उप स्वास्थ्य केंद्र संचालित किए गए। वर्तमान में प्राथमिक उपचार व जांच की सुविधा के लिए 94 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर संचालित हो रहे हैं।
-- -
मेडिकल की पढ़ाई भी हुई शुरू
जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज में परिवर्तित करने के बाद बेडों की संख्या 200 से बढ़ाकर 500 की गई। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी दूर करने के साथ एमबीबीएस की पढ़ाई भी शुरू हुई। कॉलेज परिसर में 50 बेड का आयुष अस्पताल भी चल रहा है। वहीं, हाईवे के समीप ग्राम अमरपुर में नर्सिंग कॉलेज का निर्माण किया जा रहा है। जल्द ही इसके संचालित होने से नर्सिंग की पढ़ाई के लिए बाहर नहीं जाना होगा।
विज्ञापन
स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित क्षेत्र में भी अब आधुनिक सुविधाएं मिलने लगी हैं। न्याय व ग्राम पंचायत स्तर तक सामान्य उपचार और जांच की सुविधाएं हो गई हैं। वर्ष 1974 से पहले स्वास्थ्य सेवाएं अधिक नहीं थीं। लोग नीम-हकीम से उपचार कराते थे। घरों पर ही देसी नुख्सा अपनाकर दर्द सहते थे। इलाज के लिए काफी दूर जाना पड़ता था। संसाधनों के अभाव में आवागमन भी मुश्किल होता था। गंभीर स्थिति में ही लोग अस्पताल जाते थे। समय पर उपचार न मिलने के कारण कई की मौत तक हो जाती थी।
विज्ञापन
एक मार्च 1974 को ललितपुर के जिला बनने के बाद चिकित्सा क्षेत्र में क्रांति आई। मुख्यालय स्तर के अस्पताल में बेडों की संख्या पांच से बढ़कर 30 की गई। इसके बाद अस्पताल को संयुक्त जिला चिकित्सालय का दर्जा मिला और बेड की संख्या 140 की गई। जिला महिला अस्पताल में दस से बढ़ाकर 60 बेड किए गए। इसके साथ ही आधुनिक सुविधाएं की गईं। अल्ट्रासाउंड, डिजिटल एक्सरे, आधुनिक ऑपरेशन थिएटर, आधुनिक पद्धति से नेत्र ऑपरेशन समेत अन्य सुविधाएं मिलीं। वर्तमान में पांच सौ बेड हैं, जिनमें दूरदराज के मरीज भर्ती होकर लाभ ले रहे हैं। (संवाद)
विज्ञापन
निजी अस्पतालों की बढ़ी संख्या : जनपद बनने से पहले सीमित निजी अस्पताल थे। वर्तमान में नौ नर्सिंग होम, 28 एलोपैथिक अस्पताल, 80 आयुर्वेदिक व 40 होम्योपैथिक क्लीनिक चल रहे हैं। 18 पैथोलॉजी भी चल रही हैं। 10 अल्ट्रासाउंड सेंटर चल रहे हैं। डिजिटल एक्सरे सेंटर भी लगभग आधा दर्जन संचालित हो रहे हैं।
गां-गांव पहुंचीं सुविधाएं
जनपद बनने के बाद ब्लॉक बने। इसके बाद ब्लॉक स्तर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए। पहले चार ब्लॉक तालबेहट, महरौनी, मड़ावरा और बार में बनाए गए। वहीं, बिरधा व जखौरा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में 23 नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए। शहर में दो नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोले गए। टीकाकरण व जांच की सुविधा के लिए 198 उप स्वास्थ्य केंद्र संचालित किए गए। वर्तमान में प्राथमिक उपचार व जांच की सुविधा के लिए 94 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर संचालित हो रहे हैं।
मेडिकल की पढ़ाई भी हुई शुरू
जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज में परिवर्तित करने के बाद बेडों की संख्या 200 से बढ़ाकर 500 की गई। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी दूर करने के साथ एमबीबीएस की पढ़ाई भी शुरू हुई। कॉलेज परिसर में 50 बेड का आयुष अस्पताल भी चल रहा है। वहीं, हाईवे के समीप ग्राम अमरपुर में नर्सिंग कॉलेज का निर्माण किया जा रहा है। जल्द ही इसके संचालित होने से नर्सिंग की पढ़ाई के लिए बाहर नहीं जाना होगा।