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Lalitpur News: आज देर रात को होगा होलिका दहन, पांच को भाई दूज
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कल शाम को चंद्रग्रहण, चार मार्च को खेली जाएगी होली
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। होलिका दहन कल सोमवार को देर रात एक बजे से सुबह पांच बजे तक श्रद्धा व उत्साह के साथ किया जाएगा। इसके अगले दिन चंद्रग्रहण हैं। इसके चलते चार मार्च को होली खेली जाएगी, जबकि पांच मार्च को भाई दूज मनाया जाएगा। नेहरू महाविद्यालय के प्राचार्य एवं ज्योतिष शास्त्र के विद्वान डॉ. ओमप्रकाश शास्त्री ने बताया कि भारत में होली का आध्यात्मिक, भौतिक एवं वैज्ञानिक महत्व है। इस वर्ष फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा सोमवार की आधी रात को एक बजे से सुबह पांच बजे के बीच होलिका दहन किया जाएगा।
इस प्रकार करें होलिका दहन
खुले स्थान में लकड़ी की वेदिका बनाकर उसके पास पूर्वाभिमुख बैठकर स्वस्तिवाचन कर गणेश गौरी का पूजन कर श्री विष्णु भगवान् का कलश पर पूजन करें। उनके भक्त प्रह्लाद का पूजन करें। फिर होली की वेदिका में अग्नि लगाकर सात परिक्रमा करें। ज्याेतिषाचार्य ने बताया कि होलिका का वैज्ञानिक है। फाल्गुन में अनेक तरह के कीटाणु वायु मंडल में पैदा होकर संक्रामक रोग फैलाते हैं, जिनकी वजह से जुकाम, खांसी, निमोनिया, बुखार, आंखों के रोग आदि फैलने लगते हैं। होलिका दहन में प्रयोग की जाने वाली नवसमिधा के धुएं से ये सभी कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि कृषि प्रधान देश भारत में फागुन में नई फसल आती हैं। इस उत्साह में होली मिलन समारोह आयोजित कर एक दूसरे को रंग लगाते हैं।
रंगपंचमी पर होगा होली का त्योहार
दो मार्च की आधी रात के बाद रात एक से पांच बजे के मध्य होलिका दहन, तीन मार्च को सायंकाल 5.59 से 6.47 बजे तक चंद्रग्रहण होगा। चंद्रग्रहण की वजह से होली चार मार्च को खेली जाएगी। इसके बाद पांच मार्च को भाई दूज का पर्व मनाया जाएगा। आठ मार्च को रंगपंचमी का उत्सव मनाया जाएगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। होलिका दहन कल सोमवार को देर रात एक बजे से सुबह पांच बजे तक श्रद्धा व उत्साह के साथ किया जाएगा। इसके अगले दिन चंद्रग्रहण हैं। इसके चलते चार मार्च को होली खेली जाएगी, जबकि पांच मार्च को भाई दूज मनाया जाएगा। नेहरू महाविद्यालय के प्राचार्य एवं ज्योतिष शास्त्र के विद्वान डॉ. ओमप्रकाश शास्त्री ने बताया कि भारत में होली का आध्यात्मिक, भौतिक एवं वैज्ञानिक महत्व है। इस वर्ष फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा सोमवार की आधी रात को एक बजे से सुबह पांच बजे के बीच होलिका दहन किया जाएगा।
इस प्रकार करें होलिका दहन
खुले स्थान में लकड़ी की वेदिका बनाकर उसके पास पूर्वाभिमुख बैठकर स्वस्तिवाचन कर गणेश गौरी का पूजन कर श्री विष्णु भगवान् का कलश पर पूजन करें। उनके भक्त प्रह्लाद का पूजन करें। फिर होली की वेदिका में अग्नि लगाकर सात परिक्रमा करें। ज्याेतिषाचार्य ने बताया कि होलिका का वैज्ञानिक है। फाल्गुन में अनेक तरह के कीटाणु वायु मंडल में पैदा होकर संक्रामक रोग फैलाते हैं, जिनकी वजह से जुकाम, खांसी, निमोनिया, बुखार, आंखों के रोग आदि फैलने लगते हैं। होलिका दहन में प्रयोग की जाने वाली नवसमिधा के धुएं से ये सभी कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि कृषि प्रधान देश भारत में फागुन में नई फसल आती हैं। इस उत्साह में होली मिलन समारोह आयोजित कर एक दूसरे को रंग लगाते हैं।
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रंगपंचमी पर होगा होली का त्योहार
दो मार्च की आधी रात के बाद रात एक से पांच बजे के मध्य होलिका दहन, तीन मार्च को सायंकाल 5.59 से 6.47 बजे तक चंद्रग्रहण होगा। चंद्रग्रहण की वजह से होली चार मार्च को खेली जाएगी। इसके बाद पांच मार्च को भाई दूज का पर्व मनाया जाएगा। आठ मार्च को रंगपंचमी का उत्सव मनाया जाएगा।
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