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नोटों की मार, खाना-पीना, मनोरंजन सब बेकार
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 16 Nov 2016 01:17 AM IST
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mony, lalitpur news
- फोटो : demo
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एक हजार रुपये व पांच सौ रुपए के पुराने नोट का चलन बंद होने का असर अब बाजार व आमजन पर दिखाई देने लगा है। बाजार में नगदी रुपए कम होने के कारण व्यापार पर असर दिखाई देने लगा है। कुछ समान की कालाबाजारी शुरू हो गई है, तो वहीं सब्जी के दाम भी आधे हो गए हैं। वहीं बैंको से पुराने नोटों के बदले खुल्ले रुपए व नई करेंसी पाने के लिए जनता बैंकों के बाहर मसक्कत करने में इतनी व्यस्त है कि उसको अपने स्वास्थ्य व समस्याओं के बारे में सोचने तक का समय नहीं है। सामान्य तौर पर जिला अस्पताल में ओपीडी में उपचार करने के लिए हर रोज 800 से 900 की संख्या में मरीज उपचार कराने के लिए आते है, लेकिन विगत एक सप्ताह से जिला अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले मरीजों की संख्या में काफी आ गई है। विगत एक सप्ताह से हर रोज लगभग 400 की संख्या में ही मरीज अपना उपचार कराने के लिए आ रहे है। वहीं वार्डों में भर्ती मरीजों की संख्या भी कम हो गई हैै। लोगों को वर्तमान में अपने स्वास्थ्य के लिए समय नहीं है, अधिकतर जनता सुबह से ही बैंकों के बाहर खड़ी हो जाती है। यह तो सरकारी अस्पताल की बात है, प्राइवेट अस्पतालों व क्लीनिक सेंटरों पर तो पूरी तरह से संनाटा पसरा हुआ है।
तहसील दिवस में भी नहीं दिखाई दी जनता
इसी व्यवस्था में लोगों को अपनी समस्याओं व अन्य विवादों का निपटारा करने का भी वक्त नहीं है, इसका अंदाजा मंगलवार को आयोजित तहसील दिवस में आने वाले फरियादियों की कम संख्या से ही लगाया जा सकता हैै। सामान्य तौर पर हर तहसील दिवस में आधा सैंकड़ा के करीब फरियादी अपनी समस्याओं व शिकायतों के निस्तरण के लिए आते थे, लेकिन इस बार मंगलवार को स्थानीय तहसील दिवस में मात्र 31 फरियादी आए हैं। इसके अलावा तहसील परिसर में जमकर संनाटा फैला हुआ है, विगत सप्ताह तक जमीन की खसरा व खतौनी की नकल निकलवाने वालों की लंबी-लंबी कतार लगी रहती थी, इस कतार में अब मात्र एक्का-दुक्का ही लोग दिखाई देते हैं। वहीं कचहरी परिसर में अच्छा खासा सन्नाटा दिखाई दिया, यहां हर रोज फरियादियों व पीड़ितों का वकीलों के पास जमावड़ा लगा रहता था।
सब्जियों के दाम घटकर हुए आधे
एक हजार व पांच सौ रुपए के पुराने नोट बंद होने के बाद सब्जियों के दाम में काफी गिरावट गई है। वर्तमान में सब्जियों के बाद घटकर आधे हो गए हैं। इस संबंध में नझाई गेट सब्जी की दुकान संचालित करने वाले मनोज कुशवाहा बताते हैं, वर्तमान में हर किसी के पास नगद रुपयों की कमी है। किसानों से सब्जी खरीदने के लिए आड़तियों के पास पर्याप्त नकदी नहीं है, इसलिए व्यापारी किसानों से अधिक दाम में सब्जी खरीदने के लिए सक्षम नहीं है, वहीं किसान के पास भी रुपए नहीं है, इसलिए किसान में उनते ही रुपए में सब्जी बेचने को मजबूर है। इसके अलावा आम जनता के पास भी अधिक सब्जी खरीदने के लिए पर्याप्त नगदी नहीं है। सब्जी कच्चा माल है, इसकेे अधिक दिनों तक स्टॉक भी नहीं किया जा सकता है, इसलिए सब्जियों के दाम घटकर आधे हो गए हैं।
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सब्जी का नाम पहले के दाम वर्तमान दाम
टमाटर 15 रुपए प्रतिकिलो 10 रुपए प्रतिकिलो
मूली दस रुपए में चार दस रुपए में दस
गोभी 20 रुपए प्रतिकिलो 10 रुपए प्रतिकिलो
वैगन 20 रुपए प्रतिकिलो 10 रुपए प्रतिकिलो
पालक की भाजी 25 रुपए प्रतिकिलो 10 रुपए प्रतिकिलो
लोकी 20 रुपए प्रतिकिलो 5 रुपए प्रतिकिलो
भिंडी 30 रुपए प्रतिकिलो 15 रुपए प्रतिकिलो
मटर 160 रुपए प्रतिकिलो 90 रुपए प्रतिकिलो
अदरक 60 रुपए प्रतिकिलो 40 रुपए प्रतिकिलो
आलू नया 40 रुपए प्रतिकिलो 25 रुपए प्रतिकिलो
सिनेमा घर में एक सप्ताह से नहीं चला एक भी शो
नगद रुपयों की कमी के कारण लोग वर्तमान में अपनी जरुरतों को पूरी नहीं कर पा रहा है, ऐसे में तो मनोरंजन पर रुपए खर्च करना लोगों के लिए काफी दिलेरी वाली बात है। वर्तमान में शहर में केवल एक ही सिनेमा घर है, जहां नई फिल्म प्रस्तुत की जाती है। इलाईट चौराहा पर संचालित परिवार सिने फ्लैक्स के संचालक प्रदीप जायसवाल बताते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विगत 08 नवंबर की शाम आठ बजे से 500 व 1000 रुपए के नोट को चलन से बंद करने की घोषणा की थी, इसके बाद इनका एक भी शो नहीं चला। उन दिन भी रात को 9 से 12 को शो भी नहीं चल सका था। आज पूरा एक सप्ताह बीत गया है, अभी तक कोई शो नहीं चला है। वहीं उन्होंने बताया कि शुक्रवार को नई मूवी रॉकऑन-टू रिलीज हुई और उनके सिनेमा घर में लगी हुई है। लेकिन अभी तक उस मूवी को एक बार भी सिलेमा घर में प्ले नहीं किया गया हैै। वहीं उन्होंने बताया कि यही परिस्थिति पूरे देश में है। रॉकऑन मूवी ने पूरे देश भर में मात्र दो करोड़ रुपए जुटा पाई है। इन हालातों को देखते हुए आगामी दिनों में रिलीज होने वाली फिल्मों की रिलीजिंग का समय बढ़ाया जा सकता है।
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तहसील दिवस में भी नहीं दिखाई दी जनता
इसी व्यवस्था में लोगों को अपनी समस्याओं व अन्य विवादों का निपटारा करने का भी वक्त नहीं है, इसका अंदाजा मंगलवार को आयोजित तहसील दिवस में आने वाले फरियादियों की कम संख्या से ही लगाया जा सकता हैै। सामान्य तौर पर हर तहसील दिवस में आधा सैंकड़ा के करीब फरियादी अपनी समस्याओं व शिकायतों के निस्तरण के लिए आते थे, लेकिन इस बार मंगलवार को स्थानीय तहसील दिवस में मात्र 31 फरियादी आए हैं। इसके अलावा तहसील परिसर में जमकर संनाटा फैला हुआ है, विगत सप्ताह तक जमीन की खसरा व खतौनी की नकल निकलवाने वालों की लंबी-लंबी कतार लगी रहती थी, इस कतार में अब मात्र एक्का-दुक्का ही लोग दिखाई देते हैं। वहीं कचहरी परिसर में अच्छा खासा सन्नाटा दिखाई दिया, यहां हर रोज फरियादियों व पीड़ितों का वकीलों के पास जमावड़ा लगा रहता था।
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सब्जियों के दाम घटकर हुए आधे
एक हजार व पांच सौ रुपए के पुराने नोट बंद होने के बाद सब्जियों के दाम में काफी गिरावट गई है। वर्तमान में सब्जियों के बाद घटकर आधे हो गए हैं। इस संबंध में नझाई गेट सब्जी की दुकान संचालित करने वाले मनोज कुशवाहा बताते हैं, वर्तमान में हर किसी के पास नगद रुपयों की कमी है। किसानों से सब्जी खरीदने के लिए आड़तियों के पास पर्याप्त नकदी नहीं है, इसलिए व्यापारी किसानों से अधिक दाम में सब्जी खरीदने के लिए सक्षम नहीं है, वहीं किसान के पास भी रुपए नहीं है, इसलिए किसान में उनते ही रुपए में सब्जी बेचने को मजबूर है। इसके अलावा आम जनता के पास भी अधिक सब्जी खरीदने के लिए पर्याप्त नगदी नहीं है। सब्जी कच्चा माल है, इसकेे अधिक दिनों तक स्टॉक भी नहीं किया जा सकता है, इसलिए सब्जियों के दाम घटकर आधे हो गए हैं।
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सब्जी का नाम पहले के दाम वर्तमान दाम
टमाटर 15 रुपए प्रतिकिलो 10 रुपए प्रतिकिलो
मूली दस रुपए में चार दस रुपए में दस
गोभी 20 रुपए प्रतिकिलो 10 रुपए प्रतिकिलो
वैगन 20 रुपए प्रतिकिलो 10 रुपए प्रतिकिलो
पालक की भाजी 25 रुपए प्रतिकिलो 10 रुपए प्रतिकिलो
लोकी 20 रुपए प्रतिकिलो 5 रुपए प्रतिकिलो
भिंडी 30 रुपए प्रतिकिलो 15 रुपए प्रतिकिलो
मटर 160 रुपए प्रतिकिलो 90 रुपए प्रतिकिलो
अदरक 60 रुपए प्रतिकिलो 40 रुपए प्रतिकिलो
आलू नया 40 रुपए प्रतिकिलो 25 रुपए प्रतिकिलो
सिनेमा घर में एक सप्ताह से नहीं चला एक भी शो
नगद रुपयों की कमी के कारण लोग वर्तमान में अपनी जरुरतों को पूरी नहीं कर पा रहा है, ऐसे में तो मनोरंजन पर रुपए खर्च करना लोगों के लिए काफी दिलेरी वाली बात है। वर्तमान में शहर में केवल एक ही सिनेमा घर है, जहां नई फिल्म प्रस्तुत की जाती है। इलाईट चौराहा पर संचालित परिवार सिने फ्लैक्स के संचालक प्रदीप जायसवाल बताते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विगत 08 नवंबर की शाम आठ बजे से 500 व 1000 रुपए के नोट को चलन से बंद करने की घोषणा की थी, इसके बाद इनका एक भी शो नहीं चला। उन दिन भी रात को 9 से 12 को शो भी नहीं चल सका था। आज पूरा एक सप्ताह बीत गया है, अभी तक कोई शो नहीं चला है। वहीं उन्होंने बताया कि शुक्रवार को नई मूवी रॉकऑन-टू रिलीज हुई और उनके सिनेमा घर में लगी हुई है। लेकिन अभी तक उस मूवी को एक बार भी सिलेमा घर में प्ले नहीं किया गया हैै। वहीं उन्होंने बताया कि यही परिस्थिति पूरे देश में है। रॉकऑन मूवी ने पूरे देश भर में मात्र दो करोड़ रुपए जुटा पाई है। इन हालातों को देखते हुए आगामी दिनों में रिलीज होने वाली फिल्मों की रिलीजिंग का समय बढ़ाया जा सकता है।