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कहीं और जिंदगी न छीन लें छतों पर लटकते हाईटेंशन के खुले तार
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घर की छतों से गुजरी खतरे की हाईटेंशन लाइन
- फोटो : LALITPUR
ललितपुर। शहर में हाईटेंशन बिजली की लाइन से हो रही एक के बाद एक मौत की घटनाओं से भी विभागीय अधिकारी सबक नहीं ले रहे हैं। शहर की बस्तियों से हाईटेंशन बिजली के खुले तार हटाए नहीं जा रहे हैं।
वर्षों पहले शहर के बाहर से हाईटेंशन लाइन के तार निकाले गए थे, तब यह तार खाली मैदानों में थे, लेकिन धीरे-धीरे इनके पास बस्तियां बस गईं। अब इन क्षेत्रों में बड़े-बड़े मकान बन गए। अब स्थिति यह है कि हाईटेंशन लाइन के खुलेतार कई छतों को छूने लगे हैं। कुछ छतों के एक फिट, दो फीट व तीन फीट ऊंचाई से निकले हैं। इससे लोग अपनी छतों पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। यदि लोग छत पर पहुंच भी गए तो घटनाओं के शिकार हो जाते हैं।
कई गलियों के मकानों को तार छू रहे हैं। छज्जे से थोड़ा भी हाथ निकालने पर करंट की चपेट में आ जाते है। अब यह तार बस्तीवासियों को मौत परोस रहे हैं। शहर के मोहल्ला पिसनारी, जुगपुरा, रावतयाना व तालाबपुरा की स्थिति खराब है। यहां पर प्रत्येक वर्ष हाईटेंशन लाइन की चपेट में मौतें हो रही हैं। मोहल्ला जुगपुरा में हाईटेंशन लाइन के तार छतों को छू रहे हैं। इससे कई लोग अपनी छतों पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। कई स्थानों पर तो छतों को तार छू रहे हैं। इससे लोगों को सीढ़ियों पर भी नहीं पहुंच पा रहे हैं।
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जहां पांच फीट ऊंचाई पर तार हैं, वहां लोगों ने प्लास्टिक पाइपों से ढक रखे हैं। इसके बाद भी भय के साए में रह रहे हैं। कड़ाके की सर्दी में भी छतों पर नहीं पहुंच पाते हैं। गर्मियों में मकानों के अंदर ही बैठे रहते हैं। यही स्थिति मोहल्ला पिसनारी की है। यहां पर भी हाईटेंशन लाइन के तार लगभग छतों पर रखे हुए हैं। कुछ स्थानों पर तो लोगों ने लकड़ियों के सहारे तारों को ऊपर किया है। जिससे मकान में करंट आने से बचाया जा सके।
विभागीय अधिकारी इन तारों को अनदेखा कर रहे हैं, जिससे करंट लगने से मौत की घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रही है। इसका ताजा उदाहरण पिछले दिनों मोहल्ला पिसनारी में युवक की मौत की घटना है।
विभाग के पास रटा- रटाया जबाब
जब हाईटेंशन बिजली लाइन हटाने की बात की जाती है तो बिजली विभाग रटा-रटाया जबाब देकर एस्टीमेट बनवाए जाने की बात कहकर पल्ला झाड़ लेता है। एस्टीमेट की राशि इतनी अधिक होती है कि लोग पैसा जुटाने का साहस नहीं कर पाते हैं। इस कारण समस्या जस की तस बनी हुई है।
शहर की बस्तियों से निकली हाईटेंशन लाइन के खुले तारों को प्लास्टिक कोटेड कराया जा रहा है। कई स्थानों पर हो गया है। शेष पर शीघ्र कराया जाएगा।
- योगेश कुमार शुक्ल, जिलाधिकारी
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वर्षों पहले शहर के बाहर से हाईटेंशन लाइन के तार निकाले गए थे, तब यह तार खाली मैदानों में थे, लेकिन धीरे-धीरे इनके पास बस्तियां बस गईं। अब इन क्षेत्रों में बड़े-बड़े मकान बन गए। अब स्थिति यह है कि हाईटेंशन लाइन के खुलेतार कई छतों को छूने लगे हैं। कुछ छतों के एक फिट, दो फीट व तीन फीट ऊंचाई से निकले हैं। इससे लोग अपनी छतों पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। यदि लोग छत पर पहुंच भी गए तो घटनाओं के शिकार हो जाते हैं।
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कई गलियों के मकानों को तार छू रहे हैं। छज्जे से थोड़ा भी हाथ निकालने पर करंट की चपेट में आ जाते है। अब यह तार बस्तीवासियों को मौत परोस रहे हैं। शहर के मोहल्ला पिसनारी, जुगपुरा, रावतयाना व तालाबपुरा की स्थिति खराब है। यहां पर प्रत्येक वर्ष हाईटेंशन लाइन की चपेट में मौतें हो रही हैं। मोहल्ला जुगपुरा में हाईटेंशन लाइन के तार छतों को छू रहे हैं। इससे कई लोग अपनी छतों पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। कई स्थानों पर तो छतों को तार छू रहे हैं। इससे लोगों को सीढ़ियों पर भी नहीं पहुंच पा रहे हैं।
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जहां पांच फीट ऊंचाई पर तार हैं, वहां लोगों ने प्लास्टिक पाइपों से ढक रखे हैं। इसके बाद भी भय के साए में रह रहे हैं। कड़ाके की सर्दी में भी छतों पर नहीं पहुंच पाते हैं। गर्मियों में मकानों के अंदर ही बैठे रहते हैं। यही स्थिति मोहल्ला पिसनारी की है। यहां पर भी हाईटेंशन लाइन के तार लगभग छतों पर रखे हुए हैं। कुछ स्थानों पर तो लोगों ने लकड़ियों के सहारे तारों को ऊपर किया है। जिससे मकान में करंट आने से बचाया जा सके।
विभागीय अधिकारी इन तारों को अनदेखा कर रहे हैं, जिससे करंट लगने से मौत की घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रही है। इसका ताजा उदाहरण पिछले दिनों मोहल्ला पिसनारी में युवक की मौत की घटना है।
विभाग के पास रटा- रटाया जबाब
जब हाईटेंशन बिजली लाइन हटाने की बात की जाती है तो बिजली विभाग रटा-रटाया जबाब देकर एस्टीमेट बनवाए जाने की बात कहकर पल्ला झाड़ लेता है। एस्टीमेट की राशि इतनी अधिक होती है कि लोग पैसा जुटाने का साहस नहीं कर पाते हैं। इस कारण समस्या जस की तस बनी हुई है।
शहर की बस्तियों से निकली हाईटेंशन लाइन के खुले तारों को प्लास्टिक कोटेड कराया जा रहा है। कई स्थानों पर हो गया है। शेष पर शीघ्र कराया जाएगा।
- योगेश कुमार शुक्ल, जिलाधिकारी