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‘हर- हर, बम- बम’ के जयकारे से गूंजे शिवालय
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शिवालय में दुग्धाभिषेक करते श्रद्घालु
- फोटो : LALITPUR
ललितपुर/ पाली/ पुलवारा। सावन के अंतिम सोमवार को श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ के दरबार में जाकर उनका अभिषेक किया। इस अवसर सभी शिवालय हर- हर, बम- बम के जयकारे से गूंज उठे।
सावन की पूर्णिमा पर महीने के अंतिम सोमवार को रक्षाबंधन होने के कारण श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की आराधना की। सावन के महीने में सोमवार का विशेष महत्व है। खासकर तब, जब रक्षाबंधन को सोमवार होता है। मान्यता है कि ऐसा संयोग बहुत कम मिलता है। जब सावन का महीना सोमवार से शुरू हुआ हो और अंतिम दिन भी सोमवार हो। इस शुभ मुहूर्त की वजह से सुबह से ही श्रद्धालु भगवान शिव के दरबार में जल अर्पण करने के लिए पहुंचने लगे थे। सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया और चंदन, अक्षत, रोली और पुष्प अर्पण करके भगवान शिव का अभिषेक किया।
शहर के सीतापाठ मंदिर, श्री सर्वेश्वर धाम मंदिर, नृसिंह मंदिर समेत अन्य सभी शिवालयों में श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का अभिषेक किया। इसी तरह पाली में भगवान श्री नीलकंठेश्वर, बार में भगवान शिव के मंदिरों में श्रद्धालुओं ने भगवान को जल अर्पण किया। इसी तरह कस्बा बार के शिवमंदिरों में पूजा-अर्चना की गई।
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कस्बे के बच्छसागर तालाब पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर एवं नवगृहेश्वर मंदिर में देर शाम तक श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की आराधना की। जंगल में विराजमान प्राचीन विजयपुर शिवमंदिर में श्रद्धालुओं ने भूतभावन भगवान शिव की आराधना की। रक्षाबंधन होने के कारण महिलाओं ने भगवान शिव को राखी बांधकर अपने भाइयों की रक्षा की कामना की।
पाली में श्रद्धालुओं ने श्री नीलकंठेश्वर भगवान के दर्शन किए। शिवजी का रुद्राभिषेक श्रृंगार, सहस्त्रधारा और शिव स्तुति कर भगवान का जयघोष किया। महिलाएं मंदिर परिसर में बैठकर भजन कीर्तन कर भगवान शिव की आराधना करती रहीं, वहीं पुरुष भी भगवान शिव का गुणगान करते रहे। श्रद्धालुओं ने दूध, दही, मधु, घी, चंदन व गुलाबजल आदि से अभिषेक किया। हजरिया महादेव शिव मंदिर में भी श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। इसके अलावा नादवानी बगीचा मंदिर, अवधबिहारी मंदिर, गणेश मंदिर, शिव पार्वती मंदिर और अन्य मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भीड़ रही।
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सावन की पूर्णिमा पर महीने के अंतिम सोमवार को रक्षाबंधन होने के कारण श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की आराधना की। सावन के महीने में सोमवार का विशेष महत्व है। खासकर तब, जब रक्षाबंधन को सोमवार होता है। मान्यता है कि ऐसा संयोग बहुत कम मिलता है। जब सावन का महीना सोमवार से शुरू हुआ हो और अंतिम दिन भी सोमवार हो। इस शुभ मुहूर्त की वजह से सुबह से ही श्रद्धालु भगवान शिव के दरबार में जल अर्पण करने के लिए पहुंचने लगे थे। सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया और चंदन, अक्षत, रोली और पुष्प अर्पण करके भगवान शिव का अभिषेक किया।
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शहर के सीतापाठ मंदिर, श्री सर्वेश्वर धाम मंदिर, नृसिंह मंदिर समेत अन्य सभी शिवालयों में श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का अभिषेक किया। इसी तरह पाली में भगवान श्री नीलकंठेश्वर, बार में भगवान शिव के मंदिरों में श्रद्धालुओं ने भगवान को जल अर्पण किया। इसी तरह कस्बा बार के शिवमंदिरों में पूजा-अर्चना की गई।
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कस्बे के बच्छसागर तालाब पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर एवं नवगृहेश्वर मंदिर में देर शाम तक श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की आराधना की। जंगल में विराजमान प्राचीन विजयपुर शिवमंदिर में श्रद्धालुओं ने भूतभावन भगवान शिव की आराधना की। रक्षाबंधन होने के कारण महिलाओं ने भगवान शिव को राखी बांधकर अपने भाइयों की रक्षा की कामना की।
पाली में श्रद्धालुओं ने श्री नीलकंठेश्वर भगवान के दर्शन किए। शिवजी का रुद्राभिषेक श्रृंगार, सहस्त्रधारा और शिव स्तुति कर भगवान का जयघोष किया। महिलाएं मंदिर परिसर में बैठकर भजन कीर्तन कर भगवान शिव की आराधना करती रहीं, वहीं पुरुष भी भगवान शिव का गुणगान करते रहे। श्रद्धालुओं ने दूध, दही, मधु, घी, चंदन व गुलाबजल आदि से अभिषेक किया। हजरिया महादेव शिव मंदिर में भी श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। इसके अलावा नादवानी बगीचा मंदिर, अवधबिहारी मंदिर, गणेश मंदिर, शिव पार्वती मंदिर और अन्य मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भीड़ रही।

सावन के अंतिम सोमवार को भगवान शिव का अभिषेक करते श्रद्घालु- फोटो : LALITPUR