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आधी आबादी हैंडपंप, कुओं के सहारे
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 21 Dec 2016 12:59 AM IST
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water crisis, lalitpur news
- फोटो : demo
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बुंदेलखंड में पेयजल समस्या दिन प्रति दिन विकराल रूप लेती जा रही है। अब अगर बात करें नगर महरौनी की तो यहां पेय जल आपूर्ति जल संस्थान के द्वारा पांच ट्यूबवेल के सहारे टिकी है। नगर की लगभग आधी आबादी अभी भी हैंडपंप, कुओं के सहारे अपनी पेयजल जरूरत को पूरा कर रही है।
महरौनी नगर पंचायत की सीमा में कुल आबादी 9 हजार 402 है। जल संस्थान के द्वारा केवल 8 सौ 46 लोगों ने जल कनेक्शन दिया गया है, जबकि नगर पंचायत द्वारा 14 सौ भवनों से गृहकर व जलकर वसूला जाता है। शेष नगरवासी सरकारी हैंडपंप के सहारे अपना गुजारा कर रहे हैं। पिछले कुछ सालों में महरौनी के नगरीय क्षेत्र का तेजी से विस्तार हुआ है। हालांकि नगर पंचायत में न आने के बावजूद कई ग्रामीण इलाके महरौनी का हिस्सा हो गए हैं। नगर पंचायत की सीमा के बाहर टीकमगढ़ रोड, नया सौजना रोड, कंचन मुहल्ला, टीचर कालोनी, पंडा कालोनी, नाराहट रोड, मंडी रोड आदि मुहल्लों की आबादी लगभग 25 हजार के आसपास होगी, लेकिन इन मुहल्लों में पाइप लाइन नहीं है। अगर किसी मुहल्ले में पाइप लाइन है भी, तो वह ठीक तरीके से काम भी नहीं कर रही है। समस्या का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ठंड के मौसम में भी लोगों को बाहर मुहल्लों में लगे हैंडपंपों का सहारा लेना पड़ रहा है।
विभागीय लापरवाही लोगों पर भारी
केंद्रीय निधि से पिछले साल तीन बड़े बोर कराये गए थे। इससे महरौनी में पर्याप्त पेयजल की आपूर्ति हो सके, लेकिन ठेकेदारों की लापरवाही के चलते निवारी, कुंआघोषी व कुम्हैडी में कराए 600 फीट गहरे बोर केवल शोपीस बने हुए हैं। इनकी विद्युत लाइन तो पूर्ण है, लेकिन ट्रांसफार्मर व संयोजन न होने के कारण संचालित नहीं हो रहे हैं। टीकमगढ रोड स्थित निवारी के समीप आनंदपुर आश्रम से लेकर बानपुर चौराहा, नया सोजना रोड, बानपुर रोड की बस्ती के छोर तक पाइप लाइन तो विगत वर्ष बिछा दी गई लेकिन इन लाइनों से पानी की एक बूंद आज तक आपूर्ति नहीं हो सकी है।
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हैंडपंपों ने छोड़ा पानी
नगर के मंडी रोड पर पानी का स्तर नीचे चले जाने से यहां पर लगे दर्जनों हैंडपंप बंद पड़े हैं। कुछ घरों में नल कनेक्शन है, लेकिन पर्याप्त बिजली न मिलने से या नल खुलने के समय लाइट की कटौती के चलते कम पानी मिलता है। यहां के लोग दूसरों के घरों से पेयजल की व्यवस्था करते हैं, वहीं दूसरे उपयोग के लिए पानी को पांच सौ मीटर दूर लगे हैंडपंपों से भरकर लाते हैं। कस्बा के पंडा कालौनी के निवासियों ने तहसील दिवस के दौरान पेय जल संकट को लेकर पाइप लाइन व नल कनेक्शन के लिए जिलाधिकारी को एक ज्ञापन भी सौंपा है। जब सर्दी के मौसम में नगर के मंडी रोड के हैंडपंप सूख गए हैं, तब गर्मियों में क्या हाल होगा।
सभी बोरों को संचालित करने की जरूरत
पहले कम आबादी होने के कारण सिर्फ एक टंकी से संपूर्ण नगर को भरपूर पानी मिल जाता था। फिर मांग के अनुरूप नाराहट रोड पर एक टंकी और बनाई गई दोनो टंकियो के माध्यम से पेयजल आपूर्ति की जाने लगी। पूर्व में इन टंकियों को भरने के लिये जामनी बांध से पानी लाया जाता था। जहां विद्युत कनेक्शन के साथ बड़े बड़े जेनरेटर की भी व्यवस्था थी। बाद में यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई और नल कूपों के माध्यम से इन टंकियो को भरा जाने लगा। जिसके लिये आवश्यकता के अनुसार सात बोर किये गये और सभी बोरो मे अच्छा जल स्तर है। ऐसे मे अगर कुंआघोषी और निवारी के नये नलकूपों को और संचालित कर दिया जाए तो नगर में कुछ और मुहल्लों को पर्याप्त पेयजल आपूर्ति हो सकती है ।
पाइप लाइन हो गई बदहाल
नगर के मध्य पड़ी पाइप लाइन काफी पुरानी हो चुकी है। कई जगहों पर यह सड़ चुकी है या कही सही है तो भारी बाहनो की आवाजाही या फिर रोड के चल रहे निर्माण कार्य में क्षतिग्रस्त हो जाती है। जिससे सडक पर पानी फैलता रहता है। मुहल्ला कायस्थपुरा में पिछले 15 साल से पाइप लाइन खराब पड़ी हुई है। इस लाइन को सही कराने के लिए कई बार मांग की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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महरौनी नगर पंचायत की सीमा में कुल आबादी 9 हजार 402 है। जल संस्थान के द्वारा केवल 8 सौ 46 लोगों ने जल कनेक्शन दिया गया है, जबकि नगर पंचायत द्वारा 14 सौ भवनों से गृहकर व जलकर वसूला जाता है। शेष नगरवासी सरकारी हैंडपंप के सहारे अपना गुजारा कर रहे हैं। पिछले कुछ सालों में महरौनी के नगरीय क्षेत्र का तेजी से विस्तार हुआ है। हालांकि नगर पंचायत में न आने के बावजूद कई ग्रामीण इलाके महरौनी का हिस्सा हो गए हैं। नगर पंचायत की सीमा के बाहर टीकमगढ़ रोड, नया सौजना रोड, कंचन मुहल्ला, टीचर कालोनी, पंडा कालोनी, नाराहट रोड, मंडी रोड आदि मुहल्लों की आबादी लगभग 25 हजार के आसपास होगी, लेकिन इन मुहल्लों में पाइप लाइन नहीं है। अगर किसी मुहल्ले में पाइप लाइन है भी, तो वह ठीक तरीके से काम भी नहीं कर रही है। समस्या का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ठंड के मौसम में भी लोगों को बाहर मुहल्लों में लगे हैंडपंपों का सहारा लेना पड़ रहा है।
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विभागीय लापरवाही लोगों पर भारी
केंद्रीय निधि से पिछले साल तीन बड़े बोर कराये गए थे। इससे महरौनी में पर्याप्त पेयजल की आपूर्ति हो सके, लेकिन ठेकेदारों की लापरवाही के चलते निवारी, कुंआघोषी व कुम्हैडी में कराए 600 फीट गहरे बोर केवल शोपीस बने हुए हैं। इनकी विद्युत लाइन तो पूर्ण है, लेकिन ट्रांसफार्मर व संयोजन न होने के कारण संचालित नहीं हो रहे हैं। टीकमगढ रोड स्थित निवारी के समीप आनंदपुर आश्रम से लेकर बानपुर चौराहा, नया सोजना रोड, बानपुर रोड की बस्ती के छोर तक पाइप लाइन तो विगत वर्ष बिछा दी गई लेकिन इन लाइनों से पानी की एक बूंद आज तक आपूर्ति नहीं हो सकी है।
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हैंडपंपों ने छोड़ा पानी
नगर के मंडी रोड पर पानी का स्तर नीचे चले जाने से यहां पर लगे दर्जनों हैंडपंप बंद पड़े हैं। कुछ घरों में नल कनेक्शन है, लेकिन पर्याप्त बिजली न मिलने से या नल खुलने के समय लाइट की कटौती के चलते कम पानी मिलता है। यहां के लोग दूसरों के घरों से पेयजल की व्यवस्था करते हैं, वहीं दूसरे उपयोग के लिए पानी को पांच सौ मीटर दूर लगे हैंडपंपों से भरकर लाते हैं। कस्बा के पंडा कालौनी के निवासियों ने तहसील दिवस के दौरान पेय जल संकट को लेकर पाइप लाइन व नल कनेक्शन के लिए जिलाधिकारी को एक ज्ञापन भी सौंपा है। जब सर्दी के मौसम में नगर के मंडी रोड के हैंडपंप सूख गए हैं, तब गर्मियों में क्या हाल होगा।
सभी बोरों को संचालित करने की जरूरत
पहले कम आबादी होने के कारण सिर्फ एक टंकी से संपूर्ण नगर को भरपूर पानी मिल जाता था। फिर मांग के अनुरूप नाराहट रोड पर एक टंकी और बनाई गई दोनो टंकियो के माध्यम से पेयजल आपूर्ति की जाने लगी। पूर्व में इन टंकियों को भरने के लिये जामनी बांध से पानी लाया जाता था। जहां विद्युत कनेक्शन के साथ बड़े बड़े जेनरेटर की भी व्यवस्था थी। बाद में यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई और नल कूपों के माध्यम से इन टंकियो को भरा जाने लगा। जिसके लिये आवश्यकता के अनुसार सात बोर किये गये और सभी बोरो मे अच्छा जल स्तर है। ऐसे मे अगर कुंआघोषी और निवारी के नये नलकूपों को और संचालित कर दिया जाए तो नगर में कुछ और मुहल्लों को पर्याप्त पेयजल आपूर्ति हो सकती है ।
पाइप लाइन हो गई बदहाल
नगर के मध्य पड़ी पाइप लाइन काफी पुरानी हो चुकी है। कई जगहों पर यह सड़ चुकी है या कही सही है तो भारी बाहनो की आवाजाही या फिर रोड के चल रहे निर्माण कार्य में क्षतिग्रस्त हो जाती है। जिससे सडक पर पानी फैलता रहता है। मुहल्ला कायस्थपुरा में पिछले 15 साल से पाइप लाइन खराब पड़ी हुई है। इस लाइन को सही कराने के लिए कई बार मांग की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।