{"_id":"6879518a186d69c9d4087e2f","slug":"gates-of-six-dams-of-the-district-including-rajghat-matatila-opened-lalitpur-news-c-131-1-sjhs1012-139249-2025-07-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lalitpur News: राजघाट, माताटीला सहित जिले के छह बांधों के गेट खुले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lalitpur News: राजघाट, माताटीला सहित जिले के छह बांधों के गेट खुले
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। बृहस्पतिवार को जिले में हुई भारी बारिश से बांधों के भराव क्षेत्र से पानी की आवक ज्यादा होने पर राजघाट, माताटीला, कचनौंदा, भावनी, उटारी, लोअर रोहिणी के गेट खोले गए और अतिरिक्त पानी की निकासी की जाने लगी। बांधों से पानी छोड़े जाने पर निचले इलाकों में बहने वाली नदियाें का जलस्तर बढ़ गया। सिंचाई विभाग के अधिकारी बांधों के जलस्तर की निगरानी कर रहे हैं।
जनपद में हो रही बारिश और मध्यप्रदेश क्षेत्र में हो रही बारिश से बेतवा नदी का जलस्तर बढ़ गया। जिससे राजघाट बांध का जलस्तर निर्धारित से अधिक पर पहुंचने लगा। इसे देखते हुए सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बांध के गेट खोलकर अतिरिक्त पानी की निकासी करने के आदेश दिए। जिसके क्रम में राजघाट बांध के आठ गेट खोलकर 75000 क्यूसेक पानी छोड़ना शुरू किया। राजघाट के गेट खुलने पर निचले इलाके में निर्मित माताटीला बांध में पानी की आवक ज्यादा होने लगी। इस पर माताटीला बांध के बीस गेट दो-दो फुट पर खोलकर 47100 क्यूसेक पानी की निकासी की जाने लगी। सिंचाई विभाग के अधिकारियों के मुताबिक माताटीला बांध से देर रात तक एक लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने की संभावना है। वहीं भावनी बांध के कैचमेट एरिया में हुई बारिश से बांध के तीन गेट खोलकर 5890 क्यूसेक पानी छोड़ा जाने लगा। वहीं, कचनौंदा बांध से 2850 क्यूसेक पानी की निकासी की जा रही है।
उटारी बांध के पांच गेट खोलकर 2400 क्यूसेक पानी और लोअर रोहिणी का एक गेट खोलकर 582 क्यूसेक पानी की निकासी की जा रही है। बांधों के गेट खुलने पर निचले इलाकों में बहने वाली नदियों का जलस्तर बढ़ गया और वह उफनाकर बहने लगी। सिंचाई विभाग ने निचले इलाकों में अलर्ट घोषित किया और लोगों से नदी क्षेत्र में न जाने की अपील की। वहीं सिंचाई विभाग के अधिकारी बांधों में पानी की आवक और जलस्तर की लगातार निगरानी कर रहे हैं।
विज्ञापन
अधिशासी अभियंता सिंचाई खंड/नोडल भूपेश सुहेरा ने बताया कि बांधों के कैचमेट एरिया में भारी बारिश होने से भराव क्षेत्र से पानी की आवक बांधों में ज्यादा हुई। जिससे बांधों का निर्धारित जलस्तर बढ़ने लगा। जलस्तर निर्धारित करने के लिए गेट खोलकर अतिरिक्त पानी की निकासी की जा रही है। जलस्तर निर्धारित होने पर गेट बंद कर दिए जाएंगे।
विज्ञापन
ललितपुर। बृहस्पतिवार को जिले में हुई भारी बारिश से बांधों के भराव क्षेत्र से पानी की आवक ज्यादा होने पर राजघाट, माताटीला, कचनौंदा, भावनी, उटारी, लोअर रोहिणी के गेट खोले गए और अतिरिक्त पानी की निकासी की जाने लगी। बांधों से पानी छोड़े जाने पर निचले इलाकों में बहने वाली नदियाें का जलस्तर बढ़ गया। सिंचाई विभाग के अधिकारी बांधों के जलस्तर की निगरानी कर रहे हैं।
जनपद में हो रही बारिश और मध्यप्रदेश क्षेत्र में हो रही बारिश से बेतवा नदी का जलस्तर बढ़ गया। जिससे राजघाट बांध का जलस्तर निर्धारित से अधिक पर पहुंचने लगा। इसे देखते हुए सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बांध के गेट खोलकर अतिरिक्त पानी की निकासी करने के आदेश दिए। जिसके क्रम में राजघाट बांध के आठ गेट खोलकर 75000 क्यूसेक पानी छोड़ना शुरू किया। राजघाट के गेट खुलने पर निचले इलाके में निर्मित माताटीला बांध में पानी की आवक ज्यादा होने लगी। इस पर माताटीला बांध के बीस गेट दो-दो फुट पर खोलकर 47100 क्यूसेक पानी की निकासी की जाने लगी। सिंचाई विभाग के अधिकारियों के मुताबिक माताटीला बांध से देर रात तक एक लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने की संभावना है। वहीं भावनी बांध के कैचमेट एरिया में हुई बारिश से बांध के तीन गेट खोलकर 5890 क्यूसेक पानी छोड़ा जाने लगा। वहीं, कचनौंदा बांध से 2850 क्यूसेक पानी की निकासी की जा रही है।
विज्ञापन
उटारी बांध के पांच गेट खोलकर 2400 क्यूसेक पानी और लोअर रोहिणी का एक गेट खोलकर 582 क्यूसेक पानी की निकासी की जा रही है। बांधों के गेट खुलने पर निचले इलाकों में बहने वाली नदियों का जलस्तर बढ़ गया और वह उफनाकर बहने लगी। सिंचाई विभाग ने निचले इलाकों में अलर्ट घोषित किया और लोगों से नदी क्षेत्र में न जाने की अपील की। वहीं सिंचाई विभाग के अधिकारी बांधों में पानी की आवक और जलस्तर की लगातार निगरानी कर रहे हैं।
विज्ञापन
अधिशासी अभियंता सिंचाई खंड/नोडल भूपेश सुहेरा ने बताया कि बांधों के कैचमेट एरिया में भारी बारिश होने से भराव क्षेत्र से पानी की आवक बांधों में ज्यादा हुई। जिससे बांधों का निर्धारित जलस्तर बढ़ने लगा। जलस्तर निर्धारित करने के लिए गेट खोलकर अतिरिक्त पानी की निकासी की जा रही है। जलस्तर निर्धारित होने पर गेट बंद कर दिए जाएंगे।