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संत मिलन के बाद बिछड़ने पर इतना दुख प्रथम बार देखने को मिला: शंकराचार्य
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संवाद न्यूज एजेंसी
डोंगराखुर्द (ललितपुर)। कस्बा नाराहट हनुमान मंदिर परिसर में आयोजित श्रीराम कथा महोत्सव में पधारे प्रयाग पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ओंकारानंद सरस्वती महाराज को सोमवार को भक्तों ने दुखी मन से विदाई दी। उन्होंने कहा कि संत मिलन के बाद बिछड़ने पर इतना दुख प्रथम बार देखने को मिला। जब संत मिलते हैं तो उनका मिलना बड़ा सुख देता है और जब बिछड़ते हैं तो असहनीय दुख होता है।
श्रीराम महोत्सव में आए शंकराचार्य महाराज ने रविवार को कथा का समापन किया। सोमवार को पूजन आदि के बाद जब उनके चलने की बेला आई तो श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। शंकराचार्य महाराज के पीछे लोग चलने लगे तो उन्होंने कहा कि भगवान के भक्तों को संतों के आने पर मन को सुख शांति मिलता है, लेकिन संतों के बिछड़ने पर काफी दुख होता है। इसलिए भक्त को संत और भगवान से निरंतर प्रेम करना चाहिए, क्योंकि उनका प्रेम स्वार्थ के लिए नहीं है। इस मौके पर कृष्ण सखा उद्धव महाराज, आचार्य महेंद्र शास्त्री समेत कई धर्माचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार और स्वस्तिवाचन किया। पादुका पूजन के बाद भक्तों ने सनातन धर्मगुरु शंकराचार्य महाराज के ऊपर पुष्पवर्षा कर गाजे बाजे के साथ विदाई दी। इस दौरान अशोक रावत, डॉक्टर सुरेश पंथ, कौस्तुभ चौबे, हरेंद्र शाह राजू राजा, लल्लू, राजा, लोकेंद्र, मनोज कुशवाहा, लालू टोंटे आदि मौजूद रहे।
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माता-पिता से दूरी और आर्थिक तंगी से युवा उठाते आत्मघाती कदम: शंकराचार्य
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। माता-पिता से दूरी, बेरोजगारी व आर्थिक तंगी युवाओं के आत्महत्या का कारण बन रही है। यह बातें प्रयाग पीठाधीश्वर स्वामी ओंकारानंद सरस्वती महाराज ने कही। उन्होंने कहा कि विलासिता के जीवन में लोगों की आवश्यकताएं बढ़ी हैं, ऐसे में आर्थिक संसाधन कम होने कारण लोग तनाव का जीवन गुजार रहे हैं। वह सोमवार को चर्च रोड स्थित अमर उजाला कार्यालय आए, जहां उन्होंने लोगों को आशीर्वाद दिया।
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उन्होंने कहा कि संयुक्त परिवार समाप्त होते जा रहे हैं। लोग पत्नी व बच्चों को ही परिवार समझ रहे हैं। माता पिता व भाई बहनों से दूरी के कारण वह अपने दुख सुख एक दूसरे से नहीं बांट पाते हैं। इस दौरान सुरेश बाबू जैन, अक्षय आल्या, शशांक जैन, रामगोपाल नामदेव, अभिषेक यादव मौजूद रहे।
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डोंगराखुर्द (ललितपुर)। कस्बा नाराहट हनुमान मंदिर परिसर में आयोजित श्रीराम कथा महोत्सव में पधारे प्रयाग पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ओंकारानंद सरस्वती महाराज को सोमवार को भक्तों ने दुखी मन से विदाई दी। उन्होंने कहा कि संत मिलन के बाद बिछड़ने पर इतना दुख प्रथम बार देखने को मिला। जब संत मिलते हैं तो उनका मिलना बड़ा सुख देता है और जब बिछड़ते हैं तो असहनीय दुख होता है।
श्रीराम महोत्सव में आए शंकराचार्य महाराज ने रविवार को कथा का समापन किया। सोमवार को पूजन आदि के बाद जब उनके चलने की बेला आई तो श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। शंकराचार्य महाराज के पीछे लोग चलने लगे तो उन्होंने कहा कि भगवान के भक्तों को संतों के आने पर मन को सुख शांति मिलता है, लेकिन संतों के बिछड़ने पर काफी दुख होता है। इसलिए भक्त को संत और भगवान से निरंतर प्रेम करना चाहिए, क्योंकि उनका प्रेम स्वार्थ के लिए नहीं है। इस मौके पर कृष्ण सखा उद्धव महाराज, आचार्य महेंद्र शास्त्री समेत कई धर्माचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार और स्वस्तिवाचन किया। पादुका पूजन के बाद भक्तों ने सनातन धर्मगुरु शंकराचार्य महाराज के ऊपर पुष्पवर्षा कर गाजे बाजे के साथ विदाई दी। इस दौरान अशोक रावत, डॉक्टर सुरेश पंथ, कौस्तुभ चौबे, हरेंद्र शाह राजू राजा, लल्लू, राजा, लोकेंद्र, मनोज कुशवाहा, लालू टोंटे आदि मौजूद रहे।
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माता-पिता से दूरी और आर्थिक तंगी से युवा उठाते आत्मघाती कदम: शंकराचार्य
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। माता-पिता से दूरी, बेरोजगारी व आर्थिक तंगी युवाओं के आत्महत्या का कारण बन रही है। यह बातें प्रयाग पीठाधीश्वर स्वामी ओंकारानंद सरस्वती महाराज ने कही। उन्होंने कहा कि विलासिता के जीवन में लोगों की आवश्यकताएं बढ़ी हैं, ऐसे में आर्थिक संसाधन कम होने कारण लोग तनाव का जीवन गुजार रहे हैं। वह सोमवार को चर्च रोड स्थित अमर उजाला कार्यालय आए, जहां उन्होंने लोगों को आशीर्वाद दिया।
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उन्होंने कहा कि संयुक्त परिवार समाप्त होते जा रहे हैं। लोग पत्नी व बच्चों को ही परिवार समझ रहे हैं। माता पिता व भाई बहनों से दूरी के कारण वह अपने दुख सुख एक दूसरे से नहीं बांट पाते हैं। इस दौरान सुरेश बाबू जैन, अक्षय आल्या, शशांक जैन, रामगोपाल नामदेव, अभिषेक यादव मौजूद रहे।