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चौबीस घंटे में अमझरा बार्डर से निकले पांच हजार मजदूर
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ङोंगराखुर्द। मध्य प्रदेश से हजारों की संख्या में मजदूर अमझरा घाटी होकर प्रतिदिन गुजर रहे हैं। कुछ किराए से तो कुछ पैदल आ रहे हैं। पैदल आ रहे लोगों को गोशाला में एकत्रित किया जा रहा है। इसके बाद यहां से भेजने की व्यवस्था की जा रही है। अमझरा घाटी सीमा से 500 वाहनों द्वारा 24 घंटे में पांच हजार से ज्यादा मजदूर निकल गए हैं। तहसीलदार पाली अभिषेक कुमार सिंह ने बताया कि अमझरा गोशाला में अभी भी दो सौ से अधिक मजदूर मौजूद हैं, उनको भोजन देने की तैयारी हो रही है। दस बसों से सभी को उनके गृह जनपद में भिजवाजा जाएगा।
उत्तर प्रदेश की सीमा अमझरा घाटी पर राष्ट्रीय राजमार्ग से प्रतिदिन हजारों की संख्या में मजदूर आ रहे हैं। जो उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों सुल्तानपुर, गोरखपुर, प्रयागराज, झांसी, जालौन, कौशांबी आदि जा रहे हैं। छोटे-छोटे बच्चों को गोद में लेकर सैकड़ों किलोमीटर का सफर पैदल चलकर तय रहे हैं। कभी खाना मिल गया तो ठीक, नहीं तो पानी पीकर ही सो जाते हैं। उधर, मजदूर जल्दी घर जाने के लिए वाहनों को किराये से लेकर आ रहे हैं, जिनकी सूची तैयार कराई जा रही है। वाहनों को पास बनाकर दिया जा रहा है।
मजदर बोले-रास्ते में लोगों ने उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया
मजदूरों के हालत देखकर ऐसा लगता है कि मजदूर अपने गांव से अब महानगरों में मजदूरी करने नहीं जाएंगे, क्योंकि मजदूरों को उन्हीं के हाल पर छोड़ दिया गया है। मजदूरों का कहना है कि रास्ते में लोगों ने उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया। खाना मिला तो ठीक, नहीं तो नमकीन व बिस्कुट खाकर पानी पीकर चल देते हैं। वाहनों वाले उल्टा-सीधा किराया वसूल कर रहे हैं और क्षमता से ज्यादा लोगों को ठसाठस बैठकर जा रहे हैं। मजदूर की मेहनत से बड़े-बड़े उद्योगों को मजबूती मिली, लेकिन वही मजदूर रोजी-रोटी तो छोड़िए, अपने घरों तक पहुंचने में बड़ी कठिनाई का सफर कर रहा है।
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भोजन की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं
अमझरा बार्डर पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में मजदूरों का आने का सिलसिला जारी है। उनके लिए खाने- पीने का इंतजाम नाराहट व्यापार मंडल कर रहा है। लेकिन, यह नाकाफी है। मजदूरों को भोजन की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है।
जंगलों से होकर आ रहे
जंगल में पड़ने वाले गांव महोली, डोंगराकलां, डांगराखुर्द, पांडव वन, बालाबेहट, मदनपुर आदि से चोरी छिपे लोग आ रहे हैं। वह कंकरीले और पथरीले रास्ते से प्रवेश कर रहे हैं और गांवों में पहुंच रहे हैं।
अमझरा बार्डर सें गुजरने वाले सभी वाहनों को रुकवाया जा रहा है। उनकी जांच कर तलाशी ली जा रही है। किसी वाहन को बगैर पास के प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है।
- फूलसिंह, पुलिस क्षेत्राधिकारी पाली।
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उत्तर प्रदेश की सीमा अमझरा घाटी पर राष्ट्रीय राजमार्ग से प्रतिदिन हजारों की संख्या में मजदूर आ रहे हैं। जो उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों सुल्तानपुर, गोरखपुर, प्रयागराज, झांसी, जालौन, कौशांबी आदि जा रहे हैं। छोटे-छोटे बच्चों को गोद में लेकर सैकड़ों किलोमीटर का सफर पैदल चलकर तय रहे हैं। कभी खाना मिल गया तो ठीक, नहीं तो पानी पीकर ही सो जाते हैं। उधर, मजदूर जल्दी घर जाने के लिए वाहनों को किराये से लेकर आ रहे हैं, जिनकी सूची तैयार कराई जा रही है। वाहनों को पास बनाकर दिया जा रहा है।
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मजदर बोले-रास्ते में लोगों ने उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया
मजदूरों के हालत देखकर ऐसा लगता है कि मजदूर अपने गांव से अब महानगरों में मजदूरी करने नहीं जाएंगे, क्योंकि मजदूरों को उन्हीं के हाल पर छोड़ दिया गया है। मजदूरों का कहना है कि रास्ते में लोगों ने उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया। खाना मिला तो ठीक, नहीं तो नमकीन व बिस्कुट खाकर पानी पीकर चल देते हैं। वाहनों वाले उल्टा-सीधा किराया वसूल कर रहे हैं और क्षमता से ज्यादा लोगों को ठसाठस बैठकर जा रहे हैं। मजदूर की मेहनत से बड़े-बड़े उद्योगों को मजबूती मिली, लेकिन वही मजदूर रोजी-रोटी तो छोड़िए, अपने घरों तक पहुंचने में बड़ी कठिनाई का सफर कर रहा है।
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भोजन की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं
अमझरा बार्डर पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में मजदूरों का आने का सिलसिला जारी है। उनके लिए खाने- पीने का इंतजाम नाराहट व्यापार मंडल कर रहा है। लेकिन, यह नाकाफी है। मजदूरों को भोजन की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है।
जंगलों से होकर आ रहे
जंगल में पड़ने वाले गांव महोली, डोंगराकलां, डांगराखुर्द, पांडव वन, बालाबेहट, मदनपुर आदि से चोरी छिपे लोग आ रहे हैं। वह कंकरीले और पथरीले रास्ते से प्रवेश कर रहे हैं और गांवों में पहुंच रहे हैं।
अमझरा बार्डर सें गुजरने वाले सभी वाहनों को रुकवाया जा रहा है। उनकी जांच कर तलाशी ली जा रही है। किसी वाहन को बगैर पास के प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है।
- फूलसिंह, पुलिस क्षेत्राधिकारी पाली।
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अमझराघाटी से सामान सिर पर रखकर पैदल चलते मजदूर- फोटो : LALITPUR