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फसल की रखवाली को करना पड़ता है रतजगा
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फसल की रखवाली को करना पड़ता है रतजगा
पुलवारा। कस्बा बार और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में छुट्टा जानवर किसानों के लिए चिंता की वजह बन गए हैं। दिन-रात मेहनत और लगन से खेत में फसल की बुवाई करने के बाद अच्छी पैदावार की उम्मीदों पर छुट्टा जानवर पानी फेर रहे हैं। यदि किसानों को फसल बचानी है तो स्वयं ही खेतों की रखवाली करनी पड़ती है। खासकर रात में होने वाले नुकसान से बचने के लिए किसानों को रतजगा करना पड़ता है।
कभी सूखा तो कभी अतिवृष्टि की विभीषिका झेल चुके किसान अब छुट्टा जानवरों से जूझ रहे हैं। दिन- रात घूमने वाले जानवर खेतों में घुसकर भारी नुकसान पहुंचाते हैं। यह फसलों को चौपट कर जाते हैं, जिससे किसानों को खासी चपत लग रही है। प्रशासन छुट्टा जानवरों पर अंकुश लगाने के लिए कई प्रयास कर रहा है, लेकिन समस्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। ग्राम पुरा पाचौनी में छुट्टा जानवरों के लिए दो एकड़ जमीन चिह्नित की गई है। चार कर्मचारियों को काम पर रखा गया है। इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।
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पुलवारा। कस्बा बार और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में छुट्टा जानवर किसानों के लिए चिंता की वजह बन गए हैं। दिन-रात मेहनत और लगन से खेत में फसल की बुवाई करने के बाद अच्छी पैदावार की उम्मीदों पर छुट्टा जानवर पानी फेर रहे हैं। यदि किसानों को फसल बचानी है तो स्वयं ही खेतों की रखवाली करनी पड़ती है। खासकर रात में होने वाले नुकसान से बचने के लिए किसानों को रतजगा करना पड़ता है।
कभी सूखा तो कभी अतिवृष्टि की विभीषिका झेल चुके किसान अब छुट्टा जानवरों से जूझ रहे हैं। दिन- रात घूमने वाले जानवर खेतों में घुसकर भारी नुकसान पहुंचाते हैं। यह फसलों को चौपट कर जाते हैं, जिससे किसानों को खासी चपत लग रही है। प्रशासन छुट्टा जानवरों पर अंकुश लगाने के लिए कई प्रयास कर रहा है, लेकिन समस्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। ग्राम पुरा पाचौनी में छुट्टा जानवरों के लिए दो एकड़ जमीन चिह्नित की गई है। चार कर्मचारियों को काम पर रखा गया है। इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।
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