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खरीफ फसल नष्ट होने से किसानों को सताने लगी रबी की चिंता
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- फोटो : kisan.jpg
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ललितपुर। कुदरत के कहर से नष्ट हुई खरीफ फसल से किसान आर्थिक रूप से टूट गए हैं। अब किसानों को रबी की फसल की तैयारियों की चिंता सताने लगी है। बैंक व साहूकारों के कर्ज न चुका पाने से अब कहीं से भी पैसे मिलने की आस नहीं रही है। समय पर फसल बीमा क्लेम व आपदा राहत की राशि मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। पैसा न मिला तो रबी की बुवाई करना मुश्किल हो जाएगा।
जनपद में किसानों पर कुदरत लगातार अपना कहर बरपा रहा है। एक तो आपदाओं का प्रकोप फसलों कको बर्बाद कर रहा है वहीं दूसरी ओर आपदाओं से राहत देने के लिए बनी योजनाओं के धरातल पर न आने से किसान लगातार बर्बादी की कगार पर आ गया है। साल दर साल कर्ज से डूबते जा रहे हैं।
किसानों के पास खेती ही एक मात्र आय का साधन है। कर्ज से उबरने की उम्मीद लेकर खेती कर रहे हैं, लेकिन लगातार आपदाओं के प्रकोप से बीते चार वर्षों से खरीफ फसल नष्ट हो रही है। वहीं योजनाएं भी धरातल पर नहीं उतर रहीं। प्रतिवर्ष बीमा क्लेम से हजारों किसान वंचित होते जा रहे हैं। ऐसे में किसान पूरी तरह से टूट चुका है। इस वर्ष किसानों ने खरीफ फसल की बुवाई की, लेकिन अगस्त व सितंबर माह की बारिश ने पूरी तरह से फसलों को बर्बाद कर दिया है। इससे किसानों की लागत तो दूर बीज तक नहीं निकला है। अब किसानों को कर्ज चुकाना तो दूर परिवार का पालन पोषण करना तक मुश्किल हो रहा है।
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किसान इस फसल के नष्ट होने के दर्द से उबरे नहीं थे कि अब रबी फसल की तैयारियों की चिंता सताने लगी है। एक तो बैंक व साहूकारों के कर्ज नहीं चुका पाए हैं। अब रबी फसल की तैयारियों का समय नजदीक आ रहा है और किसानों को कहीं से भी पैसे मिलने की उम्मीद नहीं है। अब उन्हें समय पर फसल बीमा क्लेम व आपदा राहत की राशि मिलने की आस लगाए हैं। समय पर क्लेम व आपदा राहत राशि का भुगतान नहीं हुआ तो रबी की बुवाई करना मुश्किल हो जाएगा। यह सबसे बड़ा आर्थिक संकट सता रहा है।
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यह है रबी की बुवाई का सीजन
रबी की फसल में चना व मटर की फसल की बुवाई का सीजन 20 से 30 अक्तूबर तक होता है। वहीं गेहूं व अन्य अनाजों की बुवाई 15 से 30 नवंबर तक होती है। इससे पहले किसानों को खेतों की सफाई, जुताई, पलेवा और खाद, बीज का इंतजाम करना होता है।
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बैंक व साहूकार दोनों से कर्ज लेकर फसल की बुवाई की थी, फसल नष्ट हो गई है। कर्ज चुकाना तो दूर रबी की फसल की तैयारी तक मुश्किल है। राजाराम
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लगातार चार वर्षों से आपदाओं का प्रकोप फसलों को नष्ट कर रहा है। अब आर्थिक रूप से टूट चुके हैं। क्लेम मिले तो रबी की फसल की बुवाई कर सकेंगे। विंद्रावन
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उड़द की फसल की बुवाई अच्छे उत्पादन की उम्मीद लगाकर की थी, लेकिन उत्पादन तो दूर लागत तक नहीं निकली है। विनोद कुमार राय
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बैंक, साहूकारों से पहले की कर्ज ले चुके हैं अब कहीं से कर्ज मिलने की उम्मीद नहीं है। रबी फसल करने की चिंता सता रही है। भल्ले कुशवाहा
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रबी में दलहनी फसलों की बुवाई 20 से 30 अक्टूबर और गेहूं व अन्य अनाज की बुवाई 15 से 30 नवंबर तक होती है। डॉ. नितिन कुमार, कृषि वैज्ञानिक
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जनपद में किसानों पर कुदरत लगातार अपना कहर बरपा रहा है। एक तो आपदाओं का प्रकोप फसलों कको बर्बाद कर रहा है वहीं दूसरी ओर आपदाओं से राहत देने के लिए बनी योजनाओं के धरातल पर न आने से किसान लगातार बर्बादी की कगार पर आ गया है। साल दर साल कर्ज से डूबते जा रहे हैं।
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किसानों के पास खेती ही एक मात्र आय का साधन है। कर्ज से उबरने की उम्मीद लेकर खेती कर रहे हैं, लेकिन लगातार आपदाओं के प्रकोप से बीते चार वर्षों से खरीफ फसल नष्ट हो रही है। वहीं योजनाएं भी धरातल पर नहीं उतर रहीं। प्रतिवर्ष बीमा क्लेम से हजारों किसान वंचित होते जा रहे हैं। ऐसे में किसान पूरी तरह से टूट चुका है। इस वर्ष किसानों ने खरीफ फसल की बुवाई की, लेकिन अगस्त व सितंबर माह की बारिश ने पूरी तरह से फसलों को बर्बाद कर दिया है। इससे किसानों की लागत तो दूर बीज तक नहीं निकला है। अब किसानों को कर्ज चुकाना तो दूर परिवार का पालन पोषण करना तक मुश्किल हो रहा है।
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किसान इस फसल के नष्ट होने के दर्द से उबरे नहीं थे कि अब रबी फसल की तैयारियों की चिंता सताने लगी है। एक तो बैंक व साहूकारों के कर्ज नहीं चुका पाए हैं। अब रबी फसल की तैयारियों का समय नजदीक आ रहा है और किसानों को कहीं से भी पैसे मिलने की उम्मीद नहीं है। अब उन्हें समय पर फसल बीमा क्लेम व आपदा राहत की राशि मिलने की आस लगाए हैं। समय पर क्लेम व आपदा राहत राशि का भुगतान नहीं हुआ तो रबी की बुवाई करना मुश्किल हो जाएगा। यह सबसे बड़ा आर्थिक संकट सता रहा है।
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यह है रबी की बुवाई का सीजन
रबी की फसल में चना व मटर की फसल की बुवाई का सीजन 20 से 30 अक्तूबर तक होता है। वहीं गेहूं व अन्य अनाजों की बुवाई 15 से 30 नवंबर तक होती है। इससे पहले किसानों को खेतों की सफाई, जुताई, पलेवा और खाद, बीज का इंतजाम करना होता है।
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बैंक व साहूकार दोनों से कर्ज लेकर फसल की बुवाई की थी, फसल नष्ट हो गई है। कर्ज चुकाना तो दूर रबी की फसल की तैयारी तक मुश्किल है। राजाराम
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लगातार चार वर्षों से आपदाओं का प्रकोप फसलों को नष्ट कर रहा है। अब आर्थिक रूप से टूट चुके हैं। क्लेम मिले तो रबी की फसल की बुवाई कर सकेंगे। विंद्रावन
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उड़द की फसल की बुवाई अच्छे उत्पादन की उम्मीद लगाकर की थी, लेकिन उत्पादन तो दूर लागत तक नहीं निकली है। विनोद कुमार राय
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बैंक, साहूकारों से पहले की कर्ज ले चुके हैं अब कहीं से कर्ज मिलने की उम्मीद नहीं है। रबी फसल करने की चिंता सता रही है। भल्ले कुशवाहा
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रबी में दलहनी फसलों की बुवाई 20 से 30 अक्टूबर और गेहूं व अन्य अनाज की बुवाई 15 से 30 नवंबर तक होती है। डॉ. नितिन कुमार, कृषि वैज्ञानिक