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परिवार न्यायालय भी हुआ ऑनलाइन
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 21 Jan 2017 12:28 AM IST
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- फोटो : demo
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जनपद न्यायालय में संचालित परिवार न्यायालय भी अब ऑनलाइन हो गया है। वादों की स्थिति देखने के लिए ecourts.gov.in वेबसाइट जारी की गई है।
जनपद न्यायालय में सिविल, आपराधिक व घरेलू प्रकरणों से संबंधित नौ न्यायालयों का संचालन हो रहा है। इनमें जिला और सत्र न्यायालय, अपर जिला और सत्र न्यायालय डकैती, अपर जिला एवं सत्र न्यायालय फास्ट ट्रैक कोर्ट, अपर जिला एवं सत्र न्यायालय फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय, सिविल जज सीनियर डिवीजन, सिविल जज जूनियर डिवीजन व विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय हाईकोर्ट के आदेश पर पहले से ही ऑनलाइन कर दिए गए हैं। इसके लिए वेबसाइट जारी की गई है। वेबसाइट के माध्यम से इस न्यायालय में चल रहीं तारीखों व वादों की स्थिति का अवलोकन अब आसान हो गया है।
परिवार न्यायालय में भरण पोषण वाद, हिंदू मैरिज एक्ट, तलाक के वाद, शादी से संबंधित सिविल प्रकृति के वाद, हिंदू उत्तराधिकारी अधिनियम आदि प्रकृति के वादों के मुकदमों को दायर किया जाता है और न्यायालय द्वारा मुकदमों की स्वीकृति के बाद वादों पर सुनवाई के बाद दोनों पक्षों द्वारा अधिवक्ताओं के माध्यम से पेश की जाने वाली दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर वादों में निर्णय दिया जाता है। अधिवक्ताओं द्वारा काफी समय से परिवार न्यायालय को भी ऑनलाइन किए जाने की मांग की जा रही थी। इससे अब वादकारियों के साथ अधिवक्ताओं को भी लाभ होगा।
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जनपद न्यायालय में सिविल, आपराधिक व घरेलू प्रकरणों से संबंधित नौ न्यायालयों का संचालन हो रहा है। इनमें जिला और सत्र न्यायालय, अपर जिला और सत्र न्यायालय डकैती, अपर जिला एवं सत्र न्यायालय फास्ट ट्रैक कोर्ट, अपर जिला एवं सत्र न्यायालय फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय, सिविल जज सीनियर डिवीजन, सिविल जज जूनियर डिवीजन व विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय हाईकोर्ट के आदेश पर पहले से ही ऑनलाइन कर दिए गए हैं। इसके लिए वेबसाइट जारी की गई है। वेबसाइट के माध्यम से इस न्यायालय में चल रहीं तारीखों व वादों की स्थिति का अवलोकन अब आसान हो गया है।
परिवार न्यायालय में भरण पोषण वाद, हिंदू मैरिज एक्ट, तलाक के वाद, शादी से संबंधित सिविल प्रकृति के वाद, हिंदू उत्तराधिकारी अधिनियम आदि प्रकृति के वादों के मुकदमों को दायर किया जाता है और न्यायालय द्वारा मुकदमों की स्वीकृति के बाद वादों पर सुनवाई के बाद दोनों पक्षों द्वारा अधिवक्ताओं के माध्यम से पेश की जाने वाली दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर वादों में निर्णय दिया जाता है। अधिवक्ताओं द्वारा काफी समय से परिवार न्यायालय को भी ऑनलाइन किए जाने की मांग की जा रही थी। इससे अब वादकारियों के साथ अधिवक्ताओं को भी लाभ होगा।
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