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Lalitpur News: मशहूर मेलों को भी सरकार से नहीं मिलती फूटी कौड़ी

Wed, 22 Jan 2025 12:36 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 22 Jan 2025 12:36 AM IST
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Even famous fairs do not get a penny from the government
अमर उजाला ब्यूरो
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ललितपुर। करीब 14 स्थानों पर लगने वाले ऐतिहासिक मेलों के लिए संस्कृति विभाग से अब तक फूटी कौड़ी नहीं मिली है। मेला समितियां निजी संसाधनों से आयोजन करा रही हैं। स्थानीय स्तर पर प्रयास न करने के कारण विख्यात मेले अब अपना अस्तित्व खोते नजर आ रहे हैं। वर्तमान में एक दो मेलों को छोड़ दें तो सभी मेले स्थानीय स्तर पर सीमित रह गए हैं।
राखपंचमपुर व रणछोड़ मेला को छोड़ अन्य सभी मेले स्थानीय स्तर तक सिमट गए हैं। पूर्व में जिला पंचायत व ग्राम पंचायतें इन मेलों का संचालन करती थीं। अब ऐसा नहीं हो रहा है। यही कारण है कि मेले अपनी चमक खोते जा रहे हैं।
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उधर, पाली का नील कंठेश्वर धाम पर मकर संक्रांति व गुरु पूर्णिमा पर विशाल मेले का आयोजन होता रहा है, जिसमें जनपद में अलावा अन्य जिलों के लोग एवं व्यापारी आते थे। लेकिन, वर्तमान में यह मेला स्थानीय स्तर तक रह गया है। यहां प्राचीन 6वीं शताब्दी की मूर्ति है। इस मेले से आसपास होने वाली पान की खेती का भी व्यापार होता रहा है। मेला समाप्त होने से व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ा है। राखपंचमपुर मेले में देखने को मिलते था हाथ की कारीगरी का बेजोड़ नमूना : राखपंचमपुर मेले में मिट्टी के बर्तन के माध्यम से हस्तकला का बेजोड़ नमूना दिखाई देता था। इस मेले की भव्यता तो बढ़ाई गई, लेकिन यहां के मिट्टी के बर्तन का कारोबार का प्रचार न होने से यह समाप्ति की ओर आ गया है। इससे धर्म और परंपरा प्रेमियों में उदासी है। ी
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