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जर्जर भवनों में संचालित हो रहे अंग्रेजी माध्यम स्कूल

Fri, 29 Nov 2019 12:48 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 29 Nov 2019 12:48 AM IST
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English mediam school going on damage building in lalitpur
ललितपुर। बेसिक शिक्षा विभाग के कई अंग्रेजी माध्यम स्कूल संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं। इससे विद्यालयों में पठन-पाठन कार्य में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है। ऐसा ही एक स्कूल विकासखंड बार में संचालित है। इसके रसोईघर का छज्जा बरसात के दौरान क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके भवन की छत भी बरसात में रिसती है। इस तरह के हालात अन्य ब्लाकों में भी हैं।
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बेसिक शिक्षा विभाग ने हिंदी के साथ चिह्नित स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम से जूनियर स्तर की शिक्षा देना आरंभ कर दिया है। जिस समय अंग्रेजी माध्यम स्कूलों का चयन हो रहा था, उस दौरान संसाधनों से लैस विद्यालयों को सूचीबद्ध करना था। लेकिन, इसके बाद भी मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहे कई स्कूलों का चयन कर लिया गया। इनमें से एक ब्लॉक बार का प्राथमिक विद्यालय ग्राम गुगरवारा है। यहां के प्रधानाध्यापक हेमंत तिवारी ने डीएम को विद्यालय में भौतिक संसाधनों की उपलब्धता नहीं होने के संबंध में ज्ञापन दिया है। उन्होंने 30 नवंबर तक समुचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। विद्यालय में 260 से अधिक बच्चों का नामांकन है और वर्ष 1965 के निर्मित भवन में संचालित हो रहा है। इसमें कम रोशनी और कम क्षेत्रफल की समस्या है। कक्षों की हालत देखते ही बनती है। बरसात के मौसम में बच्चों को बैठना मुश्किल हो जाता है, क्योंकि छत से पानी रिसने लगता है। विद्यालय परिसर का अभाव होने से खेल गतिविधियां नहीं हो पाती हैं। ग्राम प्रधान ने अपने स्तर से नवीन भूमि चयनित कर विद्यालय को नए स्थल पर बनवाने के लिए सहमति प्रदान कर दी है। जिला पंचायत सदस्य खिलान सिंह यादव सहित कई ग्रामवासी भी डीएम को प्रार्थना पत्र दे चुके हैं। वहीं, श्रम और सेवायोजन राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ भी विद्यालय के नए निर्माण हेतु धनराशि अवमुक्त कराने का आश्वासन दे चुके हैं।
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मड़ावरा क्षेत्र मेें चयनित अंग्रेजी माध्यम के कई स्कूलों में न तो पर्याप्त स्टाफ है और न भवन। इनमें से एक प्राथमिक विद्यालय बछरई है। बिरधा के कई स्कूलों में भी अंग्रेजी माध्यम में शिक्षण करने वाले शिक्षक की कमी है, जिससे शासन की मंशा पूरी नहीं हो पा रही है।
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वर्ष 2005 के बाद स्कूल भवनों का निर्माण शिक्षा विभाग द्वारा कराए गए हैं। इनमें शिक्षकों को प्रभारी बनाकर कार्य कराया जाता था। यदि स्कूल भवन व रसोईघर का निर्माण पुराना है तो उसकी मरम्मत कराई जाएगी। यदि कुछ सालों पहले का निर्माण है तो उसकी जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसकी वास्तविक रिपोर्ट पंचायत सचिव से लेंगे। - श्रवण कुमार सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी
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