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सूखा की जानवराें पर भी मार, भूख से बेहाल
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 16 May 2016 01:02 AM IST
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aavara animal, lalitpur news
- फोटो : amar ujala
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पाली (ललितपुर)। सूखे के कारण संपूर्ण बुंदेलखंड में त्राहि-त्राहि मची है। आम आदमी से लेकर जानवर भी पेट भी भूख मिटाने को परेशान है। गरीब तबके के किसान खुद अपना भरण-पोषण ठीक से नहीं कर पा रहे है। ऐसे में जानवरों का पेट भरने की समस्या से निपटने के लिए उन्होंने जानवरों को खुले में छोड़ दिया है।
बताते चले के बुंदेलखंड में सूखे की वजह से भयावह हालात है। क्षेत्र में बड़े किसानों के फसलों में ही कुुछ हद तक भूसा निकला है। क्षेत्र के ज्यादातर किसानों ने हार्वेस्टर मशीन चलवाकर जो थोड़ा-बहुत गेहूं मिला है, उसको कीमती दौलत की तरह सहेज कर रख लिया है। भूसे के नाम पर किसानों के पास खेतों में पड़े डंठल ही बचे है। अगर इंद्र देव जल्द ही मेहरबान नहीं हुए तो जानवरों के लिए चारा उपलब्ध कराना बड़ा संकट उत्पन्न हो जाएगा।
वहीं, ग्राम पंचायतों में कई जानवरों के लिए चारा उगाने की जमीन उपलब्ध है। लेकिन कई जगह जमीन खाली पड़ी है, तो कई जगहों पर दूसरों का कब्जा है। अगर गौचर जमीन को कब्जा मुक्त कर उस पर जानवरों के लिए घास आदि का उत्पादन कर जानवरों के लिए भूसे के संकट को काफी हद तक खत्म किया जा सकता है।
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संख्याबल अनुपात में नहीं होता दुग्ध उत्पादन
पाली। बुंदेलखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश लोगों के पास जानवर है। दुधारु पशुओं में गाय व भैंसों की संख्या काफी है। इसके बावजूद दुग्ध उत्पादन के नाम पर काफी कम उत्पादन हैं। यहां लोग दूध से ज्यादा गोबर के उपलों पर निर्भर रहते हैं, ताकि घर का चूल्हा जल सके।
भटटों में खप रहा भूसा
पाली। क्षेत्र में जगह-जगह ईंट बनाने के बड़े- बड़े भट्टे लगे हैं। मिटटी को मिलाने में पानी तो लग ही रहा है, साथ ही ईंट को पकाने में बड़ी मात्रा में भूसे का भी प्रयोग किया जा रहा है। वहीं, दाम ज्यादा मिलने के कारण लोग भूसा को सीमा पार मध्य प्रदेश भी ले जा रहे है।
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बताते चले के बुंदेलखंड में सूखे की वजह से भयावह हालात है। क्षेत्र में बड़े किसानों के फसलों में ही कुुछ हद तक भूसा निकला है। क्षेत्र के ज्यादातर किसानों ने हार्वेस्टर मशीन चलवाकर जो थोड़ा-बहुत गेहूं मिला है, उसको कीमती दौलत की तरह सहेज कर रख लिया है। भूसे के नाम पर किसानों के पास खेतों में पड़े डंठल ही बचे है। अगर इंद्र देव जल्द ही मेहरबान नहीं हुए तो जानवरों के लिए चारा उपलब्ध कराना बड़ा संकट उत्पन्न हो जाएगा।
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वहीं, ग्राम पंचायतों में कई जानवरों के लिए चारा उगाने की जमीन उपलब्ध है। लेकिन कई जगह जमीन खाली पड़ी है, तो कई जगहों पर दूसरों का कब्जा है। अगर गौचर जमीन को कब्जा मुक्त कर उस पर जानवरों के लिए घास आदि का उत्पादन कर जानवरों के लिए भूसे के संकट को काफी हद तक खत्म किया जा सकता है।
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संख्याबल अनुपात में नहीं होता दुग्ध उत्पादन
पाली। बुंदेलखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश लोगों के पास जानवर है। दुधारु पशुओं में गाय व भैंसों की संख्या काफी है। इसके बावजूद दुग्ध उत्पादन के नाम पर काफी कम उत्पादन हैं। यहां लोग दूध से ज्यादा गोबर के उपलों पर निर्भर रहते हैं, ताकि घर का चूल्हा जल सके।
भटटों में खप रहा भूसा
पाली। क्षेत्र में जगह-जगह ईंट बनाने के बड़े- बड़े भट्टे लगे हैं। मिटटी को मिलाने में पानी तो लग ही रहा है, साथ ही ईंट को पकाने में बड़ी मात्रा में भूसे का भी प्रयोग किया जा रहा है। वहीं, दाम ज्यादा मिलने के कारण लोग भूसा को सीमा पार मध्य प्रदेश भी ले जा रहे है।