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जिले में पैथोलॉजिस्ट एक पैथोलॉजी लैब अनेक
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ललितपुर। जनपद में पैथोलॉजिस्ट एक और पैथोलॉजी अनेक हैं। इतना ही नहीं एक भी रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। इसके बाद भी छह एक्सरे सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। इससे शहर में मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
पैथोलॉजी लैब को संचालित करने के लिए पैथोलॉजिस्ट की आवश्यकता होती है। पैथोलॉजी पंजीयन में लैब टैक्नीशियन को पैथोलॉजिस्ट का शपथ पत्र लगाना होता है। पैथोलॉजिस्ट चिकित्सक द्वारा शपथ पत्र में बताया जाता है कि यह पैथोलॉजी मेरे संरक्षण में चल रही है। मैं इस पैथोलॉजी के लैब टेक्नीशियन को भली-भांति जानता हूं। इसके बाद ही स्वास्थ्य विभाग आवेदन स्वीकार करता है। बाद में कमेटी द्वारा जांच की जाती है। जांच में मानक अनुरूप पाए जाने पर पैथोलॉजी लैब संचालित होने की स्वीकृति दी जाती है। स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है।
लेकिन, जिले में तमाम नियमों को ताक पर रखकर पैथोलॉजी लैबों का संचालन किया जा रहा है। स्थिति यह है कि जिले में केवल एक ही पैथोलॉजिस्ट चिकित्सक हैं। लेकिन, पैथोलॉजी अनेक हैं। विभागीय दस्तावेजों में तीस से अधिक पैथोलॉजी लैब दर्ज हैं। इसके अलावा भी शहर से लेकर गांव तक पैथोलॉजी खुलेआम चल रहीं हैं। लैबों का जाल सा फैल गया है। इतना ही नहीं इन लैबों में अप्रशिक्षितों द्वारा बीमार लोगों की जांच की जा रहीं है, जो जांच रिपोर्ट को गलत दे रहे हैं। ऐसे में कई मरीजों की बीमारी का कारण स्पष्ट नहीं हो पा रहा है और मर्ज सुधरने की जगह और बिगड़ गया। कई निर्धन लोग पैसों के अभाव में उपचार भी नहीं करा पाते हैं और कई ऐसे हैं जो गलत इलाज के कारण असमय मौत के शिकार हो जाते हैं।
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निरीक्षणों पर उठते सवाल
स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय-समय पर पैथोलॉजी लैब व एक्सरे सेंटर, क्लीनिक, नर्सिंग होम व अन्य निजी स्वास्थ्य इकाइयों के निरीक्षण को एक टीम बनाई गई है। जो संबंधित इकाइयों पर मानकों की जांच करतीं है। कागजों में यह टीमें भले ही जांच कर रहीं हों, लेकिन धरातल पर असर नजर नहीं आ रहा है। इसका ताजा उदाहरण जिले में चल रहीं पैथोलॉजी हैं।
एक्सरें सेंटरों की हालत खराब
जनपद में रेडियोलॉजिस्ट की कमी है। इससे मरीजों को एक्सरे कराने के बाद केवल फिल्म ही पकड़ा दी जा रही है। फिल्म से केवल पुरानी पद्घति से ही इलाज मुहैया हो पा रहा है। इसका कारण फिल्म तो मिल रही, लेकिन रिपोर्ट नहीं मिल पा रही है। इससे फिल्म के सहारे ही उपचार मुहैया हो रहा है। कई सेंटर तो ऐसे हैं, जहां पर केवल अप्रशिक्षित व्यक्तियों द्वारा एक्सरे हो रहे हैं। जनपद में केवल छह एक्सरे सेंटर विभागीय कागजों में दर्ज हैं। विभागीय निरीक्षणों के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हो पा रहा है।
वर्तमान में पुराने पंजीयनों के सहारे लैब व एक्सरे सेंटर चल रहे हैं। नए पंजीयन के दौरान जांच कर मानक अनुरुप पंजीयन किए जाएंगे।
- डॉ. राजेेश भारती, नोडल अधिकारी
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पैथोलॉजी लैब को संचालित करने के लिए पैथोलॉजिस्ट की आवश्यकता होती है। पैथोलॉजी पंजीयन में लैब टैक्नीशियन को पैथोलॉजिस्ट का शपथ पत्र लगाना होता है। पैथोलॉजिस्ट चिकित्सक द्वारा शपथ पत्र में बताया जाता है कि यह पैथोलॉजी मेरे संरक्षण में चल रही है। मैं इस पैथोलॉजी के लैब टेक्नीशियन को भली-भांति जानता हूं। इसके बाद ही स्वास्थ्य विभाग आवेदन स्वीकार करता है। बाद में कमेटी द्वारा जांच की जाती है। जांच में मानक अनुरूप पाए जाने पर पैथोलॉजी लैब संचालित होने की स्वीकृति दी जाती है। स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है।
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लेकिन, जिले में तमाम नियमों को ताक पर रखकर पैथोलॉजी लैबों का संचालन किया जा रहा है। स्थिति यह है कि जिले में केवल एक ही पैथोलॉजिस्ट चिकित्सक हैं। लेकिन, पैथोलॉजी अनेक हैं। विभागीय दस्तावेजों में तीस से अधिक पैथोलॉजी लैब दर्ज हैं। इसके अलावा भी शहर से लेकर गांव तक पैथोलॉजी खुलेआम चल रहीं हैं। लैबों का जाल सा फैल गया है। इतना ही नहीं इन लैबों में अप्रशिक्षितों द्वारा बीमार लोगों की जांच की जा रहीं है, जो जांच रिपोर्ट को गलत दे रहे हैं। ऐसे में कई मरीजों की बीमारी का कारण स्पष्ट नहीं हो पा रहा है और मर्ज सुधरने की जगह और बिगड़ गया। कई निर्धन लोग पैसों के अभाव में उपचार भी नहीं करा पाते हैं और कई ऐसे हैं जो गलत इलाज के कारण असमय मौत के शिकार हो जाते हैं।
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निरीक्षणों पर उठते सवाल
स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय-समय पर पैथोलॉजी लैब व एक्सरे सेंटर, क्लीनिक, नर्सिंग होम व अन्य निजी स्वास्थ्य इकाइयों के निरीक्षण को एक टीम बनाई गई है। जो संबंधित इकाइयों पर मानकों की जांच करतीं है। कागजों में यह टीमें भले ही जांच कर रहीं हों, लेकिन धरातल पर असर नजर नहीं आ रहा है। इसका ताजा उदाहरण जिले में चल रहीं पैथोलॉजी हैं।
एक्सरें सेंटरों की हालत खराब
जनपद में रेडियोलॉजिस्ट की कमी है। इससे मरीजों को एक्सरे कराने के बाद केवल फिल्म ही पकड़ा दी जा रही है। फिल्म से केवल पुरानी पद्घति से ही इलाज मुहैया हो पा रहा है। इसका कारण फिल्म तो मिल रही, लेकिन रिपोर्ट नहीं मिल पा रही है। इससे फिल्म के सहारे ही उपचार मुहैया हो रहा है। कई सेंटर तो ऐसे हैं, जहां पर केवल अप्रशिक्षित व्यक्तियों द्वारा एक्सरे हो रहे हैं। जनपद में केवल छह एक्सरे सेंटर विभागीय कागजों में दर्ज हैं। विभागीय निरीक्षणों के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हो पा रहा है।
वर्तमान में पुराने पंजीयनों के सहारे लैब व एक्सरे सेंटर चल रहे हैं। नए पंजीयन के दौरान जांच कर मानक अनुरुप पंजीयन किए जाएंगे।
- डॉ. राजेेश भारती, नोडल अधिकारी