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Lalitpur News: दिव्यांग को आवास मिला न पेंशन
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जखौरा में नौहरकलां के दिव्यांग को न आवास मिल रहा न ही नौ माह से पेंशन। मदद के नाम पर तीन वर्ष पूर्व एक ट्राई साइकिल मिली थी, जिसके सहारे वह योजना का लाभ पाने के लिए दफ्तरों का चक्कर काट रहा है।
गरीबों को छत देने के लिए योजनाएं चल रही हैं, जिसमें दिव्यांगों को प्राथमिकता देने के निर्देश हैं। लेकिन, नौहरकलां के दिनेश साहू इस योजना से वंचित हैं। यहां के छक्कीलाल के तीन पुत्र मुकेश, सुरेंद्र व दिनेश हैं। मुकेश व सुरेंद्र की शादी हो गई और वह अपने परिवार के साथ अलग रहने लगे। छोटा पुत्र दिनेश साहू दिव्यांग है और उसकी देखरेख उसके वृद्ध पिता छक्कीलाल व मां करती हैं।
दिनेश ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग से उसका दिव्यांग कार्ड बना है। आठ वर्ष पूर्व 2016 में आवास योजना की पात्रता सूची में उसका नाम था, लेकिन आवास नहीं मिला। समाधान दिवस सहित हर अधिकारी के दरवाजे पर आवास के लिए गुहार लगा चुका है। लेकिन, उसे आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला। वह खस्ताहाल कच्चे घर में जीवन गुजारने को मजबूर है। उसे दिव्यांग पेंशन तो मिलती थी, लेकिन नौ माह से वह भी नहीं आ रही है।
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ललितपुर। जखौरा में नौहरकलां के दिव्यांग को न आवास मिल रहा न ही नौ माह से पेंशन। मदद के नाम पर तीन वर्ष पूर्व एक ट्राई साइकिल मिली थी, जिसके सहारे वह योजना का लाभ पाने के लिए दफ्तरों का चक्कर काट रहा है।
गरीबों को छत देने के लिए योजनाएं चल रही हैं, जिसमें दिव्यांगों को प्राथमिकता देने के निर्देश हैं। लेकिन, नौहरकलां के दिनेश साहू इस योजना से वंचित हैं। यहां के छक्कीलाल के तीन पुत्र मुकेश, सुरेंद्र व दिनेश हैं। मुकेश व सुरेंद्र की शादी हो गई और वह अपने परिवार के साथ अलग रहने लगे। छोटा पुत्र दिनेश साहू दिव्यांग है और उसकी देखरेख उसके वृद्ध पिता छक्कीलाल व मां करती हैं।
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दिनेश ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग से उसका दिव्यांग कार्ड बना है। आठ वर्ष पूर्व 2016 में आवास योजना की पात्रता सूची में उसका नाम था, लेकिन आवास नहीं मिला। समाधान दिवस सहित हर अधिकारी के दरवाजे पर आवास के लिए गुहार लगा चुका है। लेकिन, उसे आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला। वह खस्ताहाल कच्चे घर में जीवन गुजारने को मजबूर है। उसे दिव्यांग पेंशन तो मिलती थी, लेकिन नौ माह से वह भी नहीं आ रही है।
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