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रोजाना तीन लाख रुपया खर्च, फिर भी गंदगी
lalitpur
Updated Sun, 15 Jan 2017 01:09 AM IST
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गंदगी
- फोटो : amar ujala
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नगर पालिका परिषद द्वारा रोजाना तीन लाख रुपये से अधिक खर्च किए जाने के बाद भी शहर की सफाई व्यवस्था बेहाल नजर आ रही है। विभिन्न मुहल्लों, गलियों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। वहीं, नाले-नालियां भी बजबजा रही हैं। इससे नगर को साफ सुथरा बनाने की मंशा पर पानी फिरता दिख रहा है।
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार शहर की कुल आबादी 1.33 लाख हैं। शहर कुल 26 वार्डों में बसा हुआ है। बीते इन पांच वर्षों में शहर की आबादी तो बड़ी है, लेकिन शहर का क्षेत्र आज भी उतना ही है। आबादी बढ़ने के साथ मुहल्लों में खाली प्लाटों की संख्या में भी कमी आई है। नगर पालिका परिषद ने सफाई के लिए लाखों रुपये के संसाधन जुटा लिए हैं। यही नहीं, प्रतिदिन तीन लाख रुपये से ज्यादा सफाई पर व्यय किया जा रहा है। नगर पालिका के खाते में हर माह राज्य वित्त आयोग के कोष से 1.49 करोड़ रुपये आते हैं, जिसमें से नगर पालिका करीब 80-85 लाख रुपये शहर की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के उद्देश्य से खर्च करती है। शहर में सफाई करने के लिए कुल 456 सफाई कर्मचारी नियुक्त हैं, जिनमें 83 स्थाई हैं जिनके वेतन पर हर माह करीब 18 लाख रुपये व्यय होते हैं। 222 संविदा कर्मचारी नियुक्त हैं, जिनके वेतन पर हर माह करीब 38 लाख रुपये से अधिक धनराशि व्यय होती है। इसके अलावा आउट सोर्सिंग के माध्यम से करीब 150 सफाई कर्मचारी नियुक्त हैं, जिनके वेतन पर हर माह विभाग करीब 12 लाख रुपये व्यय करता है। इस हिसाब से नगर पालिका हर माह करीब 70 लाख रुपये तो केवल सफाई व्यवस्था में नियुक्त कर्मचारियों व कर्मियों के वेतन में ही खर्च कर देती है। इसके अलावा नगर पालिका हर माह करीब दस लाख रुपये शहर में सफाई के लिए लगे वाहनों में डीजल/पेट्रोल और वाहनों के मेंटीनेंस पर खर्च कर देती है। वहीं चूना, झाड़ू, लोहा गाड़ी, डालियों व अन्य उपकरणों की खरीदी पर एक वर्ष में 20 लाख रुपये से अधिक व्यय कर दिया जाता है।
वहीं, नगर पालिका हर वर्ष शहर की सफाई व्यवस्था के नाम पर करीब एक करोड़ रुपये की लागत से नये वाहन या अन्य साधनों की खरीदी कर लेती है। इन सब को मिलकर शहर की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए नगर पालिका हर रोज तीन लाख रुपये की धनराशि व्यय कर रही है। इतनी बड़ी धनराशि व्यय होने और तमाम संसाधन उपलब्ध होने के बाद भी शहर की सफाई व्यवस्था बुरी तरह से चरमराई हुई है। मुख्य मार्गों को छोड़कर शहर के मुहल्लों व गलियों-कूचों की बात करें तो लगभग हर वार्ड के मुहल्लों में स्थित खाली प्लांट व मैदान गंदगी व कूड़े से भरे हुए हैं। सफाई कर्मचारियों द्वारा स्वयं ही इन खाली जगहों पर आस-पास का कचरा एकत्रित करके डाल दिया जाता है। कूड़े का नियमित उठान नहीं होने के कारण स्थानीय लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है और कर्मचारी भी वाहनों में डीजल का फर्जी व्यय बताकर विभाग को चूना लगा रहे हैं।
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मुहल्ला खिरकापुरा, विष्णुपुरा, रामनगर, बड़ापुरा, पठापुरा, हरीदीला, पिसनारी बाग, घुसयाना, बस स्टैंड, पुराना बस स्टैंड मैदान, फूटा बंगला, चर्ज के पीछे, अभिलाषा पेट्रोल पंप के पीछे, नवीर सदर तहसील मार्ग पर, सिद्वनपुरा मार्ग पर, नेहरु नगर के समस्त मुहल्लों, जुगपुरा, गांधीनगर, नई बस्ती, लेड़ियापुरा, करीम नगर, राजपूत कालोनी, आजादपुर प्रथम, द्वितीय व तृतीय तीनों ही, वसुंधरा कालोनी, चंदमारी, बयाना नाले के पास, शहजाद नदी के पास, नदीपुरा, गोविंद नगर, चौकाबाग, रावतयाना, चौबयाना व अन्य मुहल्लों में स्थित लगभग समस्त खाली पड़े मैदानों व प्लाटों में गंदगी के अंबार लगे हुए हैं। इसके अलावा शहर में स्थित आधा आवासीय कालोनियों और श्मशान घाटों के आस-पास की स्थिति भी काफी बेकार है। वहीं उक्त मुहल्लों में फेले कचरे के कारण स्थानीय नाले-नालियां भी गंदगी से बजबजा रही है। नगर पालिका में शहर की सफाई व्यवस्था पर निगरानी रखने के लिए 06 स्थाई स्वास्थ्य नायक और दो मुख्य सफाई निरीक्षक भी नियुक्त है। इसके बावजूद भी सफाई व्यवस्था बेहाल है, जनता को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
व्यवस्थाएं सुधारने के लिए मिला मौका
विगत चार जनवरी स्वच्छ सर्वेक्षण 2017 का सर्वेक्षण कार्य शुरू हो गया है, जो आगामी 4 फरवरी तक यानी एक माह तक चलेगा। इस सर्वेक्षण के तहत नगरीय निकाय क्षेत्र की सफाई व्यवस्था, सफाई के संसाधन और योजनाओं और जनसुविधाओं के आंकलन पर मूल्यांकन किया जाना है, लेकिन वर्तमान में उक्त मूल्यांकन बिंदुओं के अनुसार शहर के हालात बदतर है। शहर के हालात सुधारने और शहर पर गंदे शहर का दाग लगने से बचाने के लिए नगर पालिका को अतिरिक्त मौका मिल गया है, क्योंकि शहर में सर्वेक्षण की तिथि सबसे अंतिम चरण में 2 से 4 फरवरी तक निर्धारित की गई है। अभी भी नगर पालिका के पास शहर के सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने और अन्य तैयारियों के लिए दो सप्ताह का समय शेष है।
लापरवाही करने वालों पर होगी कार्रवाई
इस संबंध में नगर पालिका अध्यक्ष सुभाष जायसवाल का कहना है कि शहर में फैली गंदगी के कारण जनता को होने वाली समस्या के निस्तारण के लिए जल्द ही अधिशासी अधिकारी के साथ क्षेत्र में निरीक्षण करेंगे। यदि किसी मुहल्ले या क्षेत्र में गंदगी फैली पाई जाती है, तो लापरवाही बरतने वाले सफाई कर्मचारी, स्वास्थ्य नायक और सफाई निरीक्षक सभी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
सुभाष जायसवाल
अध्यक्ष, नगर पालिका ललितपुर।
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वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार शहर की कुल आबादी 1.33 लाख हैं। शहर कुल 26 वार्डों में बसा हुआ है। बीते इन पांच वर्षों में शहर की आबादी तो बड़ी है, लेकिन शहर का क्षेत्र आज भी उतना ही है। आबादी बढ़ने के साथ मुहल्लों में खाली प्लाटों की संख्या में भी कमी आई है। नगर पालिका परिषद ने सफाई के लिए लाखों रुपये के संसाधन जुटा लिए हैं। यही नहीं, प्रतिदिन तीन लाख रुपये से ज्यादा सफाई पर व्यय किया जा रहा है। नगर पालिका के खाते में हर माह राज्य वित्त आयोग के कोष से 1.49 करोड़ रुपये आते हैं, जिसमें से नगर पालिका करीब 80-85 लाख रुपये शहर की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के उद्देश्य से खर्च करती है। शहर में सफाई करने के लिए कुल 456 सफाई कर्मचारी नियुक्त हैं, जिनमें 83 स्थाई हैं जिनके वेतन पर हर माह करीब 18 लाख रुपये व्यय होते हैं। 222 संविदा कर्मचारी नियुक्त हैं, जिनके वेतन पर हर माह करीब 38 लाख रुपये से अधिक धनराशि व्यय होती है। इसके अलावा आउट सोर्सिंग के माध्यम से करीब 150 सफाई कर्मचारी नियुक्त हैं, जिनके वेतन पर हर माह विभाग करीब 12 लाख रुपये व्यय करता है। इस हिसाब से नगर पालिका हर माह करीब 70 लाख रुपये तो केवल सफाई व्यवस्था में नियुक्त कर्मचारियों व कर्मियों के वेतन में ही खर्च कर देती है। इसके अलावा नगर पालिका हर माह करीब दस लाख रुपये शहर में सफाई के लिए लगे वाहनों में डीजल/पेट्रोल और वाहनों के मेंटीनेंस पर खर्च कर देती है। वहीं चूना, झाड़ू, लोहा गाड़ी, डालियों व अन्य उपकरणों की खरीदी पर एक वर्ष में 20 लाख रुपये से अधिक व्यय कर दिया जाता है।
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वहीं, नगर पालिका हर वर्ष शहर की सफाई व्यवस्था के नाम पर करीब एक करोड़ रुपये की लागत से नये वाहन या अन्य साधनों की खरीदी कर लेती है। इन सब को मिलकर शहर की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए नगर पालिका हर रोज तीन लाख रुपये की धनराशि व्यय कर रही है। इतनी बड़ी धनराशि व्यय होने और तमाम संसाधन उपलब्ध होने के बाद भी शहर की सफाई व्यवस्था बुरी तरह से चरमराई हुई है। मुख्य मार्गों को छोड़कर शहर के मुहल्लों व गलियों-कूचों की बात करें तो लगभग हर वार्ड के मुहल्लों में स्थित खाली प्लांट व मैदान गंदगी व कूड़े से भरे हुए हैं। सफाई कर्मचारियों द्वारा स्वयं ही इन खाली जगहों पर आस-पास का कचरा एकत्रित करके डाल दिया जाता है। कूड़े का नियमित उठान नहीं होने के कारण स्थानीय लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है और कर्मचारी भी वाहनों में डीजल का फर्जी व्यय बताकर विभाग को चूना लगा रहे हैं।
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मुहल्ला खिरकापुरा, विष्णुपुरा, रामनगर, बड़ापुरा, पठापुरा, हरीदीला, पिसनारी बाग, घुसयाना, बस स्टैंड, पुराना बस स्टैंड मैदान, फूटा बंगला, चर्ज के पीछे, अभिलाषा पेट्रोल पंप के पीछे, नवीर सदर तहसील मार्ग पर, सिद्वनपुरा मार्ग पर, नेहरु नगर के समस्त मुहल्लों, जुगपुरा, गांधीनगर, नई बस्ती, लेड़ियापुरा, करीम नगर, राजपूत कालोनी, आजादपुर प्रथम, द्वितीय व तृतीय तीनों ही, वसुंधरा कालोनी, चंदमारी, बयाना नाले के पास, शहजाद नदी के पास, नदीपुरा, गोविंद नगर, चौकाबाग, रावतयाना, चौबयाना व अन्य मुहल्लों में स्थित लगभग समस्त खाली पड़े मैदानों व प्लाटों में गंदगी के अंबार लगे हुए हैं। इसके अलावा शहर में स्थित आधा आवासीय कालोनियों और श्मशान घाटों के आस-पास की स्थिति भी काफी बेकार है। वहीं उक्त मुहल्लों में फेले कचरे के कारण स्थानीय नाले-नालियां भी गंदगी से बजबजा रही है। नगर पालिका में शहर की सफाई व्यवस्था पर निगरानी रखने के लिए 06 स्थाई स्वास्थ्य नायक और दो मुख्य सफाई निरीक्षक भी नियुक्त है। इसके बावजूद भी सफाई व्यवस्था बेहाल है, जनता को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
व्यवस्थाएं सुधारने के लिए मिला मौका
विगत चार जनवरी स्वच्छ सर्वेक्षण 2017 का सर्वेक्षण कार्य शुरू हो गया है, जो आगामी 4 फरवरी तक यानी एक माह तक चलेगा। इस सर्वेक्षण के तहत नगरीय निकाय क्षेत्र की सफाई व्यवस्था, सफाई के संसाधन और योजनाओं और जनसुविधाओं के आंकलन पर मूल्यांकन किया जाना है, लेकिन वर्तमान में उक्त मूल्यांकन बिंदुओं के अनुसार शहर के हालात बदतर है। शहर के हालात सुधारने और शहर पर गंदे शहर का दाग लगने से बचाने के लिए नगर पालिका को अतिरिक्त मौका मिल गया है, क्योंकि शहर में सर्वेक्षण की तिथि सबसे अंतिम चरण में 2 से 4 फरवरी तक निर्धारित की गई है। अभी भी नगर पालिका के पास शहर के सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने और अन्य तैयारियों के लिए दो सप्ताह का समय शेष है।
लापरवाही करने वालों पर होगी कार्रवाई
इस संबंध में नगर पालिका अध्यक्ष सुभाष जायसवाल का कहना है कि शहर में फैली गंदगी के कारण जनता को होने वाली समस्या के निस्तारण के लिए जल्द ही अधिशासी अधिकारी के साथ क्षेत्र में निरीक्षण करेंगे। यदि किसी मुहल्ले या क्षेत्र में गंदगी फैली पाई जाती है, तो लापरवाही बरतने वाले सफाई कर्मचारी, स्वास्थ्य नायक और सफाई निरीक्षक सभी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
सुभाष जायसवाल
अध्यक्ष, नगर पालिका ललितपुर।