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Lalitpur News: श्रद्धालुओं ने बनाए 21 लाख पार्थिव शिवलिंग
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। चंडी मंदिर धाम में चल रहे सवा पांच करोड़ पार्थिव शिवलिंग निर्माण व श्रीरुद्रमहायज्ञ आयोजन में श्रद्धालुओं ने पहले सावन सोमवार को इक्कीस लाख पार्थिव शिवलिंग बनाए।
चंडी मंदिर परिसर में सोमवार को चंडीपीठाधीश्वर की उपस्थिति में श्रद्धालुओं ने ओम के जप के साथ 21 लाख पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया। इस धार्मिक अनुष्ठान में महिलाओं व बच्चों ने बढ़कर हिस्सा लिया। इसके बाद दोपहर में पार्थिव शिवलिंग का पूजन व महारूद्राभिषेक किया गया। पार्थिव शिवलिंग का पूजन व महारूद्राभिषेक यज्ञाचार्य पं. पवन शास्त्री ने कराया। पार्थिव शिवलिंग का पूजन मुख्य यजमान राजकुमारी हरिशंकर साहू, डाॅ. रानी श्रीवास्तव, डाॅ. अनूप श्रीवास्तव ने किया।
चंडीपीठाधीश्वराचार्य महामंडलेश्वर स्वामी चंद्रेश्वर गिरि महाराज ने कहा कि जो मनुष्य नित्य प्रतिदिन गीता का अनुश्रवण करता है, उसे कोई भी विकार छू नहीं सकता। गीता में जीवन का सार उपलब्ध है। ईश्वर की भक्ति किस प्रकार की जाती है, इसका विस्तृत वर्णन है। इसलिए मनुष्य को सदगुरूदेव के चरणों की सेवा करते हुए ईश्वर का ध्यान करते हुए गीता का अनुश्रवण करना चाहिए। ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग सदगुरू बताता है। ऐसे भगवत भजन को साधने के लिए सदगुरु के चरणों की सेवा ही एकमात्र साधन है। अपने शिष्य की चिंता का जो निवारण करते हैं, वे ही सच्चे सदगुरु हैं।
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उन्होंने कहा कि लौकिक मंत्र -तंत्र का उपदेश देने वाले तो कई गुरु होते हैं, लेकिन जो शिष्य को सद्वस्तु का ज्ञान देते हैं, वे ही सच्चे सदगुरु होते हैं। काया और माया से जो हमें मुक्त करा दे, इस विनाशी शरीर से जो हमें अविनाशी का बोध करा दे, बिंदु से जो हमें सिंधु बना दे और जिनका ध्यान करने से मृत्यु की भी मृत्यु हो जाए उस तत्व को गुरुतत्व कहते हैं।
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ललितपुर। चंडी मंदिर धाम में चल रहे सवा पांच करोड़ पार्थिव शिवलिंग निर्माण व श्रीरुद्रमहायज्ञ आयोजन में श्रद्धालुओं ने पहले सावन सोमवार को इक्कीस लाख पार्थिव शिवलिंग बनाए।
चंडी मंदिर परिसर में सोमवार को चंडीपीठाधीश्वर की उपस्थिति में श्रद्धालुओं ने ओम के जप के साथ 21 लाख पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया। इस धार्मिक अनुष्ठान में महिलाओं व बच्चों ने बढ़कर हिस्सा लिया। इसके बाद दोपहर में पार्थिव शिवलिंग का पूजन व महारूद्राभिषेक किया गया। पार्थिव शिवलिंग का पूजन व महारूद्राभिषेक यज्ञाचार्य पं. पवन शास्त्री ने कराया। पार्थिव शिवलिंग का पूजन मुख्य यजमान राजकुमारी हरिशंकर साहू, डाॅ. रानी श्रीवास्तव, डाॅ. अनूप श्रीवास्तव ने किया।
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चंडीपीठाधीश्वराचार्य महामंडलेश्वर स्वामी चंद्रेश्वर गिरि महाराज ने कहा कि जो मनुष्य नित्य प्रतिदिन गीता का अनुश्रवण करता है, उसे कोई भी विकार छू नहीं सकता। गीता में जीवन का सार उपलब्ध है। ईश्वर की भक्ति किस प्रकार की जाती है, इसका विस्तृत वर्णन है। इसलिए मनुष्य को सदगुरूदेव के चरणों की सेवा करते हुए ईश्वर का ध्यान करते हुए गीता का अनुश्रवण करना चाहिए। ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग सदगुरू बताता है। ऐसे भगवत भजन को साधने के लिए सदगुरु के चरणों की सेवा ही एकमात्र साधन है। अपने शिष्य की चिंता का जो निवारण करते हैं, वे ही सच्चे सदगुरु हैं।
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उन्होंने कहा कि लौकिक मंत्र -तंत्र का उपदेश देने वाले तो कई गुरु होते हैं, लेकिन जो शिष्य को सद्वस्तु का ज्ञान देते हैं, वे ही सच्चे सदगुरु होते हैं। काया और माया से जो हमें मुक्त करा दे, इस विनाशी शरीर से जो हमें अविनाशी का बोध करा दे, बिंदु से जो हमें सिंधु बना दे और जिनका ध्यान करने से मृत्यु की भी मृत्यु हो जाए उस तत्व को गुरुतत्व कहते हैं।