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देवगढ़ ओवरब्रिज में टूटेंगें मकान
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ललितपुर। देवगढ़ रेलवे क्रासिंग पर बन रहे ओवरब्रिज के दूसरी ओर काम लगने के बाद से लोगों के माथे पर मुसीबत के बल पड़ रहे हैं, क्योंकि दूसरी ओर जगह की बहुत कमी है। ओवरब्रिज बनाने के लिए सड़क की चौड़ाई कम से कम 15 मीटर होनी चाहिए, लेकिन मौके पर की गई नापजोख के बाद सिर्फ 11 मीटर ही जगह निकली। अब सहमति बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
देवगढ़ क्रॉसिंग से पहले गांधीनगर क्षेत्र में बनाए जा रहे ओवरब्रिज के लिए रेलवे क्रॉसिंग से स्टेशन तिराहा की ओर एसबीआई शाखा के पास तक 13 पिलर का निर्माण 12-12 मीटर पर होना है। इसके आगे स्टेशन तिराहा की ओर दो पिलर का निर्माण 24-24 मीटर के अंतराल पर किया जाएगा। इसके लिए अब 9.50-9.50 मीटर लंबाई और चौड़ाई के गड्ढों का निर्माण किया जाना है। इसके बाद यहां दो-दो मीटर के पिलर खड़े किए जाएंगे। लेकिन, मौके पर जगह बहुत कम है।
साढ़े आठ मीटर चौड़ी जगह ओवरब्रिज के लिए चाहिए है और दोनों ओर सर्विस रोड बनाने के लिए 3.50- 3.50 मीटर जगह चाहिए है। इस तरह करीब 15 मीटर जगह की जरूरत है, लेकिन उप्र राज्य सेतु निगम ने जब मौके पर फीता डालकर नाप की तो जगह सिर्फ 11 मीटर निकली, वह भी नालियों को मिलाकर। ऐसे में यदि किसी के मकान को क्षति पहुंचाए बगैर निर्माण किया जाता है तो एक ही ओर की सर्विस रोड बन पाएगी, जबकि सर्विस रोड दोनों ओर बनाना जरूरी है।
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दूसरी ओर, मकान तोड़ने की स्थिति बनने पर एक ओर अधिक मकान टूटेंगे, जबकि दूसरी ओर तीन मकानों को क्षति पहुंचेगी। चूंकि विभाग का मानना है कि क्षतिपूर्ति के लिए कम से कम मुआवजा दिया जाए, इसलिए जिस ओर तीन मकान टूटने हैं, उसी ओर तोड़फोड़ की अधिक संभावना नजर आ रही है। हालांकि, इसके बाद भी सहमति बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
उधर, ललितेश्वरी मंदिर पर भी ओवरब्रिज का असर आएगा। मंदिर का हवनकुंड टूटेगा, ऊपर के हिस्से में बनी मोर का छज्जा भी तोड़ा जा सकता है। पास के कौने में बना एक होटल भी दायरे में आ रहा है, इस होटल का टिनशेड समेत आसपास का हिस्सा टूटने की संभावना है।
रेलवे स्टेशन से देवगढ़ रोड पर अकेले ओवरब्रिज की समस्या नहीं है। बल्कि, रेलवे स्टेशन का विस्तार भी हो रहा है, ऐसे में रेलवे द्वारा बाउंड़ीवाल भी बनाई जाएगी। यह दीवार ढाई मीटर ऊंची तथा 122 मीटर लंबी बनेगी। इस दीवार के बनने से भी कई लोगों को आपत्ति हो रही है, क्योंकि उनका आना- जाना बंद हो जाएगा।
यदि मकान टूटते हैं तो इसमें लोगों की वर्षों की मेहनत की गाढ़ी कमाई चली जाएगी। उन्होंने सोचा भी नहीं होगा कि उनके मकान इस तरह से टूट जाएंगे। इतना ही नहीं, उन्हें मुआवजा उतना नहीं मिलेगा, जितना उन्होंने मकान बनाने में पैसा खर्च कर दिया है।
उप्र सेतु निगम और देवगढ़ रेलवे क्रासिंग के आसपास रहने वाले लोगों की तहसील सभागार में बैठक हुई। इसमें ओवरब्रिज के निर्माण में आा रही दिक्कतों पर चर्चा हुई। लोगों का सुझाव था कि ओवरब्रिज की डिजायन को रेलवे क्रासिंग से शहर की ओर थोड़ा खिसका दिया जाए तो सर्विस रोड भी निकल आएगी और ब्रिज का निर्माण भी हो जाएगा। लेकिन, अफसर डिजायन में मामूली फेरबदल पर भी तैयार हुए। बाद में तय किया गया कि मौके पर जाकर स्थिति देखी जाए, वहीं पर तय करेंगे। लेकिन, मौके पर जाने के बाद जब नापजोख की गई तो स्थिति साफ हो गई कि जगह इतनी कम है कि डिजायन में फेरबदल करना अथवा अन्य कोई बदलाव करना संभव नहीं है। इस मौके पर अनिल जैन अंचल, सेवानिवृत्त सहायक अभियंता जेके सिंघईं, महेंद्र अग्निहोत्री, मंजीत सिंह सलूजा, हरबीर सिंह अरोरा, अनिल तिवारी, संदीप तिवारी समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
देवगढ़ रेलवे क्रासिंग ओवरब्रिज निर्माण में लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई थी। इन्हीं आपत्तियों का समाधान करने के लिए बैठक बुलाई गई थी। मौके पर जाकर सभी लोगों ने निरीक्षण किया। 15 मीटर जगह चाहिए व 11 मीटर जगह है, ऐसे में अब सहमति बनाने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।
- धर्मेंद्र, अवर अभियंता, उप्र राज्य सेतु निगम
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देवगढ़ क्रॉसिंग से पहले गांधीनगर क्षेत्र में बनाए जा रहे ओवरब्रिज के लिए रेलवे क्रॉसिंग से स्टेशन तिराहा की ओर एसबीआई शाखा के पास तक 13 पिलर का निर्माण 12-12 मीटर पर होना है। इसके आगे स्टेशन तिराहा की ओर दो पिलर का निर्माण 24-24 मीटर के अंतराल पर किया जाएगा। इसके लिए अब 9.50-9.50 मीटर लंबाई और चौड़ाई के गड्ढों का निर्माण किया जाना है। इसके बाद यहां दो-दो मीटर के पिलर खड़े किए जाएंगे। लेकिन, मौके पर जगह बहुत कम है।
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साढ़े आठ मीटर चौड़ी जगह ओवरब्रिज के लिए चाहिए है और दोनों ओर सर्विस रोड बनाने के लिए 3.50- 3.50 मीटर जगह चाहिए है। इस तरह करीब 15 मीटर जगह की जरूरत है, लेकिन उप्र राज्य सेतु निगम ने जब मौके पर फीता डालकर नाप की तो जगह सिर्फ 11 मीटर निकली, वह भी नालियों को मिलाकर। ऐसे में यदि किसी के मकान को क्षति पहुंचाए बगैर निर्माण किया जाता है तो एक ही ओर की सर्विस रोड बन पाएगी, जबकि सर्विस रोड दोनों ओर बनाना जरूरी है।
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दूसरी ओर, मकान तोड़ने की स्थिति बनने पर एक ओर अधिक मकान टूटेंगे, जबकि दूसरी ओर तीन मकानों को क्षति पहुंचेगी। चूंकि विभाग का मानना है कि क्षतिपूर्ति के लिए कम से कम मुआवजा दिया जाए, इसलिए जिस ओर तीन मकान टूटने हैं, उसी ओर तोड़फोड़ की अधिक संभावना नजर आ रही है। हालांकि, इसके बाद भी सहमति बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
उधर, ललितेश्वरी मंदिर पर भी ओवरब्रिज का असर आएगा। मंदिर का हवनकुंड टूटेगा, ऊपर के हिस्से में बनी मोर का छज्जा भी तोड़ा जा सकता है। पास के कौने में बना एक होटल भी दायरे में आ रहा है, इस होटल का टिनशेड समेत आसपास का हिस्सा टूटने की संभावना है।
रेलवे स्टेशन से देवगढ़ रोड पर अकेले ओवरब्रिज की समस्या नहीं है। बल्कि, रेलवे स्टेशन का विस्तार भी हो रहा है, ऐसे में रेलवे द्वारा बाउंड़ीवाल भी बनाई जाएगी। यह दीवार ढाई मीटर ऊंची तथा 122 मीटर लंबी बनेगी। इस दीवार के बनने से भी कई लोगों को आपत्ति हो रही है, क्योंकि उनका आना- जाना बंद हो जाएगा।
यदि मकान टूटते हैं तो इसमें लोगों की वर्षों की मेहनत की गाढ़ी कमाई चली जाएगी। उन्होंने सोचा भी नहीं होगा कि उनके मकान इस तरह से टूट जाएंगे। इतना ही नहीं, उन्हें मुआवजा उतना नहीं मिलेगा, जितना उन्होंने मकान बनाने में पैसा खर्च कर दिया है।
उप्र सेतु निगम और देवगढ़ रेलवे क्रासिंग के आसपास रहने वाले लोगों की तहसील सभागार में बैठक हुई। इसमें ओवरब्रिज के निर्माण में आा रही दिक्कतों पर चर्चा हुई। लोगों का सुझाव था कि ओवरब्रिज की डिजायन को रेलवे क्रासिंग से शहर की ओर थोड़ा खिसका दिया जाए तो सर्विस रोड भी निकल आएगी और ब्रिज का निर्माण भी हो जाएगा। लेकिन, अफसर डिजायन में मामूली फेरबदल पर भी तैयार हुए। बाद में तय किया गया कि मौके पर जाकर स्थिति देखी जाए, वहीं पर तय करेंगे। लेकिन, मौके पर जाने के बाद जब नापजोख की गई तो स्थिति साफ हो गई कि जगह इतनी कम है कि डिजायन में फेरबदल करना अथवा अन्य कोई बदलाव करना संभव नहीं है। इस मौके पर अनिल जैन अंचल, सेवानिवृत्त सहायक अभियंता जेके सिंघईं, महेंद्र अग्निहोत्री, मंजीत सिंह सलूजा, हरबीर सिंह अरोरा, अनिल तिवारी, संदीप तिवारी समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
देवगढ़ रेलवे क्रासिंग ओवरब्रिज निर्माण में लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई थी। इन्हीं आपत्तियों का समाधान करने के लिए बैठक बुलाई गई थी। मौके पर जाकर सभी लोगों ने निरीक्षण किया। 15 मीटर जगह चाहिए व 11 मीटर जगह है, ऐसे में अब सहमति बनाने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।
- धर्मेंद्र, अवर अभियंता, उप्र राज्य सेतु निगम