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गोविंद सागर बांध में कई मरी मिली मछली, बैठी जांच
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talbehat taal
- फोटो : talbehat taal
ललितपुर। बृहस्पतिवार की सुबह गोविंद सागर बांध के पानी में बड़ी मात्रा में मरी मछलियां पाई गई। इस सूचना पर जिलाधिकारी ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर जांच के निर्देश दिए। देर शाम कमेटी ने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी। उधर, पानी में मरी हुई मछलियों को निकालने हेतु मत्स्य ठेकेदार को निर्देशित किया गया है।
बुधवार को मत्स्य ठेकेदार ने गोविंद सागर बांध में कतला मछली का बीज डाला। इसमें कुछ मछलियां पहले से बेहोश थी। जिस कारण ऐसी मछलियां पानी में मर गई और वे तैरती हुई बांध के एक किनारे पहुंच गई। सुबह सैर करने वाले लोगों ने इसे देखा तो इसकी सूचना जिलाधिकारी को दे दी। डीएम ए दिनेश कुमार ने इस मामले को गंभीरता से लिया और तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर जांच बैठा दी। इसमें अधिशासी अभियंता राजघाट निर्माण खंड, अधिशासी अभियंता जल संस्थान, सहायक निदेशक मत्स्य शामिल किए गए। कमेटी के सदस्यों के साथ एसडीएम सदर भी मौके पर पहुंचे। जांच में पाया कि जलाशय के रोड साइड में 3.500 किमी के पास कुछ मछलियां जो लगभग दस ग्राम से लेकर पचास ग्राम तक की हैं जो पानी में मरी हैं। बांध पर तैनात मत्स्य विकास निगम के कर्मचारी से दूरभाष से जानकारी प्राप्त की गई। उन्होंने जांच अधिकारियों को बताया कि 23 सितंबर को ठेकेदार द्वारा लगभग तीन क्विंटल मत्स्य बीज जलाशय में डाला गया है। इसमें कतला प्रजाति की मछली के बच्चे रास्ते में लाते समय बेहोश/अचेत हो गए थे, जिन्हें बांध के पानी में डाल दिया गया। इससे पानी के जहरीला होने की आशंका की बात निराधार साबित हुई। जल संस्थान के अवर अभियंता राहुल सिंह का कहना है कि जलापूर्ति से पहले गोविंद सागर से कच्चा जल लेकर शोधन किया जाता है, तब जाकर टंकी के माध्यम से शोधित पानी की आपूर्ति की जाती है। बांध के पानी का सैंपल भी लिया गया। जल निगम के अधिकारियों ने शुुरुआती परीक्षण किया। इसमें पानी नार्मल पाया गया है।
इतना है जलाशय का लेबल
बांध में पूर्ण जल स्तर 1194 फिट के सापेक्ष 1192.90 बना हुआ है। इस पानी का उपयोग कृषि की सिंचाई के साथ पेयजल की आपूर्ति में भी किया जाता है।
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जिलाधिकारी को संयुक्त जांच रिपोर्ट दे दी है। बांध में जहरीले पानी जैसी कोई बात नहीं है। जो मछलियों का बीज डाला गया था, उसमें कुछ मछलियां बेहोश थी, जो बाद में मर गई।
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मनमोहन सिंह
अधिशासी अभियंता, राजघाट निर्माण खंड
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बुधवार को मत्स्य ठेकेदार ने गोविंद सागर बांध में कतला मछली का बीज डाला। इसमें कुछ मछलियां पहले से बेहोश थी। जिस कारण ऐसी मछलियां पानी में मर गई और वे तैरती हुई बांध के एक किनारे पहुंच गई। सुबह सैर करने वाले लोगों ने इसे देखा तो इसकी सूचना जिलाधिकारी को दे दी। डीएम ए दिनेश कुमार ने इस मामले को गंभीरता से लिया और तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर जांच बैठा दी। इसमें अधिशासी अभियंता राजघाट निर्माण खंड, अधिशासी अभियंता जल संस्थान, सहायक निदेशक मत्स्य शामिल किए गए। कमेटी के सदस्यों के साथ एसडीएम सदर भी मौके पर पहुंचे। जांच में पाया कि जलाशय के रोड साइड में 3.500 किमी के पास कुछ मछलियां जो लगभग दस ग्राम से लेकर पचास ग्राम तक की हैं जो पानी में मरी हैं। बांध पर तैनात मत्स्य विकास निगम के कर्मचारी से दूरभाष से जानकारी प्राप्त की गई। उन्होंने जांच अधिकारियों को बताया कि 23 सितंबर को ठेकेदार द्वारा लगभग तीन क्विंटल मत्स्य बीज जलाशय में डाला गया है। इसमें कतला प्रजाति की मछली के बच्चे रास्ते में लाते समय बेहोश/अचेत हो गए थे, जिन्हें बांध के पानी में डाल दिया गया। इससे पानी के जहरीला होने की आशंका की बात निराधार साबित हुई। जल संस्थान के अवर अभियंता राहुल सिंह का कहना है कि जलापूर्ति से पहले गोविंद सागर से कच्चा जल लेकर शोधन किया जाता है, तब जाकर टंकी के माध्यम से शोधित पानी की आपूर्ति की जाती है। बांध के पानी का सैंपल भी लिया गया। जल निगम के अधिकारियों ने शुुरुआती परीक्षण किया। इसमें पानी नार्मल पाया गया है।
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इतना है जलाशय का लेबल
बांध में पूर्ण जल स्तर 1194 फिट के सापेक्ष 1192.90 बना हुआ है। इस पानी का उपयोग कृषि की सिंचाई के साथ पेयजल की आपूर्ति में भी किया जाता है।
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जिलाधिकारी को संयुक्त जांच रिपोर्ट दे दी है। बांध में जहरीले पानी जैसी कोई बात नहीं है। जो मछलियों का बीज डाला गया था, उसमें कुछ मछलियां बेहोश थी, जो बाद में मर गई।
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मनमोहन सिंह
अधिशासी अभियंता, राजघाट निर्माण खंड