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करोड़ों खर्च फिर भी जलसंकट
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 23 Apr 2017 12:36 AM IST
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water crisis, lalitpur news
- फोटो : demo
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मड़ावरा (ललितपुर)। तहसील क्षेत्र कई गांवों में पेयजल की बेहतर आपूर्ति के लिए कुछ साल पहले जलकल विभाग द्वारा पानी की टंकियों का निर्माण कराया गया। इन पाइप लाइन परियोजनाओं के लिए शासन की ओर से करोड़ों रुपये बजट जारी किया गया। विभागीय अफसरों की लापरवाही से जनता को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में लोगों के सामने जलसंकट की स्थिति बन गई है।
क्षेत्र के सौंरई, मदनपुर, कारीटोरन तथा मड़ावरा क़स्बे में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए पाइप लाइन परियोजनाएं विकसित की गईं हैं। ग्राम सौंरई में वर्षों पूर्व पेयजल आपूर्ति के लिए दो-दो नलकूप और एक पानी की टंकी बनवाई गयी थी, लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते आजतक ग्रामीणों को टंकी से पानी नसीब नहीं हुआ। वहीं, गांव मदनपुर में भी कई लाख रुपये खर्च करके नलकूप और पानी की टंकी बनवाई गई।
यहां के लोगों का कहना है कि कुछ रसूखदार लोगों को छोड़कर अन्य किसी को टंकी या नलकूप से पानी नहीं मिलता है। जब गांव के सारे हैंडपंप पानी देना बंद कर देते हैं तब बसस्टैंड पर बने पुराने कुएं का ही सहारा रहता है। यही हाल ग्राम कारीटोरन की पाइप लाइन परियोजना का है। यहां पाइप लाइन चोक होकर जर्जर हो चुकी है। तहसील मुख्यालय पर भी इन नलकूपों और जलापूर्ति का हाल बुरा है। लगभग 10 हजार आबादी वाले क़स्बे में पेयजल आपूर्ति के लिए एक पानी की टंकी है, जिसे भरने के लिए दो नलकूप हैं। टंकी से महज पुराना बाजार, प्राइमरी स्कूल, नीचेपुरा आदि कुछ ही मोहल्लों में एक सीमित समय के लिए ही पानी पहुंचता है।
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बाकी बड़े हिस्से जैसे ब्लॉक-तहसील के आसपास, टौरिया मोहल्ला, मास्टर कॉलोनी, साबिर कॉलोनी, अजमेरी कॉलोनी जैसे तमाम क्षेत्र पेयजल आपूर्ति से वंचित रह जाते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में नाम के लिए मौजूद इन पेयजल परियोजनाओं का रखरखाव और संचालन कागजों में ही किया जा रहा है। जिम्मेदार लापरवाही बरत रहे हैं।
ऊंचाई पर बनाई जाए टंकी
टौरिया मोहल्ला ऊंचाई और पठार पर बसे होने के चलते यहां भूमिगत जलस्तर नीचे है, जिससे पानी की समस्या विकराल हो चुकी है। यहां ऊंचाई पर पानी की टंकी बनाई जाये, जिसे डीप-बोरिंग करके या रोहिणी बांध से मोटरपंप द्वारा भरकर पेयजल आपूर्ति की जा सकती है। - अनीस खां
कनेक्शन लेने को ग्रामीण तैयार
सहरिया बस्ती समेत तमाम मोहल्लों में पानी की किल्लत है, यदि गांव में बनी पानी की टंकी से पेयजल आपूर्ति की जाये तो पानी की किल्लत काफी हद तक दूर हो सकती है। अधिकांश ग्रामीण पेयजल के लिए जल कनेक्शन लेने को भी तैयार हैं। - विजय जैन
जलकल विभाग द्वारा संचालित इन परियोजनाओं में की जा रही लापरवाही की जांच कराई जाएगी। पेयजल परियोजनाओं को सुचारू बनाने की दिशा में कार्यवाही की संस्तुति की जायेगी।
- एसके पाल, उपजिलाधिकारी, मड़ावरा
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क्षेत्र के सौंरई, मदनपुर, कारीटोरन तथा मड़ावरा क़स्बे में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए पाइप लाइन परियोजनाएं विकसित की गईं हैं। ग्राम सौंरई में वर्षों पूर्व पेयजल आपूर्ति के लिए दो-दो नलकूप और एक पानी की टंकी बनवाई गयी थी, लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते आजतक ग्रामीणों को टंकी से पानी नसीब नहीं हुआ। वहीं, गांव मदनपुर में भी कई लाख रुपये खर्च करके नलकूप और पानी की टंकी बनवाई गई।
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यहां के लोगों का कहना है कि कुछ रसूखदार लोगों को छोड़कर अन्य किसी को टंकी या नलकूप से पानी नहीं मिलता है। जब गांव के सारे हैंडपंप पानी देना बंद कर देते हैं तब बसस्टैंड पर बने पुराने कुएं का ही सहारा रहता है। यही हाल ग्राम कारीटोरन की पाइप लाइन परियोजना का है। यहां पाइप लाइन चोक होकर जर्जर हो चुकी है। तहसील मुख्यालय पर भी इन नलकूपों और जलापूर्ति का हाल बुरा है। लगभग 10 हजार आबादी वाले क़स्बे में पेयजल आपूर्ति के लिए एक पानी की टंकी है, जिसे भरने के लिए दो नलकूप हैं। टंकी से महज पुराना बाजार, प्राइमरी स्कूल, नीचेपुरा आदि कुछ ही मोहल्लों में एक सीमित समय के लिए ही पानी पहुंचता है।
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बाकी बड़े हिस्से जैसे ब्लॉक-तहसील के आसपास, टौरिया मोहल्ला, मास्टर कॉलोनी, साबिर कॉलोनी, अजमेरी कॉलोनी जैसे तमाम क्षेत्र पेयजल आपूर्ति से वंचित रह जाते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में नाम के लिए मौजूद इन पेयजल परियोजनाओं का रखरखाव और संचालन कागजों में ही किया जा रहा है। जिम्मेदार लापरवाही बरत रहे हैं।
ऊंचाई पर बनाई जाए टंकी
टौरिया मोहल्ला ऊंचाई और पठार पर बसे होने के चलते यहां भूमिगत जलस्तर नीचे है, जिससे पानी की समस्या विकराल हो चुकी है। यहां ऊंचाई पर पानी की टंकी बनाई जाये, जिसे डीप-बोरिंग करके या रोहिणी बांध से मोटरपंप द्वारा भरकर पेयजल आपूर्ति की जा सकती है। - अनीस खां
कनेक्शन लेने को ग्रामीण तैयार
सहरिया बस्ती समेत तमाम मोहल्लों में पानी की किल्लत है, यदि गांव में बनी पानी की टंकी से पेयजल आपूर्ति की जाये तो पानी की किल्लत काफी हद तक दूर हो सकती है। अधिकांश ग्रामीण पेयजल के लिए जल कनेक्शन लेने को भी तैयार हैं। - विजय जैन
जलकल विभाग द्वारा संचालित इन परियोजनाओं में की जा रही लापरवाही की जांच कराई जाएगी। पेयजल परियोजनाओं को सुचारू बनाने की दिशा में कार्यवाही की संस्तुति की जायेगी।
- एसके पाल, उपजिलाधिकारी, मड़ावरा