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छात्रा का एक साल बर्बाद
ललितपुर/ब्यूूरेेेा
Updated Sat, 13 Jun 2015 01:13 AM IST
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ललितपुर। कोतवाली पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर जखौरा अंतर्गत मादौन निवासी अभिभावक की शिकायत पर नेहरू महाविद्यालय के प्राचार्य और कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप में मुकदमा पंजीकृत करके जांच शुरू कर दी है।
ग्राम मादौन निवासी प्रमोद कुमार नामदेव का आरोप है कि वर्ष 2013 में उसकी पुत्री प्रिंसी बीए प्रथम वर्ष की छात्रा थी। अंग्रेजी विषय में बैक पेपर होने के कारण प्रिंसी ने दोबारा परीक्षा दी, जिसमें वह पास हो गई। लेकिन समय पर मार्कशीट न आने के कारण बीए द्वितीय वर्ष में प्रवेश लेने के लिए उसने कंप्यूटर ऑपरेटर फहीम से संपर्क किया। फहीम ने तीन हजार रुपयों की मांग करते हुए ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन करके फार्म जमा करने का आश्वासन दिया। पंद्रह दिन बाद कंप्यूटर ऑपरेटर ने परिचय पत्र व रसीद प्रिसीं को दी, जिसके बाद प्रिंसी नियमित कालेज में शिक्षण करती रही। बीए द्वितीय वर्ष की परीक्षा के लिए प्रवेश वितरण शुरू होने पर उसने कंप्यूटर आपरेटर से संपर्क साधा, तो वह टालमटोल करने लगा।
इसके बाद झांसी के बाबू को चार हजार रुपये देकर काम कराने की बात कही। रुपये देने के बाद भी जब प्रवेश पत्र नहीं मिला तो प्राचार्य अवधेश अग्रवाल को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई। प्राचार्य ने कंप्यूटर ऑपरेटर का पक्ष लेते हुए अभिभावक के साथ अभद्रता की, जिसकी सूचना पुलिस को दी गई। कार्रवाई न होने पर अभिभावक ने न्यायालय की शरण ली। आरोपों को गंभीरता से लेते हुए सीजेएम ने एफआईआर के आदेश जारी कर दिए, जिस पर कोतवाली पुलिस ने नामजद आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा पंजीकृत करके जांच शुरू कर दी है।
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ग्राम मादौन निवासी प्रमोद कुमार नामदेव का आरोप है कि वर्ष 2013 में उसकी पुत्री प्रिंसी बीए प्रथम वर्ष की छात्रा थी। अंग्रेजी विषय में बैक पेपर होने के कारण प्रिंसी ने दोबारा परीक्षा दी, जिसमें वह पास हो गई। लेकिन समय पर मार्कशीट न आने के कारण बीए द्वितीय वर्ष में प्रवेश लेने के लिए उसने कंप्यूटर ऑपरेटर फहीम से संपर्क किया। फहीम ने तीन हजार रुपयों की मांग करते हुए ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन करके फार्म जमा करने का आश्वासन दिया। पंद्रह दिन बाद कंप्यूटर ऑपरेटर ने परिचय पत्र व रसीद प्रिसीं को दी, जिसके बाद प्रिंसी नियमित कालेज में शिक्षण करती रही। बीए द्वितीय वर्ष की परीक्षा के लिए प्रवेश वितरण शुरू होने पर उसने कंप्यूटर आपरेटर से संपर्क साधा, तो वह टालमटोल करने लगा।
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इसके बाद झांसी के बाबू को चार हजार रुपये देकर काम कराने की बात कही। रुपये देने के बाद भी जब प्रवेश पत्र नहीं मिला तो प्राचार्य अवधेश अग्रवाल को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई। प्राचार्य ने कंप्यूटर ऑपरेटर का पक्ष लेते हुए अभिभावक के साथ अभद्रता की, जिसकी सूचना पुलिस को दी गई। कार्रवाई न होने पर अभिभावक ने न्यायालय की शरण ली। आरोपों को गंभीरता से लेते हुए सीजेएम ने एफआईआर के आदेश जारी कर दिए, जिस पर कोतवाली पुलिस ने नामजद आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा पंजीकृत करके जांच शुरू कर दी है।
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