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तीन हत्यारों को आजीवन कारावास

Wed, 25 May 2016 01:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 25 May 2016 01:25 AM IST
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punishment in murder case
jail, lalitpur news - फोटो : demo
ललितपुर। अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय लोकेश राय की अदालत ने दस वर्ष पूर्व रुपयों के लेन-देन में हुए विवाद में युवक की हत्या के जुर्म में तीन हत्यारों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। तीनों पर दस-दस हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है।
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शहर के मुहल्ला नदीपुरा निवासी जावेद उर्फ गामा पुत्र मतीन खां ने दस वर्ष पूर्व थाना कोतवाली में तहरीर देकर बताया था कि 15 जनवरी 2006 को वह व उसका भाई इमरान मुहल्ला नदीपुरा स्थित इमाम चौक पर खड़े बात कर रहे थे, तभी मुहल्ला चौबयाना निवासी घनश्याम और नदीपुरा निवासी फहीम वहां से निकले। इमरान ने घनश्याम से रुपयों के लेन-देन की बात की।
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साथ ही कहा कि उसे  रुपये की जरूरत है। घनश्याम व फहीम ने कहा कि चलो आगे देते हैं। वह रुपये लेने की बात कहकर उन दोनों के साथ चला गया। काफी देर तक वह नहीं लौटा तो वह अपने भाई अरशद के साथ उसी दिन  शाम छह बजे इमरान को तलाशते हुए घनश्याम के घर गया। घनश्याम  के दरवाजे के बाहर भाई इमरान को फहीम व घनश्याम चाकू से मार रहे थे। 
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इमरान के शरीर से खून बह रहा था। दो अज्ञात व्यक्ति इमरान को पकड़े हुए थे। इमरान किसी प्रकार उनसे छूटकर भागा तो सभी हमलावरों ने मक्खन के घर के पास दौड़कर फिर से चाकुओं से हमला किया, जिस पर इमरान गिर गया और बेहोश हो गया था। हमलावर गालीगलौज करते हुए भाग गए थे। बाद में इमरान की मौत हो गई थी।

जावेद की तहरीर पर पुलिस ने घनश्याम, फहीम और दो  अज्ञात पर इमरान की हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया था। इस मामले में खास बात यह  रही थी कि पाुलिस ने विवेचना में दोनों मुख्य अभियुक्तों घनश्याम और फहीम का मुकदमे से नाम काटते हुए अलग कर दिया था, जबकि दो अज्ञात की पहचान हो जाने पर मुहल्ला  नदीपुरा अंतर्गत भीमनगर निवासी ललित और अखिलेश अहिरवार के खिलाफ आरोप पत्र  तैयार कर 26 फरवरी 2006 को न्यायालय में प्रस्तुत कर दिए थे। तब से यह मामला न्यायालय  में विचाराधीन चल रहा था।


साक्ष्य संकलित होने पर न्यायालय द्वारा धारा 19 के  तहत साक्ष्यों के आधार पर घनश्याम और फहीम को तलब किया और दोनों पर हत्या  का केस चलाया। हालांकि, मुकदमा के दौरान घनश्याम की मौत हो चुकी थी। न्यायाधीश ने मंगलवार को  अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर अभियुक्त फहीम, ललित व अखिलेश को इमरान की  हत्या का दोष सिद्ध करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। मामले की पैरवी सहायक शासकीय अधिवक्ता बादाम सिंह यादव ने की।
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