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हत्यारे पति को दस वर्ष की कैद
ब्यूरो
Updated Wed, 17 Feb 2016 01:52 AM IST
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ललितपुर। दहेज में मोटरसाइकिल की मांग पूरी नहीं होने पर पत्नी को फांसी पर लटकाकर मारने के चार वर्ष पुराने मामले में अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट हरकेश कुमार की अदालत ने हत्यारोपी पति को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
बिरधा पुलिस चौकी अंतर्गत ग्राम मैनवारा निवासी श्याम लाल पुत्र खरगा अहिरवार ने जाखलौन थाना में चार वर्ष पूर्व 26 फरवरी 2012 को तहरीर देकर बताया था कि उसने पुत्री उर्मिला की शादी ग्राम मैरतीकलां निवासी प्रेम सिंह के पुत्र चंद्रभान के साथ वर्ष 2007 में सम्मेलन में हिंदू रीतिरिवाज के साथ की थी।
शादी में पुत्री के ससुराल पक्ष के सदस्यों को कपड़े, सामान, दामाद को सोने की मोहर और 25 हजार रुपये आदि उपहार दिए थे। लेकिन, उसकी पुत्री के ससुर प्रेमसिंह, देवर कैलाश और सास राजरानी सामान से संतुष्ट नहीं थे। वे पुत्री को मायके से मोटरसाइकिल लाकर देने के लिए गालीगलौज और मारपीट कर प्रताड़ित करते थे।
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पुत्री मायके आई तो उसने ससुरालीजनों द्वारा बाइक की मांग को लेकर मारपीट के बारे में बताया, लेकिन पुत्री को समझाबुझाकर वापस ससुराल भेज दिया।
घटना से चार माह पूर्व जब वह अपने पुत्र प्रमोद के साथ पुत्री को लिवाने गया तो चंद्रभान ने पुत्री को खेतों पर भेज दिया। जब उसका पुत्र खेत पर पहुंचा तो यहां चंद्रभान ने उसके पुत्र प्रमोद के साथ गालीगलौज करते हुए मारपीट की और उर्मिला को मायके नहीं जाने दिया।
इस पर उसने थाना जाखलौन पुलिस को घटना की तहरीर दी थी। 14 फरवरी 2012 को उसकी पुत्री को बच्चा पैदा हुआ, तो वह सामान देने गया। 25 फरवरी 2012 को गांव के चौकीदार के लड़के का फोन आया कि उसकी पुत्री उर्मिला फांसी के फंदे पर लटकी है।
पिता की तहरीर पर जाखलौन पुलिस ने पति चंद्रभान उर्फ चंदू, ससुर प्रेम सिंह, देवर कैलाश व सास राजरानी के खिलाफ दहेज हत्या, दहेज के लिए प्रताड़ित करने और हत्या एवं दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किए। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था।
मंगलवार को अभियोजन पक्ष द्वारा दी गई दलीलों, साक्ष्यों और गवाहों को आधार मानते हुए मृतका उर्मिला के दहेज लोभी हत्यारे पति चंद्रभान को दहेज हत्या, दहेज प्रतिषेध अधिनियम और दहेज के लिए प्रताड़ित करने के मामले में दोषी पाए जाने पर 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई।
साथ ही 20 हजार रुपये अर्थदंड और अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में चार माह के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई गई। जबकि, सास, ससुर व देवर को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। मामले की पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता बृजेंद्र सिंह यादव ने की।
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बिरधा पुलिस चौकी अंतर्गत ग्राम मैनवारा निवासी श्याम लाल पुत्र खरगा अहिरवार ने जाखलौन थाना में चार वर्ष पूर्व 26 फरवरी 2012 को तहरीर देकर बताया था कि उसने पुत्री उर्मिला की शादी ग्राम मैरतीकलां निवासी प्रेम सिंह के पुत्र चंद्रभान के साथ वर्ष 2007 में सम्मेलन में हिंदू रीतिरिवाज के साथ की थी।
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शादी में पुत्री के ससुराल पक्ष के सदस्यों को कपड़े, सामान, दामाद को सोने की मोहर और 25 हजार रुपये आदि उपहार दिए थे। लेकिन, उसकी पुत्री के ससुर प्रेमसिंह, देवर कैलाश और सास राजरानी सामान से संतुष्ट नहीं थे। वे पुत्री को मायके से मोटरसाइकिल लाकर देने के लिए गालीगलौज और मारपीट कर प्रताड़ित करते थे।
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पुत्री मायके आई तो उसने ससुरालीजनों द्वारा बाइक की मांग को लेकर मारपीट के बारे में बताया, लेकिन पुत्री को समझाबुझाकर वापस ससुराल भेज दिया।
घटना से चार माह पूर्व जब वह अपने पुत्र प्रमोद के साथ पुत्री को लिवाने गया तो चंद्रभान ने पुत्री को खेतों पर भेज दिया। जब उसका पुत्र खेत पर पहुंचा तो यहां चंद्रभान ने उसके पुत्र प्रमोद के साथ गालीगलौज करते हुए मारपीट की और उर्मिला को मायके नहीं जाने दिया।
इस पर उसने थाना जाखलौन पुलिस को घटना की तहरीर दी थी। 14 फरवरी 2012 को उसकी पुत्री को बच्चा पैदा हुआ, तो वह सामान देने गया। 25 फरवरी 2012 को गांव के चौकीदार के लड़के का फोन आया कि उसकी पुत्री उर्मिला फांसी के फंदे पर लटकी है।
पिता की तहरीर पर जाखलौन पुलिस ने पति चंद्रभान उर्फ चंदू, ससुर प्रेम सिंह, देवर कैलाश व सास राजरानी के खिलाफ दहेज हत्या, दहेज के लिए प्रताड़ित करने और हत्या एवं दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किए। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था।
मंगलवार को अभियोजन पक्ष द्वारा दी गई दलीलों, साक्ष्यों और गवाहों को आधार मानते हुए मृतका उर्मिला के दहेज लोभी हत्यारे पति चंद्रभान को दहेज हत्या, दहेज प्रतिषेध अधिनियम और दहेज के लिए प्रताड़ित करने के मामले में दोषी पाए जाने पर 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई।
साथ ही 20 हजार रुपये अर्थदंड और अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में चार माह के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई गई। जबकि, सास, ससुर व देवर को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। मामले की पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता बृजेंद्र सिंह यादव ने की।