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हत्या का आरोप सिद्ध
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Fri, 05 Jun 2015 01:25 AM IST
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घटना चौदह अप्रैल 2011 की है। ग्राम पंचायत ऊमरी मजरा गुटी निवासी चौबीस वर्षीय धनीराम पुत्र रामप्रसाद प्रजापति घर से आधा किलोमीटर दूर स्थित खलिहान में सरसों उड़ाने गया था, जहां उसका चचेरा भाई मथुरा (50 वर्ष) पुत्र गनेश एवं अन्य परिजन मौजूद थे। धनीराम एवं मथुरा दोनों सरसों उड़ाने लगे। दोपहर बारह बजे अचानक हवा बंद हो गई। धनीराम खेत पर स्थित टपरे में जाकर सो गया, कुछ देर बाद मथुरा झाड़ी काटने वाला लोहे का धारदार हथियार लेकर धनीराम के टपरे में जा पहुंचा और धनीराम पर सोते समय ताबड़तोड़ प्रहार कर दिए। धनीराम अपनी जान बचाने को खेत की ओर भागा तो मथुरा ने पीछे उसकी गर्दन पर प्रहार कर दिया था, जिससे धनीराम की गर्दन कटकर अलग हो गई थी तथा उसकी घटना स्थल पर ही मौत हो गई थी। मौके पर मौजूद मृतक के भाई बाबूलाल ने मथुरा के हाथ में रक्तरंजित हथियार देख भागकर अपनी जान बचाई और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने बाबूलाल की तहरीर पर हत्या का मुकदमा पंजीकृत कर लिया था तथा दूसरे दिन धनीराम को हत्या में प्रयुक्त हथियार के साथ गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। इसके बाद पुलिस ने अदालत में आरोप पत्र प्रस्तुत किए।
एडीजे कोर्ट में बृहस्पतिवार को इस प्रकरण की निर्णायक सुनवाई हुई, बाबूलाल एवं रमेश चश्मदीद गवाहों सहित कुल आठ गवाह पेश किए गए। गवाहों के बयानों और साक्ष्यों पर गौर करने के बाद न्यायाधीश ने अपना निर्णय सुना दिया। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता तिलक सिंह यादव ने पैरवी की। शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि हत्यारोपी घटना के बाद से ही जिला कारागार में निरुद्ध चल रहे हैं।
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