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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lalitpur News ›   Dead body was found in the valley of alcohol addicted

नाले में मिला शव मृतक था शराब पीने का आदी

Thu, 15 Oct 2015 12:36 AM IST
ललितपुर।
ललितपुर। Updated Thu, 15 Oct 2015 12:36 AM IST
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ललितपुर। कोतवाली क्षेत्र के मुहल्ला चौकाबाग की एक नाली में अधेड़ का शव पड़ा मिला। मृतक कैलगुंवा तिराहे पर जूता पॉलिस का काम करता था।  बुधवार की सुबह चौकाबाग की एक नाली में शव पड़ा होने की खबर से क्षेत्र में सनसनी मच गई। कुछ ही देर में मौके पर काफी लोगों की भीड़ और पुलिस पहुंच गई। पुलिस ने शव की शिनाख्त कराने का प्रयास किया। कुछ देर बाद उसकी शिनाख्त मुहल्ला रावतयाना निवासी संतोष अहिरवार (40) पुत्र रामदास के रूप में हुई। परिजनों के मुताबिक संतोष कच्ची शराब पीने का आदी था और मंगलवार की शाम को वह घर से निकल गया था। पुलिस का अनुमान है कि संतोष ने अत्यधिक मात्रा में शराब का सेवन कर लिया होगा और नाली में गिर गया होगा, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

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नहीं थम रहा कच्ची शराब का कारोबार

ललितपुर। नगर के कई इलाकों में खुलेआम कच्ची शराब की ब्रिकी होती है। पिछले दिनों आबकारी निरीक्षक विकास कुमार सिंह का निलंबन कच्ची शराब के कारोबार पर नियंत्रण नहीं कर पाने के कारण हुआ था। इसके बाद हरकत में आया आबकारी विभाग भले ही कच्ची शराब के खिलाफ अभियान चला रहा हो, लेकिन इससे कारोबार पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ रहा है। दिलचस्प यह है कि आबकारी विभाग को छापामार कार्रवाई के दौरान कबूतरा जाति की महिलाओं के साथ बच्चों के हाथों से शराब बिकने की हकीकत से रूबरू होना पड़ रहा है। देवगढ़ रेलवे क्रासिंग के आगे मालगोदाम के पास कच्ची शराब के शौकीनों का दिन-भर जमावड़ा रहता है। यहां कच्ची शराब का अत्यधिक सेवन करने के बाद रेलगाड़ी से टकरा कर कई लोग मौत के शिकार हो चुके हैं। कुछ दिन पहले ही सिद्दन रेलवे पुल के पास कच्ची शराब पी रहा एक युवक ट्रेन से टकरा गया था। लेकिन, इसके बाद भी इस काले कारोबार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।

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कच्ची शराब बिक्री के स्थानों की लगती है बोली

ललितपुर। जानकारों का कहना है नगर क्षेत्र के उन स्थानों की बोली लगाई जाती है, जहां कच्ची शराब की सबसे ज्यादा ब्रिकी होती है। कबूतरा जाति के लोगों ने इन स्थानों का बंटवारा दिन और घंटों के हिसाब से आपस में कर रखा है। लेकिन इसके बावजूद इनकी रोकथाम के लिए कारगर कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। 

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