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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lalitpur News ›   Accused of fraud declared a reward of five thousand

धोखाधड़ी के आरोपी पर पांच हजार का ईनाम घोषित

Thu, 24 Sep 2015 11:12 PM IST
ब्यूरो ललितपुर।
ब्यूरो ललितपुर। Updated Thu, 24 Sep 2015 11:12 PM IST
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ललितपुर। क्राइम ब्रांच को चकमा देकर फरार हुए लाखों रुपये की धोखाधड़ी के आरोपी पर पुलिस अधीक्षक ने पांच हजार रुपये का ईनाम घोषित कर दिया है।

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पुलिस अधीक्षक प्रभाकर चौधरी ने संजीव कुमार बघेल मूलत: निवासी शिवनगर पादरी बाजार थाना शाहपुर जिला गोरखपुर व हाल पता आजादपुरा की गिरफ्तारी पर पांच हजार रुपये का ईनाम घोषित किया है। जो भी व्यक्ति फरार आरोपी को गिरफ्तार करने में सहयोग करेगा, उसको यह धनराशि दी जाएगी। यदि उक्त आरोपी मुठभेड़ में मारा जाता है तो जांच पूरी होने के बाद पुरस्कार स्वीकृत किया जाएगा।

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मालूम हो कि क्राइम ब्रांच की टीम दो सितंबर को संजीव को झारखंड से पकड़ कर लाई थी। तीन सितंबर की सुबह आरोपी क्राइम ब्रांच कर्मियों को चकमा देकर भाग निकला था। दायित्वों में लापरवाही उजागर होने पर पुलिस अधीक्षक ने क्राइम ब्रांच के एसआई हरीशंकर, एचसीपी महेंद्र सिंह एवं कांस्टेबल देवेंद्र कुमार सिंह निलंबित कर दिया था।

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 यह था मामला 

संजीव कुमार बघेल ने शिक्षा विभाग के एबीआरसी शिवदत्त विदुआ निवासी तालाबपुरा से रिलायंस कंपनी का कैपिटल मैनेजर बनकर मुलाकात की थी। संजीव ने एबीआरसी को बताया था कि उसके पेट्रोल पंप की एक कंपनी के जेडएम (जोनल मैनेजर) से सीधे संबंध हैं, जिससे वह उसे पेट्रोल पंप आवंटित करा सकता है, जिस पर शिवदत्त ने हामी भर दी। एक फरवरी 2015 को एकमुश्त योजना के नाम पर एबीआरसी की पत्नी ऊषा के नाम तीन लाख रुपये लेकर रसीद दे दी। इसके बाद जमानत राशि के नाम 15 लाख रुपये ले लिए, फिर पेट्रोल पंप के लिए सर्वे कराने के नाम पर टालमटोल करता रहा। 15 जनवरी को सुबह 11 बजे संजीव ने फोन करके गाड़ी की सर्विस के नाम पर 17 हजार रुपये मांगे। उसके कहने पर शिवदत्त की पत्नी ने उसे रुपये दे दिए । इसके बाद संजीव ने उसका फोन नहीं उठाया। सास के घर जाकर पता किया तो वह उसके रुपये और पल्सर मोटरसाइकिल (यूपी 94 एल 5152) लेकर रफूचक्कर हो चुका था, तभी से वह फरार चल रहा है।


अन्य प्रदेशों में फ्रॉड

आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस विभाग एबीआरसी से हुई लाखों की धोखाधड़ी के अलावा और भी कई मामलों के खुलासे की तैयारी में थी, क्योंकि जनपद के अलावा उसने आगरा, झारखंड और रांची में भी फ्रॉड किए जाने की सूचनाएं पुलिस के हाथ लगी थी। 

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