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बलात्कारी को दस वर्ष का सश्रम कारावास
Updated Sat, 16 Sep 2017 01:39 AM IST
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दुष्कर्मी को दस वर्ष का सश्रम कारावास
ललितपुर।
युवती के साथ दुष्कर्म का आरोप दोष सिद्ध होने पर अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम) मनोज कुमार शुक्ला की अदालत ने एक अभियुक्त को 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यही नहीं, 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर 20 माह की अतिरिक्त सजा भी भुगतनी होगी।
प्रभारी जिला शासकीय अधिवक्ता बृजेंद्र सिंह यादव और सहायक शासकीय अधिवक्ता लखन यादव ने संयुक्त रूप से जानकारी देते हुए बताया कि थाना बार अंतर्गत एक गांव निवासी युवती ने 13 दिसंबर 2011 को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसके ही गांव के द्वारिका प्रसाद पुत्र अड़कू ने उसे अपने बाड़े में बुलाया, तब उसने उससे बेड़ा में बुलाने का कारण पूछा तो वह उससे अश्लील बातें करने लगा और बाड़े का दरवाजा बंद कर उसके साथ दुष्कर्म करने लगा। वह चिल्लाई, लेकिन किसी ने उसकी चीखपुकार नहीं सुनी और न ही उसे बचाने आया। बलात्कार करने के बाद धमकी दी कि किसी को कुछ बताया तो वह उसे जिंदा नहीं छोड़ेगा। डर के मारे उसने यह बात किसी को नहीं बताई। दो तीन माह बाद जब उसने द्वारिका को बताया कि वह गर्भ से है तो द्वारिका ने उसे बाजार से चार-पांच गोलियां लाकर दीं। गोलियां खाने के चार-पांच घंटे बाद उसे पेट में दर्द हुआ और गर्भपात हो गया। गर्भपात होने के बाद द्वारिका मृत बच्चे को लेकर कहीं चला गया। हालत खराब होने पर परिजनों को घटना की जानकारी दी, जिस पर परिजनों के साथ थाने जाकर रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रेषित किए। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। बृहस्पतिवार को अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश ने अभियुक्त द्वारिका को पीड़िता के साथ दुष्कर्म करने, गर्भपात कराने को दवा, गर्भपात कराने, जान से मारने की धमकी देने के आरोप में दोष सिद्ध पाते हुए दस वर्ष के सश्रम कारावास और कुल बीस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर 20 माह अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। न्यायाधीश ने अर्थदंड की राशि अदा होने पर पीड़िता को दस हजार रुपये दिलाने के आदेश भी दिए।
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ललितपुर।
युवती के साथ दुष्कर्म का आरोप दोष सिद्ध होने पर अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम) मनोज कुमार शुक्ला की अदालत ने एक अभियुक्त को 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यही नहीं, 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर 20 माह की अतिरिक्त सजा भी भुगतनी होगी।
प्रभारी जिला शासकीय अधिवक्ता बृजेंद्र सिंह यादव और सहायक शासकीय अधिवक्ता लखन यादव ने संयुक्त रूप से जानकारी देते हुए बताया कि थाना बार अंतर्गत एक गांव निवासी युवती ने 13 दिसंबर 2011 को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसके ही गांव के द्वारिका प्रसाद पुत्र अड़कू ने उसे अपने बाड़े में बुलाया, तब उसने उससे बेड़ा में बुलाने का कारण पूछा तो वह उससे अश्लील बातें करने लगा और बाड़े का दरवाजा बंद कर उसके साथ दुष्कर्म करने लगा। वह चिल्लाई, लेकिन किसी ने उसकी चीखपुकार नहीं सुनी और न ही उसे बचाने आया। बलात्कार करने के बाद धमकी दी कि किसी को कुछ बताया तो वह उसे जिंदा नहीं छोड़ेगा। डर के मारे उसने यह बात किसी को नहीं बताई। दो तीन माह बाद जब उसने द्वारिका को बताया कि वह गर्भ से है तो द्वारिका ने उसे बाजार से चार-पांच गोलियां लाकर दीं। गोलियां खाने के चार-पांच घंटे बाद उसे पेट में दर्द हुआ और गर्भपात हो गया। गर्भपात होने के बाद द्वारिका मृत बच्चे को लेकर कहीं चला गया। हालत खराब होने पर परिजनों को घटना की जानकारी दी, जिस पर परिजनों के साथ थाने जाकर रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रेषित किए। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। बृहस्पतिवार को अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश ने अभियुक्त द्वारिका को पीड़िता के साथ दुष्कर्म करने, गर्भपात कराने को दवा, गर्भपात कराने, जान से मारने की धमकी देने के आरोप में दोष सिद्ध पाते हुए दस वर्ष के सश्रम कारावास और कुल बीस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर 20 माह अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। न्यायाधीश ने अर्थदंड की राशि अदा होने पर पीड़िता को दस हजार रुपये दिलाने के आदेश भी दिए।
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