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पत्नी के हत्यारे पति को आजीवन कारावास की सजा
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हत्यारे पति को आजीवन कारावास
ललितपुर। बुखार होने पर घर का काम नहीं करने पर पत्नी की मिट्टी का तेल डालकर आग लगाकर हत्या करने के मामले में अपर जिला और सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) अजय पाल सिंह की अदालत ने थाना जाखलौन क्षेत्र अंतर्गत ग्राम नुनावली निवासी हत्यारे पति को आजीवन कारावास और दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। जबकि, न्यायालय ने इस मामले में सास व ससुर को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता बादाम सिंह यादव ने बताया कि पौने तीन वर्ष पूर्व थाना महरौनी अंतर्गत ग्राम सुकाड़ी निवासी निरपत अहिरवार ने थाना जाखलौन पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि घटना के दिन से चार वर्ष पूर्व उसकी 22 वर्षीय पुत्री क्रांति की शादी पूर्ण रीतिरिवाज के अनुसार ग्राम नुनावली निवासी ज्ञान सिंह के पुत्र मोतीलाल के साथ हुई थी। उसकी पुत्री को सास, ज्ञानबाई, दामाद मोतीलाल, जेठ हरीराम सभी लोग एक राय होकर एक वर्ष से उसे परेशान कर रहे थे। 22 मई 2016 से उसकी पुत्री की सास दो दिन पहले से मारपीट कर प्रताड़ित किया। उसकी पुत्री की तबियत खराब होने की वजह से इन लोगों को वह खाना नहीं बनाया तो सास-ससुर ने कहा कि तेल डालकर आग लगा दो, तो वह सब निपट लेंगे। इस पर दामाद को गुस्सा आया और उसने उनकी पुत्री क्रांति के ऊपर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी। इससे उसकी पुत्री पूरी जल गई। इसकी जानकारी जैसे ही उसे लगी तो वह अपनी पुत्री को इलाज के लिए ललितपुर अस्पताल में भर्ती किया। इसके बाद सीधे ग्वालियर ले गए, वहां पर चार दिन भर्ती रही। इसके बाद 29 मई 2016 को प्रधान व उक्त के कहने से ललितपुर आया। 30 मई 2016 को शाम छह बजे झांसी जाते समय रास्ते में तालबेहट के आगे उसकी पुत्री की मृत्यु हो गई। जबकि उक्त ससुराली दहेज की मांग भी कर रहे थे। उसने दहेज में मोटर साइकिल व अपनी हैसियत के अनुसार सब दिया था। मृतका के पिता की तहरीर पर पुलिस ने सास ज्ञानबाई, ससुर ज्ञान सिंह, पति मोतीलाल व देवर हरीराम के खिलाफ दहेज उत्पीड़न, दहेज हत्या व दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया था। जबकि, विवेचना के दौरान देवर हरीराम का नाम हटाते हुए पुलिस न्यायालय में सास ज्ञानबाई, ससुर ज्ञान सिंह व पति मोतीलाल के खिलाफ आरोप पत्र प्रस्तुत किए थे। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन था। बुधवार को न्यायालय में अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश ने उक्त मामले में पति मोतीलाल को अपनी ही पत्नी की मिट्टी का तेल डालकर जलाकर हत्या करने का दोषी पाया और हत्यारे पति को न्यायालय में आजीवन कारावास एवं दस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। जबकि न्यायालय ने उक्त मामले में सास ज्ञानबाई व ससुर ज्ञान सिंह को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
गश खाकर गिरी मां
न्यायालय द्वारा हत्या का आरोप सिद्ध पाते हुए मोतीलाल को जब आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, तो उसकी मां बेेटे की सजा सुनते ही न्यायालय परिसर में ही गश खाकर गिर पड़ी। हालांकि इस मामले में मां ज्ञानबाई खुद आरोपी थी, जिसे न्यायालय ने साक्ष्य के अभाव में बरी दिया।
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ललितपुर। बुखार होने पर घर का काम नहीं करने पर पत्नी की मिट्टी का तेल डालकर आग लगाकर हत्या करने के मामले में अपर जिला और सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) अजय पाल सिंह की अदालत ने थाना जाखलौन क्षेत्र अंतर्गत ग्राम नुनावली निवासी हत्यारे पति को आजीवन कारावास और दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। जबकि, न्यायालय ने इस मामले में सास व ससुर को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता बादाम सिंह यादव ने बताया कि पौने तीन वर्ष पूर्व थाना महरौनी अंतर्गत ग्राम सुकाड़ी निवासी निरपत अहिरवार ने थाना जाखलौन पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि घटना के दिन से चार वर्ष पूर्व उसकी 22 वर्षीय पुत्री क्रांति की शादी पूर्ण रीतिरिवाज के अनुसार ग्राम नुनावली निवासी ज्ञान सिंह के पुत्र मोतीलाल के साथ हुई थी। उसकी पुत्री को सास, ज्ञानबाई, दामाद मोतीलाल, जेठ हरीराम सभी लोग एक राय होकर एक वर्ष से उसे परेशान कर रहे थे। 22 मई 2016 से उसकी पुत्री की सास दो दिन पहले से मारपीट कर प्रताड़ित किया। उसकी पुत्री की तबियत खराब होने की वजह से इन लोगों को वह खाना नहीं बनाया तो सास-ससुर ने कहा कि तेल डालकर आग लगा दो, तो वह सब निपट लेंगे। इस पर दामाद को गुस्सा आया और उसने उनकी पुत्री क्रांति के ऊपर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी। इससे उसकी पुत्री पूरी जल गई। इसकी जानकारी जैसे ही उसे लगी तो वह अपनी पुत्री को इलाज के लिए ललितपुर अस्पताल में भर्ती किया। इसके बाद सीधे ग्वालियर ले गए, वहां पर चार दिन भर्ती रही। इसके बाद 29 मई 2016 को प्रधान व उक्त के कहने से ललितपुर आया। 30 मई 2016 को शाम छह बजे झांसी जाते समय रास्ते में तालबेहट के आगे उसकी पुत्री की मृत्यु हो गई। जबकि उक्त ससुराली दहेज की मांग भी कर रहे थे। उसने दहेज में मोटर साइकिल व अपनी हैसियत के अनुसार सब दिया था। मृतका के पिता की तहरीर पर पुलिस ने सास ज्ञानबाई, ससुर ज्ञान सिंह, पति मोतीलाल व देवर हरीराम के खिलाफ दहेज उत्पीड़न, दहेज हत्या व दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया था। जबकि, विवेचना के दौरान देवर हरीराम का नाम हटाते हुए पुलिस न्यायालय में सास ज्ञानबाई, ससुर ज्ञान सिंह व पति मोतीलाल के खिलाफ आरोप पत्र प्रस्तुत किए थे। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन था। बुधवार को न्यायालय में अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश ने उक्त मामले में पति मोतीलाल को अपनी ही पत्नी की मिट्टी का तेल डालकर जलाकर हत्या करने का दोषी पाया और हत्यारे पति को न्यायालय में आजीवन कारावास एवं दस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। जबकि न्यायालय ने उक्त मामले में सास ज्ञानबाई व ससुर ज्ञान सिंह को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
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गश खाकर गिरी मां
न्यायालय द्वारा हत्या का आरोप सिद्ध पाते हुए मोतीलाल को जब आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, तो उसकी मां बेेटे की सजा सुनते ही न्यायालय परिसर में ही गश खाकर गिर पड़ी। हालांकि इस मामले में मां ज्ञानबाई खुद आरोपी थी, जिसे न्यायालय ने साक्ष्य के अभाव में बरी दिया।
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