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एक सप्ताह में महरौनी कोतवाल के खिलाफ कार्रवाई हो, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने दिया आदेश

Tue, 23 Jul 2019 06:48 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 23 Jul 2019 06:48 PM IST
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court orders, take action against mehroni  kotwal
एक सप्ताह में महरौनी कोतवाल के खिलाफ कार्रवाई हो, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने दिया आदेश
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ललितपुर। सुप्रीम कोर्ट धारा 66 ए सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम 2008 को असंवैधानिक घोषित कर चुका है। इसके बावजूद महरौनी कोतवाल ने एक प्रकरण में उपरोक्त धारा में एफआईआर दर्ज कर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना की है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आशीष कुमार चौरसिया की अदालत ने कोतवाली प्रभारी महरौनी के खिलाफ विधिक कार्रवाई करने को पुलिस उपमहानिरीक्षक को पत्र लिखा है। साथ ही, एक सप्ताह में महरौनी कोतवाल के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के आदेश दिए हैं।
महरौनी के मोहल्ला कायस्थपुरा निवासी मनोज कुमार रिछारिया पुत्र ओमप्रकाश ने पुलिस को दिए शिकायती पत्र में बताया था कि उसके मोबाइल नंबर पर सात से 17 जुलाई तक अश्लील एवं गलत शब्दों का प्रयोग करके मैसेज भेजे एवं फोन किए गए। मैसेज भेजने वाले व्यक्ति का नाम व पता पूछने पर उक्त व्यक्ति ने अपना नाम व पता नहीं बताया। बल्कि अशिष्ट एंव अश्लील भाषा का प्रयोग करके गाली- गलौज की। उसे व उसके परिवार को जान से मारने की धमकी दी। अभी जो मैसेज उक्त मोबाइल नंबरों द्वारा भेजे गए, उसकी कॉपी संलग्न की गई है। उक्त मामलों में महरौनी कोतवाल द्वारा अज्ञात के खिलाफ धारा 504, 506 एवं 66ए सूचना प्रोद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम 2008 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया था।
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यह मामला मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में पहुंचने पर न्यायालय ने इसका परीक्षण किया और इसमें दर्ज धारा 66ए को सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक मामले में दिए आदेश के खिलाफ माना। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आशीष कुमार चौरसिया की अदालत ने इस मामले में पुलिस उपमहानिरीक्षक झांसी को लिखे पत्र में कहा कि प्रभारी निरीक्षक एके सिंह चौहान द्वारा 22 जुलाई 2019 को उक्त प्रकरण में दर्ज की गई धारा 66ए सूचना प्रौद्योगिकी संशोधन अधिनियम 2008 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा श्रेया सिंघल बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (2013) 12 एससीसी 73 के मामले में असंवैधानिक घोषित कर दिया गया है। थाना प्रभारी ने अवैध घोषित धारा में एफआईआर दर्ज कर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना की है। उक्त प्रकरण में संबंधित थाना प्रभारी के खिलाफ विधिक कार्रवाई करते हुए एक सप्ताह के अंदर की गई कार्रवाई से न्यायालय को अवगत कराएं, ताकि प्रकरण की सूचना उच्च न्यायालय इलाहाबाद के समक्ष भेजी जा सके।
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