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Lalitpur News: नहीं पकड़ सके यहां के जटायु...चित्रकूट से गोरखपुर भेजने की तैयारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। बेतवा नदी के किनारे गिद्धों (जटायु) के आवास हैं। यहां करीब तीन दर्जन कॉलोनियां बनी हुई हैं, जिसमें किंग बिल्ड व लांग बिल्ड प्रजाति के अलावा लोकर सफेद गिद्ध निवास करते हैं। गोरखपुर में किंग बिल्ड प्रजाति को विकसित करने के लिए जनपद से गिद्ध भेजने की कार्ययोजना तैयार की गई थी। इसके लिए गोरखपुर वन्य जीव बिहार के कर्मचारी जनपद आए भी थे, लेकिन वह यहां मौजूद किंग प्रजाति के गिद्ध को नहीं पकड़ पाए। इसके बाद फिर चित्रकूट से इस प्रजाति के गिद्धों को भेजने का निर्णय लिया गया है।
देवगढ़ के जंगलों में बेतवा नदी किनारे गिद्धों के प्राकृतिक आवास हैं। महावीर वन्य जीव बिहार प्रभाग मिर्जापुर की देखरेख में ये गिद्ध रहते हैं। यहां गिद्धों की करीब तीन दर्जन कॉलोनियां हैं, जहां वह निवास करते हैं। 130 से अधिक आवासों में किंग बिल्ड, लांग बिल्ड व सफेद प्रजाति के गिद्ध रहते है। किंग बिल्ड गिद्धों की प्रजाति काफी दुर्लभ है। इसे आम बोलचाल की भाषा में जटायु भी कहा जाता है। गोरखपुर में इस प्रजाति को बढ़ाने के लिए जनपद से गिद्ध पहुंचाने की कार्ययोजना शासन ने तैयार की थी। लेकिन वह इन्हें पकड़ने में नाकाम रहे, जिसके चलते फिर चित्रकूट से इन्हें ले जाना तय हुआ। जटायु प्रजाति के गिद्ध खतरे को भांप लेते हैं, इसलिए अपना स्थान बदलते रहते हैं। देवगढ़ के जंगलों में आधा दर्जन से अधिक इस प्रजाति के गिद्ध हैं। इसके अलावा अन्य वन्य जीवों की प्रजाति भी यहां मौजूद है।
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देवगढ़ वनक्षेत्र में पाए जाते हैं दुर्लभ जीव
देवगढ़ के वनक्षेत्र में कई दुर्लभ वन्य जीव मौजूद हैं। बेतवा किनारे का जंगली इलाका होने के कारण वन्य जीव पानी की मौजूदगी के कारण यहां विचरण करते हैं। यहां तेंदुआ, चिंकारा, फिशिंग कैट, चौसिंघा, सांभर, चीतल, बारासिंघा आदि जानवर मौजूद हैं। एक समय पर यहां पर शेर भी निवास करते थे, उसके नाम पर इस जंगल में नाहर घाटी बनी हुई है। हालांकि अब शेर दिखाई नहीं देते।
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देवगढ़ से गिद्धों को गोरखपुर भेजा जाना था, लेकिन इन्हें पकड़ने में टीम नाकाम रही, जिसके चलते चित्रकूट से गिद्धों को भेजा जाना तय हुआ है।
आरएस यादव, रेंजर महावीर वन्य जीव बिहार देवगढ़।
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ललितपुर। बेतवा नदी के किनारे गिद्धों (जटायु) के आवास हैं। यहां करीब तीन दर्जन कॉलोनियां बनी हुई हैं, जिसमें किंग बिल्ड व लांग बिल्ड प्रजाति के अलावा लोकर सफेद गिद्ध निवास करते हैं। गोरखपुर में किंग बिल्ड प्रजाति को विकसित करने के लिए जनपद से गिद्ध भेजने की कार्ययोजना तैयार की गई थी। इसके लिए गोरखपुर वन्य जीव बिहार के कर्मचारी जनपद आए भी थे, लेकिन वह यहां मौजूद किंग प्रजाति के गिद्ध को नहीं पकड़ पाए। इसके बाद फिर चित्रकूट से इस प्रजाति के गिद्धों को भेजने का निर्णय लिया गया है।
देवगढ़ के जंगलों में बेतवा नदी किनारे गिद्धों के प्राकृतिक आवास हैं। महावीर वन्य जीव बिहार प्रभाग मिर्जापुर की देखरेख में ये गिद्ध रहते हैं। यहां गिद्धों की करीब तीन दर्जन कॉलोनियां हैं, जहां वह निवास करते हैं। 130 से अधिक आवासों में किंग बिल्ड, लांग बिल्ड व सफेद प्रजाति के गिद्ध रहते है। किंग बिल्ड गिद्धों की प्रजाति काफी दुर्लभ है। इसे आम बोलचाल की भाषा में जटायु भी कहा जाता है। गोरखपुर में इस प्रजाति को बढ़ाने के लिए जनपद से गिद्ध पहुंचाने की कार्ययोजना शासन ने तैयार की थी। लेकिन वह इन्हें पकड़ने में नाकाम रहे, जिसके चलते फिर चित्रकूट से इन्हें ले जाना तय हुआ। जटायु प्रजाति के गिद्ध खतरे को भांप लेते हैं, इसलिए अपना स्थान बदलते रहते हैं। देवगढ़ के जंगलों में आधा दर्जन से अधिक इस प्रजाति के गिद्ध हैं। इसके अलावा अन्य वन्य जीवों की प्रजाति भी यहां मौजूद है।
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देवगढ़ वनक्षेत्र में पाए जाते हैं दुर्लभ जीव
देवगढ़ के वनक्षेत्र में कई दुर्लभ वन्य जीव मौजूद हैं। बेतवा किनारे का जंगली इलाका होने के कारण वन्य जीव पानी की मौजूदगी के कारण यहां विचरण करते हैं। यहां तेंदुआ, चिंकारा, फिशिंग कैट, चौसिंघा, सांभर, चीतल, बारासिंघा आदि जानवर मौजूद हैं। एक समय पर यहां पर शेर भी निवास करते थे, उसके नाम पर इस जंगल में नाहर घाटी बनी हुई है। हालांकि अब शेर दिखाई नहीं देते।
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देवगढ़ से गिद्धों को गोरखपुर भेजा जाना था, लेकिन इन्हें पकड़ने में टीम नाकाम रही, जिसके चलते चित्रकूट से गिद्धों को भेजा जाना तय हुआ है।
आरएस यादव, रेंजर महावीर वन्य जीव बिहार देवगढ़।