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Lalitpur News: पांडव वन का नहीं बना संपर्क मार्ग, आकर लौट गए 30 लाख
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ललितपुर। मड़ावरा में पांडव वन के संपर्क मार्ग के लिए पिछले साल 30 लाख रुपये आए थे। मगर वन विभाग की अनुमति न मिलने की वजह से बजट वापस चला गया है। यहां पर प्राचीन पांच शिवलिंग भी हैं। ऐसे में सावन में लोगों को पांडव वन जाने में काफी परेशानी होगी।
मड़ावरा वन क्षेत्र में द्वापर काल के इतिहास से जुुड़ा पांडव वन है। माना जाता है कि पांडवों ने वनवास के समय इसी जंगल में लंबा समय व्यतीत किया था। क्षेत्र में नाराहट के समीप कई प्राचीन रमणीक स्थल हैं। बरसात में यह स्थान काफी रमणीक दिखाई देते हैं, लेकिन इनके लिए पहुंच मार्ग नहीं है। जिला प्रशासन ने एक प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था, जिसे मंजूर कर कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए थे। जिला प्रशासन ने कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेजी, जिस पर शासन ने संपर्क मार्ग के निर्माण और यात्री सुविधाओं के कार्य के लिए 30 लाख रुपये जारी कर दिए। पांडव वन तक पहुंचने का मार्ग भी जंगल से होकर जाता है। इसलिए यहां सड़क निर्माण के लिए वन विभाग की अनुमति जरूरी है। जो कि अब तक नहीं मिल सकी है। यह धनराशि शासन को वापस भेजनी पड़ी। ऐसे में अब भी लोगों को बरसात के दिनों में दलदल भरे रास्तों से पहुंचकर जाना होता है।
ये बोले लोग
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वैसे तो साल भर लोग पांडव वन जाते हैं, लेकिन श्रावण मास में आस पास के स्त्री और पुरुष शंकरजी की आराधना के लिए जाते हैं। इससे उन्हें वहां पहुंचने में काफी असुविधा होती है। वाहन तो दूर की बात है, वहां पर पैदल पहुंचना भी मुश्किल होता है। - देवेंद्र दुबे, ग्रामीण।
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श्रावण मास में प्रत्येक सोमवार को सैकड़ों की संख्या में लोग शिव आराधना के लिए पांडव वन जाते हैं। लेकिन संपर्क मार्ग न होने पर खासी समस्या का सामना करना पड़ता है। प्रशासन ने मार्ग बनवाने की प्रयास किया, लेकिन वन विभाग नहीं बनने दिया। - रिंकू बिदुआ।
पर्यटन विकास ने पांडव वन संपर्क मार्ग व विकास के लिए धनराशि भेजी थी, लेकिन वन विभाग की अनुमति न मिलने के कारण यह धनराशि को वापस दे दिया गया। - हेमलता, जिला पर्यटन अधिकारी।
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मड़ावरा वन क्षेत्र में द्वापर काल के इतिहास से जुुड़ा पांडव वन है। माना जाता है कि पांडवों ने वनवास के समय इसी जंगल में लंबा समय व्यतीत किया था। क्षेत्र में नाराहट के समीप कई प्राचीन रमणीक स्थल हैं। बरसात में यह स्थान काफी रमणीक दिखाई देते हैं, लेकिन इनके लिए पहुंच मार्ग नहीं है। जिला प्रशासन ने एक प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था, जिसे मंजूर कर कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए थे। जिला प्रशासन ने कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेजी, जिस पर शासन ने संपर्क मार्ग के निर्माण और यात्री सुविधाओं के कार्य के लिए 30 लाख रुपये जारी कर दिए। पांडव वन तक पहुंचने का मार्ग भी जंगल से होकर जाता है। इसलिए यहां सड़क निर्माण के लिए वन विभाग की अनुमति जरूरी है। जो कि अब तक नहीं मिल सकी है। यह धनराशि शासन को वापस भेजनी पड़ी। ऐसे में अब भी लोगों को बरसात के दिनों में दलदल भरे रास्तों से पहुंचकर जाना होता है।
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ये बोले लोग
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वैसे तो साल भर लोग पांडव वन जाते हैं, लेकिन श्रावण मास में आस पास के स्त्री और पुरुष शंकरजी की आराधना के लिए जाते हैं। इससे उन्हें वहां पहुंचने में काफी असुविधा होती है। वाहन तो दूर की बात है, वहां पर पैदल पहुंचना भी मुश्किल होता है। - देवेंद्र दुबे, ग्रामीण।
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श्रावण मास में प्रत्येक सोमवार को सैकड़ों की संख्या में लोग शिव आराधना के लिए पांडव वन जाते हैं। लेकिन संपर्क मार्ग न होने पर खासी समस्या का सामना करना पड़ता है। प्रशासन ने मार्ग बनवाने की प्रयास किया, लेकिन वन विभाग नहीं बनने दिया। - रिंकू बिदुआ।
पर्यटन विकास ने पांडव वन संपर्क मार्ग व विकास के लिए धनराशि भेजी थी, लेकिन वन विभाग की अनुमति न मिलने के कारण यह धनराशि को वापस दे दिया गया। - हेमलता, जिला पर्यटन अधिकारी।