{"_id":"575082554f1c1b7d2f109049","slug":"construction-work-probited","type":"story","status":"publish","title_hn":"पानी है कम, भवन निर्माण पर रोक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पानी है कम, भवन निर्माण पर रोक
lalitpur
Updated Fri, 03 Jun 2016 12:30 AM IST
विज्ञापन
भ्ावन निमाऱ्ण्ा
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ललितपुर। सूखे से जूझ रहे जनपद में पानी के बचाव के लिए प्रशासन ने शहर में कड़ा कदम उठाया है। बृहस्पतिवार को विनियमित क्षेत्र के नियत प्राधिकारी ने मकानों के निर्माण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
जिलाधिकारी डा. रुपेश कुमार के निर्देश पर एसडीएम सदर/नियत प्राधिकारी रमेश चंद्र ने भवन निर्माण पर रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया है। इसमें कहा गया है कि अग्रिम आदेश तक भवन निर्माण पर पूर्णत रोक लगी रहेगी। रोजाना सैकड़ों भवन निर्माण में लाखों लीटर पानी का उपयोग किया जा रहा है, जबकि जिले में पानी की कमी है, ऐसे में सभी भवन निर्माणकर्ताओं व कालोनाईजर्स को सूखे की हालत को देखते हुए मकानों का निर्माण कार्य तुरंत बंद करने को कहा है, जिससे पानी की बर्बादी रुक सके और आने वाले दिनों में पेयजल की किल्लत न हो।
शहर के आम आदमी के साथ ही प्रशासन की ओर से जनपद के सभी लाइसेंसी अभियंता व मानचित्रकारों को भी निर्देश दे दिए गए हैं कि किसी भी भवन का नक्शा बनाते समय भवन स्वामी को स्पष्ट तौर पर सूचित कर दें कि वर्तमान में भवन निर्माण कार्य पर रोक है और निर्देश का उल्लंघन करने पर संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नगर क्षेत्र में मुहल्ला नेहरू नगर का इलाका पेयजल के लिए सबसे ज्यादा परेशान हो रहा है। लेकिन, नेहरू नगर में बड़े पैमाने पर भवन निर्माण कार्य जारी है।
विज्ञापन
वाहन धुलाई सेंटर पर भी रोक जरूरी
शहर में दो दर्जन से ज्यादा वाहन धुलाई सेंटर के अलावा ऑटो एजेंसी पर रोज हजारों लीटर पानी गाड़ियों की धुलाई में बर्बाद हो रहा है। प्रशासन को इन पर भी रोकथाम के लिए भी कड़े कदम उठाना जरूरी हैं। पाइप के जरिए एक वाहन पर ही कई लीटर पानी बर्बाद कर दिया जाता है। इन धुलाई सेंटरों पर पानी की रोकथाम के लिए पाइप की जगह डिब्बे में पानी लेकर गाड़ी की धुलाई के नियम लागू होने चाहिए, जिससे हजारों लीटर पानी बर्बाद होने से रोका जा सके।
समीपवर्ती जिलों में धारा 144 लागू
जनपद की सीमा पर बसे मध्य प्रदेश के जिलों में पहले से ही पेयजल की किल्लत को देखते हुए भवन निर्माण पर रोक लगी हुई है। टीकमगढ़ में तो मार्च माह से ही भवन निर्माण पर रोक लगी है। इसके अलावा चंदेरी, अशोकनगर व बीना में पानी की समस्या को देखते हुए धारा 144 लागू कर दी गई। धारा 144 का उपयोग इन जिलों व कस्बों में पानी बचाने के लिए किया जा रहा है। इन जिलों में धारा 144 लागू होने के बाद पानी के औद्योगिक उपयोग पर भी रोक लगा दी गई है। जल स्रोतों से सीधे मोटर लगाकर पानी नहीं खींचा जा सकता है। समीपवर्ती जिलों में पेयजल संकट होने के बाद जिले में भी इसकी दस्तक सुनाई दे रही है।
पूरे जिले में लागू हो प्रतिबंध
ललितपुर। पानी के बचाव के लिए शहर में मकानों के निर्माण पर रोक लगा दी गई है। पूरा जिला पानी के भीषण संकट से जूझ रहा है। ऐसे में यदि जिले भर में मकानों के निर्माण पर रोक लगाई जाती तो और बेहतर होता। मकानों के निर्माण में लाखों लीटर पानी लग जाता है। रोक लगने से पानी की बचत होगी।
विज्ञापन
जिलाधिकारी डा. रुपेश कुमार के निर्देश पर एसडीएम सदर/नियत प्राधिकारी रमेश चंद्र ने भवन निर्माण पर रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया है। इसमें कहा गया है कि अग्रिम आदेश तक भवन निर्माण पर पूर्णत रोक लगी रहेगी। रोजाना सैकड़ों भवन निर्माण में लाखों लीटर पानी का उपयोग किया जा रहा है, जबकि जिले में पानी की कमी है, ऐसे में सभी भवन निर्माणकर्ताओं व कालोनाईजर्स को सूखे की हालत को देखते हुए मकानों का निर्माण कार्य तुरंत बंद करने को कहा है, जिससे पानी की बर्बादी रुक सके और आने वाले दिनों में पेयजल की किल्लत न हो।
विज्ञापन
शहर के आम आदमी के साथ ही प्रशासन की ओर से जनपद के सभी लाइसेंसी अभियंता व मानचित्रकारों को भी निर्देश दे दिए गए हैं कि किसी भी भवन का नक्शा बनाते समय भवन स्वामी को स्पष्ट तौर पर सूचित कर दें कि वर्तमान में भवन निर्माण कार्य पर रोक है और निर्देश का उल्लंघन करने पर संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नगर क्षेत्र में मुहल्ला नेहरू नगर का इलाका पेयजल के लिए सबसे ज्यादा परेशान हो रहा है। लेकिन, नेहरू नगर में बड़े पैमाने पर भवन निर्माण कार्य जारी है।
विज्ञापन
वाहन धुलाई सेंटर पर भी रोक जरूरी
शहर में दो दर्जन से ज्यादा वाहन धुलाई सेंटर के अलावा ऑटो एजेंसी पर रोज हजारों लीटर पानी गाड़ियों की धुलाई में बर्बाद हो रहा है। प्रशासन को इन पर भी रोकथाम के लिए भी कड़े कदम उठाना जरूरी हैं। पाइप के जरिए एक वाहन पर ही कई लीटर पानी बर्बाद कर दिया जाता है। इन धुलाई सेंटरों पर पानी की रोकथाम के लिए पाइप की जगह डिब्बे में पानी लेकर गाड़ी की धुलाई के नियम लागू होने चाहिए, जिससे हजारों लीटर पानी बर्बाद होने से रोका जा सके।
समीपवर्ती जिलों में धारा 144 लागू
जनपद की सीमा पर बसे मध्य प्रदेश के जिलों में पहले से ही पेयजल की किल्लत को देखते हुए भवन निर्माण पर रोक लगी हुई है। टीकमगढ़ में तो मार्च माह से ही भवन निर्माण पर रोक लगी है। इसके अलावा चंदेरी, अशोकनगर व बीना में पानी की समस्या को देखते हुए धारा 144 लागू कर दी गई। धारा 144 का उपयोग इन जिलों व कस्बों में पानी बचाने के लिए किया जा रहा है। इन जिलों में धारा 144 लागू होने के बाद पानी के औद्योगिक उपयोग पर भी रोक लगा दी गई है। जल स्रोतों से सीधे मोटर लगाकर पानी नहीं खींचा जा सकता है। समीपवर्ती जिलों में पेयजल संकट होने के बाद जिले में भी इसकी दस्तक सुनाई दे रही है।
पूरे जिले में लागू हो प्रतिबंध
ललितपुर। पानी के बचाव के लिए शहर में मकानों के निर्माण पर रोक लगा दी गई है। पूरा जिला पानी के भीषण संकट से जूझ रहा है। ऐसे में यदि जिले भर में मकानों के निर्माण पर रोक लगाई जाती तो और बेहतर होता। मकानों के निर्माण में लाखों लीटर पानी लग जाता है। रोक लगने से पानी की बचत होगी।