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चार साल से पार्क खुलने का इंतजार कर रहे कॉलोनीवासी
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ललितपुर। अमृत योजना के तहत नवनिर्मित पार्क अभी तक जनमानस के लिए नहीं खोला जा सका है। भुगतान के अभाव में ठेकेदार ने उसे नगर पालिका परिषद के लिए हैंडओवर नहीं किया है। इस मामले से अधिशासी अधिकारी पूरी तरह अनभिज्ञ हैं। इससे समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। वहीं, स्थानीय लोग पार्क खुलने का बेसब्री का इंतजार कर रहे हैं।
वर्ष 2016 में अमृत योजना के अंतर्गत कांशीराम आवासीय कॉलोनी (आईटीआई के पीछे) में पार्क स्वीकृत किया गया था। इसके बाद चयनित ठेकेदार ने पार्क का निर्माण आरंभ कर दिया। जब पार्क पूूर्ण होने की बारी आई तो शासन ने पार्क के लिए अंतिम किस्त रोक दी। ठेकेदार ने अपनी जेब से पैसा लगाकर पार्क को पूरा कर दिया लेकिन भुगतान के अभाव में पार्क नगर पालिका के लिए अभी तक हैंडओवर नहीं किया गया है। इससे पार्क का लाभ स्थानीय लोगों को नहीं मिल पा रहा है। बच्चे भी पार्क के गेट में ताला लगे होने से मायूस हैं। वाटर कूलर में जाले लग गए हैं। वहीं, फव्वारे में भरे पानी में काई लग गई है। इन दिनों स्थानीय लोग पार्क की दीवार और गेट का उपयोग कपड़े सुखाने में कर रहे हैं। उधर, ठेकेदार नसीर का कहना है कि पार्क निर्माण में पंद्रह लाख रुपये का ही भुगतान हो सका है। आठ लाख रुपये का भुगतान अभी भी बाकी है।
चार साल से पार्क की चाबी हमारे पास है। हम भी चाहते हैं कि पार्क खोला जाए लेकिन वह हैंडओवर नहीं हो पा रहा है। जब तक पार्क नगर पालिका के सुपुर्द नहीं होगा, तब तक पार्क खुलने की समस्या बनी रहेगी। असलम
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पार्क के निर्माण में लाखों रुपये लगाए गए हैं। इसके बाद भी लोगों को पार्क नहीं खोला जा रहा है। नगर पालिका को चाहिए कि वह ठेकेदार का भुगतान कर दें, ताकि पार्क खोलने में आ रही अड़चन दूर हो सके। फरीद
पार्क में तालाबंदी रहने से स्थानीय लोग उसमें बैठ भी नहीं पाते हैं। सभी लोग बाहर से पार्क को निहारते रहते हैं। बच्चे भी यहां-वहां खेलने के लिए मजबूर हैं। लोग परेशान हैं कि पार्क कब खुलेगा। शानू
कॉलोनी में जब पार्क का निर्माण किया जा रहा था, तब सभी लोग खुश थे। अब गेट पर तालाबंदी देखकर गुस्सा आता है लेकिन कर भी क्या सकते हैं? नगर पालिका के अधिकारियों को इसके बारे में सोचना चाहिए। दिनेश
पार्क के हैंडओवर होने की जानकारी नहीं है। इसकी पत्रावली को देखकर ही कुछ कह पाएंगे। निहालचंद्र, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद
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वर्ष 2016 में अमृत योजना के अंतर्गत कांशीराम आवासीय कॉलोनी (आईटीआई के पीछे) में पार्क स्वीकृत किया गया था। इसके बाद चयनित ठेकेदार ने पार्क का निर्माण आरंभ कर दिया। जब पार्क पूूर्ण होने की बारी आई तो शासन ने पार्क के लिए अंतिम किस्त रोक दी। ठेकेदार ने अपनी जेब से पैसा लगाकर पार्क को पूरा कर दिया लेकिन भुगतान के अभाव में पार्क नगर पालिका के लिए अभी तक हैंडओवर नहीं किया गया है। इससे पार्क का लाभ स्थानीय लोगों को नहीं मिल पा रहा है। बच्चे भी पार्क के गेट में ताला लगे होने से मायूस हैं। वाटर कूलर में जाले लग गए हैं। वहीं, फव्वारे में भरे पानी में काई लग गई है। इन दिनों स्थानीय लोग पार्क की दीवार और गेट का उपयोग कपड़े सुखाने में कर रहे हैं। उधर, ठेकेदार नसीर का कहना है कि पार्क निर्माण में पंद्रह लाख रुपये का ही भुगतान हो सका है। आठ लाख रुपये का भुगतान अभी भी बाकी है।
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चार साल से पार्क की चाबी हमारे पास है। हम भी चाहते हैं कि पार्क खोला जाए लेकिन वह हैंडओवर नहीं हो पा रहा है। जब तक पार्क नगर पालिका के सुपुर्द नहीं होगा, तब तक पार्क खुलने की समस्या बनी रहेगी। असलम
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पार्क के निर्माण में लाखों रुपये लगाए गए हैं। इसके बाद भी लोगों को पार्क नहीं खोला जा रहा है। नगर पालिका को चाहिए कि वह ठेकेदार का भुगतान कर दें, ताकि पार्क खोलने में आ रही अड़चन दूर हो सके। फरीद
पार्क में तालाबंदी रहने से स्थानीय लोग उसमें बैठ भी नहीं पाते हैं। सभी लोग बाहर से पार्क को निहारते रहते हैं। बच्चे भी यहां-वहां खेलने के लिए मजबूर हैं। लोग परेशान हैं कि पार्क कब खुलेगा। शानू
कॉलोनी में जब पार्क का निर्माण किया जा रहा था, तब सभी लोग खुश थे। अब गेट पर तालाबंदी देखकर गुस्सा आता है लेकिन कर भी क्या सकते हैं? नगर पालिका के अधिकारियों को इसके बारे में सोचना चाहिए। दिनेश
पार्क के हैंडओवर होने की जानकारी नहीं है। इसकी पत्रावली को देखकर ही कुछ कह पाएंगे। निहालचंद्र, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद