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सीएमएस व नर्स का एक माह का वेतन रोका
ब्यूरो
Updated Mon, 28 Dec 2015 01:15 AM IST
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ललितपुर। मंडलायुक्त ने भ्रमण के दूसरे दिन जिला चिकित्सालय, सदर कोतवाली और तहसील का निरीक्षण किया। इस दौरान खामियों मिलने पर उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को फटकार लगाई।
जिला चिकित्सालय में मिली अव्यवस्थाओं पर उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक का एक माह का वेतन रोक दिया। साथ ही संविदा पर तैनात स्टाफ नर्स द्वारा ब्लड प्रेशर चेक नहीं कर पाने पर उन्होंने नर्स का भी एक माह का वेतन रोक दिया।
रविवार को मंडलायुक्त के राममोहन राव ने जिला चिकित्सालय का निरीक्षण किया। गाड़ी से उतरते ही चिकित्सालय के प्रवेश द्वार पर बनी नाली में लगी टूटी जालियों को देखकर वह भड़क गए और उन्होंने जालियों को सही कराने के निर्देश दिए। इसके बाद वह जब भर्ती वार्डों में निरीक्षण करने पहुंचे तो वहा लगभग समस्त खिड़कियों में लगे कांचों को टूटा पाया। उन्होंने खिड़कियों में कांच लगवाने के निर्देश दिए। वह महिला सर्जीकल वार्ड में गए, तो वहां पर रखी सक्सन मशीन को देखा।
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उन्होंने सीएमएस को एक बार फिर फटकार लगाई, क्योंकि सक्सन मशीन की नली जो मरीज के मुंह के अंदर से गले में डाली जाती है, वह काफी गंदी थी और दो जगह से टूटी हुई थी। उन्होंने पाया कि जिला चिकित्सालय पुरुष सीएमएस डा. संजय वासवानी द्वारा चिकित्सालय की व्यवस्थाओं और उपचार के दौरान प्रयोग की जा रही मशीनों व औजारों का निरीक्षण नहीं किया जाता है। इस पर उन्होंने सीएमएस का एक माह का वेतन रोक दिया।
निरीक्षण के दौरान मंडलायुक्त जब महिला सर्जिकल वार्ड पहुंचे तो उन्होंने वार्ड में संविदा पर तैनात स्टाफ नर्स निशा सचान से वहां रखी सक्सन मशीन के प्रयोग करने की विधि के बारे में पूछा, उसके बाद उन्होंने नर्स से सीएमएस का ब्लड प्रेशर चेक करने को कहा। ब्लड प्रेशर चेक करने के दौरान काफी समय तक वह बेल्ट नहीं बांध सकी। नर्स ने नब्ज जांचने वाला स्टेथोस्कोप उल्टी ओर से लगा लिया और वह नब्ज कहां चेक करते हैं, यह भी ठीक से नहीं बता सकी। इस पर मंडलायुक्त ने नर्स का एक माह का वेतन रोक दिया।
साथ ही उन्होंने सीएमएस को संविदा पर तैनात समस्त स्टाफ नर्सों को 15 दिवसीय ट्रेनिंग देने के निर्देश दिए। 15 दिन बाद जिलाधिकारी को ट्रेनिंग के बाद स्टाफ नर्सों की परीक्षा लेने को कहा और परीक्षा में फेल होने पर संविदा स्टाफ नर्स को नौकरी से हटाने के निर्देश दिए।
जिला चिकित्सालय के निरीक्षण के बाद उन्होंने सदर कोतवाली का निरीक्षण किया, उन्होंने कोतवाली परिसर में रखे वाहनों की नीलामी कराने के निर्देश दिए। उसके बाद उन्होंने कंप्यूटर रूम का निरीक्षण कर कंप्यूटर ऑपरेटर से क्राइम एंड क्रिमनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम के बारे जानकारी ली। उन्होंने कंप्यूटर ऑपरेटर से एक ऑनलाइन एफआईआर दर्ज कराई। उन्होंने ऑपरेटर मधुर तिवारी के कार्य को देखते हुए तारीफ की।
उन्होंने कार्यालय का निरीक्षण कर अभिलेखों व रजिस्टरों के बारे में जानकारी प्राप्त की। शिकायती प्रार्थना पत्रों का निरस्तीकरण न होने व शिकायती पत्रों की एंट्री दर्ज नहीं होने पर उन्होंने सदर सीओ, कोतवाली प्रभारी व दीवान की फटकार लगाई व दीवान के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए। उन्होंने अपराध रजिस्टर, त्योहार रजिस्टर, अवकाश रजिस्टर, मालखाना रजिस्टर, चोरी के माल की बरामदगी का रजिस्टर समेत अन्य रजिस्टरों व अभिलेखों को जांचा।
बनाया एंट्री रजिस्टर
मंडलायुक्त द्वारा रविवार को सदर कोतवाली के निरीक्षण की खबर लगते ही कोतवाली स्टाफ ने आननफानन में 23 दिसंबर से जनता के शिकायती प्रार्थना पत्रों की एंट्री के रजिस्टर को तैयार कर एंट्री शुरू कर दी। मंडलायुक्त ने कोतवाली प्रभारी से 23 दिसंबर से पहले की एंट्री के बारे में जानकारी की तो वह नहीं बता सके।
जबकि, मुख्यमंत्री ने समस्त कोतवाली, थाना व चौकी प्रभारियों को निर्देश दिए थे कि थानों में आने वाले शिकायती पत्रों की रजिस्टर में एंट्री की जाए। मंडलायुक्त ने इस पर नाराजी जताई।
कोतवाली में नहीं घुसने दिया फरियादियों को
जब मंडलायुक्त कोतवाली का निरीक्षण कर रहे थे, तो एक फरियादी महिला अपने परिजनों व छोटे-छोटे बच्चों के साथ कोतवाली में शिकायत लेकर आई थी। लेकिन, पीड़ित महिला को कोतवाली के गेट पर ही रोक लिया गया। पीड़िता रीना इंदौर की निवासी है उसका विवाह मुहल्ला विष्णु पुरा में हुआ है।
उसकी सास, ससुर, देवर और देवरानी मारपीट कर दी थी, जिसकी शिकायत करने वह कोतवाली आई थी। गेट के अंदर नहीं जाने देने के बाद पीड़िता कोतवाली के सामने सड़क की दूसरी ओर बैठकर मंडलायुक्त के बाहर निकलने का इंतजार करने लगी। जैसे ही मंडलायुक्त बाहर आए पीड़िता व उसके परिजन उनके पास पहुंचे और अपनी समस्या बतायी। इस पर उन्होंने एसएसआई निगवेंद्र कुमार सिंह को मामले की जांच करने के निर्देश दिए।
दोनों चिकित्सालयों में नहीं मिले डस्ट बिन
मंडलायुक्त ने जिला चिकित्सालय महिला व पुरुष दोनों का निरीक्षण किया, लेकिन उन्हें किसी भी वार्ड में डस्टविन नहीं मिला। जबकि, नियमत: प्रत्येक पलंग के नीचे एक डस्टविन होना आवश्यक है।
मरीजों को बांटा गया कच्चा दूध
महिला जिला चिकित्सालय में भर्ती जच्चा-बच्चा को सरकार द्वारा खाना और दूध की सुविधा दी जाती है। मंडलायुक्त के निरीक्षण के दौरान महिला चिकित्सालय के जच्चा- बच्चा को कच्चा दूध दिया जा रहा था। सीएमएस ने मरीजों को बाजार से खरीदी गई दूध की थैैली पकड़ा दी। मरीज दूध को कैसे गर्म करेगा, इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
एनआरसी में मात्र चार बच्चे
जब मंडलायुक्त एनआरसी वार्ड में पहुंचे तो वार्डों के दो कक्षों में उनको चार कुपोषित बच्चे ही भर्ती मिले। इस पर वह स्टाफ व सीएमओ से खफा हुए। उन्होंने सीएमओ को निर्देश दिए कि आगे से यदि कोई पलंग खाली रहता है एनआरसी वार्ड में तैनात दो कर्मियों में से एक को हटा दिया जाए।
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जिला चिकित्सालय में मिली अव्यवस्थाओं पर उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक का एक माह का वेतन रोक दिया। साथ ही संविदा पर तैनात स्टाफ नर्स द्वारा ब्लड प्रेशर चेक नहीं कर पाने पर उन्होंने नर्स का भी एक माह का वेतन रोक दिया।
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रविवार को मंडलायुक्त के राममोहन राव ने जिला चिकित्सालय का निरीक्षण किया। गाड़ी से उतरते ही चिकित्सालय के प्रवेश द्वार पर बनी नाली में लगी टूटी जालियों को देखकर वह भड़क गए और उन्होंने जालियों को सही कराने के निर्देश दिए। इसके बाद वह जब भर्ती वार्डों में निरीक्षण करने पहुंचे तो वहा लगभग समस्त खिड़कियों में लगे कांचों को टूटा पाया। उन्होंने खिड़कियों में कांच लगवाने के निर्देश दिए। वह महिला सर्जीकल वार्ड में गए, तो वहां पर रखी सक्सन मशीन को देखा।
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उन्होंने सीएमएस को एक बार फिर फटकार लगाई, क्योंकि सक्सन मशीन की नली जो मरीज के मुंह के अंदर से गले में डाली जाती है, वह काफी गंदी थी और दो जगह से टूटी हुई थी। उन्होंने पाया कि जिला चिकित्सालय पुरुष सीएमएस डा. संजय वासवानी द्वारा चिकित्सालय की व्यवस्थाओं और उपचार के दौरान प्रयोग की जा रही मशीनों व औजारों का निरीक्षण नहीं किया जाता है। इस पर उन्होंने सीएमएस का एक माह का वेतन रोक दिया।
निरीक्षण के दौरान मंडलायुक्त जब महिला सर्जिकल वार्ड पहुंचे तो उन्होंने वार्ड में संविदा पर तैनात स्टाफ नर्स निशा सचान से वहां रखी सक्सन मशीन के प्रयोग करने की विधि के बारे में पूछा, उसके बाद उन्होंने नर्स से सीएमएस का ब्लड प्रेशर चेक करने को कहा। ब्लड प्रेशर चेक करने के दौरान काफी समय तक वह बेल्ट नहीं बांध सकी। नर्स ने नब्ज जांचने वाला स्टेथोस्कोप उल्टी ओर से लगा लिया और वह नब्ज कहां चेक करते हैं, यह भी ठीक से नहीं बता सकी। इस पर मंडलायुक्त ने नर्स का एक माह का वेतन रोक दिया।
साथ ही उन्होंने सीएमएस को संविदा पर तैनात समस्त स्टाफ नर्सों को 15 दिवसीय ट्रेनिंग देने के निर्देश दिए। 15 दिन बाद जिलाधिकारी को ट्रेनिंग के बाद स्टाफ नर्सों की परीक्षा लेने को कहा और परीक्षा में फेल होने पर संविदा स्टाफ नर्स को नौकरी से हटाने के निर्देश दिए।
जिला चिकित्सालय के निरीक्षण के बाद उन्होंने सदर कोतवाली का निरीक्षण किया, उन्होंने कोतवाली परिसर में रखे वाहनों की नीलामी कराने के निर्देश दिए। उसके बाद उन्होंने कंप्यूटर रूम का निरीक्षण कर कंप्यूटर ऑपरेटर से क्राइम एंड क्रिमनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम के बारे जानकारी ली। उन्होंने कंप्यूटर ऑपरेटर से एक ऑनलाइन एफआईआर दर्ज कराई। उन्होंने ऑपरेटर मधुर तिवारी के कार्य को देखते हुए तारीफ की।
उन्होंने कार्यालय का निरीक्षण कर अभिलेखों व रजिस्टरों के बारे में जानकारी प्राप्त की। शिकायती प्रार्थना पत्रों का निरस्तीकरण न होने व शिकायती पत्रों की एंट्री दर्ज नहीं होने पर उन्होंने सदर सीओ, कोतवाली प्रभारी व दीवान की फटकार लगाई व दीवान के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए। उन्होंने अपराध रजिस्टर, त्योहार रजिस्टर, अवकाश रजिस्टर, मालखाना रजिस्टर, चोरी के माल की बरामदगी का रजिस्टर समेत अन्य रजिस्टरों व अभिलेखों को जांचा।
बनाया एंट्री रजिस्टर
मंडलायुक्त द्वारा रविवार को सदर कोतवाली के निरीक्षण की खबर लगते ही कोतवाली स्टाफ ने आननफानन में 23 दिसंबर से जनता के शिकायती प्रार्थना पत्रों की एंट्री के रजिस्टर को तैयार कर एंट्री शुरू कर दी। मंडलायुक्त ने कोतवाली प्रभारी से 23 दिसंबर से पहले की एंट्री के बारे में जानकारी की तो वह नहीं बता सके।
जबकि, मुख्यमंत्री ने समस्त कोतवाली, थाना व चौकी प्रभारियों को निर्देश दिए थे कि थानों में आने वाले शिकायती पत्रों की रजिस्टर में एंट्री की जाए। मंडलायुक्त ने इस पर नाराजी जताई।
कोतवाली में नहीं घुसने दिया फरियादियों को
जब मंडलायुक्त कोतवाली का निरीक्षण कर रहे थे, तो एक फरियादी महिला अपने परिजनों व छोटे-छोटे बच्चों के साथ कोतवाली में शिकायत लेकर आई थी। लेकिन, पीड़ित महिला को कोतवाली के गेट पर ही रोक लिया गया। पीड़िता रीना इंदौर की निवासी है उसका विवाह मुहल्ला विष्णु पुरा में हुआ है।
उसकी सास, ससुर, देवर और देवरानी मारपीट कर दी थी, जिसकी शिकायत करने वह कोतवाली आई थी। गेट के अंदर नहीं जाने देने के बाद पीड़िता कोतवाली के सामने सड़क की दूसरी ओर बैठकर मंडलायुक्त के बाहर निकलने का इंतजार करने लगी। जैसे ही मंडलायुक्त बाहर आए पीड़िता व उसके परिजन उनके पास पहुंचे और अपनी समस्या बतायी। इस पर उन्होंने एसएसआई निगवेंद्र कुमार सिंह को मामले की जांच करने के निर्देश दिए।
दोनों चिकित्सालयों में नहीं मिले डस्ट बिन
मंडलायुक्त ने जिला चिकित्सालय महिला व पुरुष दोनों का निरीक्षण किया, लेकिन उन्हें किसी भी वार्ड में डस्टविन नहीं मिला। जबकि, नियमत: प्रत्येक पलंग के नीचे एक डस्टविन होना आवश्यक है।
मरीजों को बांटा गया कच्चा दूध
महिला जिला चिकित्सालय में भर्ती जच्चा-बच्चा को सरकार द्वारा खाना और दूध की सुविधा दी जाती है। मंडलायुक्त के निरीक्षण के दौरान महिला चिकित्सालय के जच्चा- बच्चा को कच्चा दूध दिया जा रहा था। सीएमएस ने मरीजों को बाजार से खरीदी गई दूध की थैैली पकड़ा दी। मरीज दूध को कैसे गर्म करेगा, इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
एनआरसी में मात्र चार बच्चे
जब मंडलायुक्त एनआरसी वार्ड में पहुंचे तो वार्डों के दो कक्षों में उनको चार कुपोषित बच्चे ही भर्ती मिले। इस पर वह स्टाफ व सीएमओ से खफा हुए। उन्होंने सीएमओ को निर्देश दिए कि आगे से यदि कोई पलंग खाली रहता है एनआरसी वार्ड में तैनात दो कर्मियों में से एक को हटा दिया जाए।