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जीविकोपार्जन में हाथ बंटा रहे बच्चे
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 29 Apr 2016 12:53 AM IST
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school , lalitpur news
- फोटो : demo
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ललितपुर। सूखे में जीविकोपार्जन के संकट से जूझ रहे परिवारों के लिए उनके बच्चे मददगार बन गए हैं। तमाम बच्चे परिवार के साथ या तो मजदूरी कर रहे हैं या महुआ बीन रहे हैं अथवा अपने छोटे भैया-बहनों को देखभाल में जुटे हैं। नतीजा यह है कि स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति काफी गिर गई है। वर्तमान में 20 प्रतिशत के आसपास ही बच्चों की उपस्थिति दर्ज की जा रही है।
जिले के 1,049 प्राथमिक एवं 492 पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में 1.98 लाख के आसपास बच्चों का नामांकन है। इसके मुकाबले स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति न के बराबर बनी हुई है। कई विद्यालयों में तो अफसरों को निरीक्षण के समय बच्चे नहीं मिल रहे हैं। अन्य विद्यालयों में भी बच्चों की हाजिरी संतोषजनक नहीं है। गत दिवस बीएसए शमीम खानम ने अनेक विद्यालयों का निरीक्षण किया था।
इस दौरान पूर्व माध्यमिक विद्यालय पाचौनी में 126 के मुकाबले शून्य, प्राथमिक विद्यालय बीघाखेत में 107 के सापेक्ष शून्य, पूर्व माध्यमिक विद्यालय मथुराडांग में 99 के मुकाबले 12, पूर्व माध्यमिक विद्यालय दशरारा में 106 के सापेक्ष 14 और पूर्व माध्यमिक विद्यालय बार में 58 के मुकाबले 17 बच्चे उपस्थित मिले थे।
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इससे पहले प्रभारी बीएसए एनएल शर्मा ने विभिन्न विद्यालयों का निरीक्षण किया था। निरीक्षण में कई स्कूलों में या तो बच्चे काफी कम थे या फिर बच्चे मौजूद नहीं थे। सह समन्वयकों के निरीक्षण में भी ऐसा ही हाल है। बच्चों की उपस्थिति कम होने के पीछे कई कारण निकलकर आ रहे हैं। इसमें भीषण सूखा, स्कूलों में पेयजल संकट, शादी समारोह और महुआ का सीजन आदि शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त कई बच्चे अपने अभिभावकों के साथ मजदूरी कर परिवार की आय बढ़ाने का काम कर रहे हैं। जो बच्चे मजदूरी के लायक नहीं हैं, वह अभिभावकों की गैर मौजूदगी में अपने छोटे भैया- बहनों की देखभाल कर रहे हैं। इस स्थिति में स्कूलों सन्नाटा पसरा है। कुछेक ही स्कूलों में रौनक दिखाई दे रही है।
स्कूलों में बच्चों की कम उपस्थिति के पीछे प्रमुख कारण महुआ का सीजन है। तमाम बच्चे सुबह से महुआ बीनने निकल जाते हैं, जिससे वह स्कूल जाने से वंचित हो जाते हैँ। शिक्षकों को विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
- शमीम खानम, बीएसए ललितपुर।
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जिले के 1,049 प्राथमिक एवं 492 पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में 1.98 लाख के आसपास बच्चों का नामांकन है। इसके मुकाबले स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति न के बराबर बनी हुई है। कई विद्यालयों में तो अफसरों को निरीक्षण के समय बच्चे नहीं मिल रहे हैं। अन्य विद्यालयों में भी बच्चों की हाजिरी संतोषजनक नहीं है। गत दिवस बीएसए शमीम खानम ने अनेक विद्यालयों का निरीक्षण किया था।
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इस दौरान पूर्व माध्यमिक विद्यालय पाचौनी में 126 के मुकाबले शून्य, प्राथमिक विद्यालय बीघाखेत में 107 के सापेक्ष शून्य, पूर्व माध्यमिक विद्यालय मथुराडांग में 99 के मुकाबले 12, पूर्व माध्यमिक विद्यालय दशरारा में 106 के सापेक्ष 14 और पूर्व माध्यमिक विद्यालय बार में 58 के मुकाबले 17 बच्चे उपस्थित मिले थे।
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इससे पहले प्रभारी बीएसए एनएल शर्मा ने विभिन्न विद्यालयों का निरीक्षण किया था। निरीक्षण में कई स्कूलों में या तो बच्चे काफी कम थे या फिर बच्चे मौजूद नहीं थे। सह समन्वयकों के निरीक्षण में भी ऐसा ही हाल है। बच्चों की उपस्थिति कम होने के पीछे कई कारण निकलकर आ रहे हैं। इसमें भीषण सूखा, स्कूलों में पेयजल संकट, शादी समारोह और महुआ का सीजन आदि शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त कई बच्चे अपने अभिभावकों के साथ मजदूरी कर परिवार की आय बढ़ाने का काम कर रहे हैं। जो बच्चे मजदूरी के लायक नहीं हैं, वह अभिभावकों की गैर मौजूदगी में अपने छोटे भैया- बहनों की देखभाल कर रहे हैं। इस स्थिति में स्कूलों सन्नाटा पसरा है। कुछेक ही स्कूलों में रौनक दिखाई दे रही है।
स्कूलों में बच्चों की कम उपस्थिति के पीछे प्रमुख कारण महुआ का सीजन है। तमाम बच्चे सुबह से महुआ बीनने निकल जाते हैं, जिससे वह स्कूल जाने से वंचित हो जाते हैँ। शिक्षकों को विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
- शमीम खानम, बीएसए ललितपुर।